बिहार के इन दो भाइयों की नर्सरी में मिलता है थाईलैंड का बनाना मैंगो और जापानी मियाजाकी आम, सालाना लाखों का टर्नओवर
जमुई में दो भाइयों की 40 साल पुरानी नर्सरी में थाइलैंड का बनाना मैंगो और जापान का मियाजाकी आम मिलता है. सालाना लाखों का टर्नओवर.

Published : July 1, 2026 at 10:10 AM IST
जमुई: बिहार के जमुई जिले के सिंगारपुर गांव में दो भाइयों की मेहनत एक मिसाल बन गई है. करीब 40 वर्ष पहले खेती-किसानी के साथ नर्सरी शुरू करने वाले शत्रुधन साव के बेटे कनिष्क कुमार गुप्ता और राम प्रसाद गुप्ता अब विदेशी आमों की खेती कर रहे हैं.
पढ़ाई के साथ खेती, फिर शुरू की पुष्पवाटिका नर्सरी: दोनों भाइयों ने पढ़ाई के साथ-साथ खेती की. अच्छी नौकरी न मिलने पर उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग ली और गांव में ही फूल-फलों की नर्सरी 'पुष्पवाटिका' शुरू कर दी. धीरे-धीरे पूरा परिवार इसमें शामिल हो गया.
थाइलैंड का बनाना मैंगो और जापान का मियाजाकी आम: नर्सरी संचालक कनिष्क कुमार गुप्ता ने बताया कि जमुई की मिट्टी विदेशी किस्मों के लिए उपयुक्त है. यहां थाइलैंड के बनाना मैंगो और जापान के मियाजाकी आम की शुरुआत हो चुकी है. बनाना मैंगो 18 इंच लंबा और 800 ग्राम से 1 किलो तक का हो सकता है.
एक पेड़ पर कई किस्म के आम: नर्सरी में एक ही पौधे पर 2 से 12 तक विभिन्न किस्मों के आम लगाए जा रहे हैं. राम प्रसाद गुप्ता ने बताया कि मेहनत और नवाचार से गांव वालों के तानों को झुठलाया और सफलता हासिल की. अब पारंपरिक आमों के साथ विदेशी किस्में भी तैयार हो रही है.

"कुछ नया करने की सोच हमेशा हम लोगों को आगे बढ़ाती रही. हालांकि गांव वाले ताना देते थे कि दोनों भाई पागल हो गये हैं. हमने उनके ताने पर ध्यान नहीं दिया और मेहनत सफल रही. आगे भी सतत प्रयास जारी है. आज हमारे नर्सरी में नार्मल फल-फूल के साथ कई अन्य पौधे हैं. आम की गुठली को भी किस प्रकार काम में लाया जा सकता है, उस पर भी हम काम करते हैं."-राम प्रसाद गुप्ता, किसान
50 से अधिक विदेशी आमों की नर्सरी होगी शुरू: जल्द ही 50 से ज्यादा विदेशी नस्ल के आमों के पौधे उपलब्ध होंगे. नर्सरी में मालदा, दशहरी, अम्रपाली, अल्फांसो, कैसर, बंगाल टाइगर जैसी कई लोकप्रिय किस्में पहले से हैं. नई किस्मों की तैयारी तेजी से चल रही है.

खेती से दोनों भाई कर रहे लाखों की कमाई: कनिष्क कुमार गुप्ता के अनुसार किसान पारंपरिक फसलों के साथ फल-फूल के पौधे लगाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं. खेतों की मेढ़ पर भी इन पौधों को लगाया जा सकता है, जिससे अतिरिक्त आय होगी. फिलहाल कनिष्क और उनके भाई आम की खेती से सालाना 12 लाख तक कमाते हैं.

"विदेशी किस्म के आम के पौधे की शुरुआत हो चुकी है. पहले मियाजाकी और अब बनाना मैंगो ने भी फल देना शुरू कर दिया है. पारंपरिक फसल के साथ फल-फूल के पौधे लगाकर भी अच्छी कमाई कर सकते हैं. खेतों में मेढ पर भी पौधा लगाया जा सकता है."-कनिष्क कुमार गुप्ता, किसान
पूरे परिवार की मेहनत: शत्रुधन साव और वीणा देवी के पूरे परिवार ने नर्सरी को संभाला. बेटे-बेटियां पढ़ाई के साथ नर्सरी के काम में हाथ बंटाते हैं. यहां साल भर विभिन्न फलों और फूलों के पौधे उपलब्ध रहते हैं.

बिहार में विदेशी आमों का नया युग: पुष्पवाटिका नर्सरी बिहार के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है. विदेशी आमों की सफलता से साबित हो रहा है कि आधुनिक तकनीक और मेहनत से जमुई की भूमि पर भी उच्च गुणवत्ता वाले फल पैदा किए जा सकते हैं.
ये भी पढ़ें-
घर की छत पर उगाया दुनिया का सबसे महंगा आम.. 22 हजार की लगी बोली.. नाम है 'एग ऑफ द सन'
चमन और सबा के पास दुनिया का सबसे महंगा आम.. 1 किलो की कीमत में 3 नए iPhone!

