68 सिमों से की करोड़ों की ठगी: टोंक पुलिस ने पकड़े साइबर ठगी के दो मास्टरमाइंड
साइबर ठगी के लिए ठग पेट्रोल पंप और मॉल संचालकों के खातों का इस्तेमाल करते थे. इसके बदले उन्हें कमीशन दिया जाता था.

Published : May 27, 2026 at 11:07 AM IST
टोंक: पुलिस की स्पेशल टीम डीएसटी और सदर थाना पुलिस ने साइबर ठगी के मास्टरमाइंड कुलदीप मीणा और उसके साथी दिलखुश गुर्जर को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए दोनों आरोपी साइबर फ्रॉड के बड़े खेल में शामिल थे. पुलिस ने जब उनके द्वारा इस्तेमाल की गई 68 सिमों की जांच की, तो पुलिस की आंखें भी खुली की खुली रह गईं, क्योंकि इन्हीं 68 सिमों से देशभर में फ्रॉड किया जा रहा था. एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग) पोर्टल पर इस प्रकार की 6 लाख 20 हजार शिकायतें दर्ज हैं. अब पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनमें से 68 सिमों से कितना फ्रॉड किया गया. ये दोनों आरोपी फर्जी ट्रेड लिंक से करोड़ों रुपए की ठगी कर चुके हैं और ऐशो-आराम की जिंदगी जीने के आदी हैं. पुलिस ने इनसे दो लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं.
पुलिस उपाधीक्षक मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि टोंक जिला पुलिस की डीएसटी व सदर थाना पुलिस ने करोड़ों रुपए का साइबर फ्रॉड करने के मामले में दो युवकों को गिरफ्तार किया है. ये दोनों युवक फर्जी ट्रेड लिंक भेजकर लोगों से फर्जी खातों में अब तक करोड़ों रुपए ट्रांसफर करा चुके थे. इनमें लेन-देन भी फर्जी खातों के जरिए ही किया जा रहा था.
ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे थे दोनों ठग: डीएसपी मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी कुलदीप मीणा दौसा जिले के मंडावरी थाने के दौसाडा गांव का रहने वाला है, जबकि उसका दूसरा साथी दिलखुश गुर्जर सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा थाना क्षेत्र के रजमाणा गांव का रहने वाला है. कुलदीप मीणा से 60 सिमें और दिलखुश गुर्जर से 8 सिमें बरामद की गई हैं. ऐशो-आराम की लाइफस्टाइल में जी रहे दोनों ठगों से साइबर ठगी से अर्जित राशि से खरीदी गई दो गाड़ी को भी जब्त किया गया है. डीएसपी मिश्रा ने बताया कि आरोपियों द्वारा देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग व्यक्तियों के साथ साइबर फ्रॉड की कई वारदातें की गई हैं. आरोपियों के कब्जे से 4 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं. दोनों आरोपियों के विरुद्ध पुलिस थाना सदर टोंक में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है. दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ और अनुसंधान साइबर थाना द्वारा किया जा रहा है तथा साइबर ठगी से जुड़े अन्य व्यक्तियों एवं नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है. कुलदीप मीणा से जब्त की गई गाड़ी चार दिन पहले नकद भुगतान से खरीदी गई थी.

पेट्रोल पंप व मॉल संचालकों के खाते का करते थे उपयोग: जांच के दौरान यह भी तथ्य सामने आया है कि कुलदीप मीणा द्वारा ठगी की राशि को जिन खातों में ट्रांसफर करा लेन-देन किया जाता था, वे खाते या तो पेट्रोल पंप या मॉल संचालकों के हैं. साथ ही, लेन-देन की राशि का लगभग 30 प्रतिशत कमीशन इन पेट्रोल पंप व मॉल संचालकों को दिया जाता था.

