ट्विशा मौत मामला: परिवार ने जब्ती प्रक्रिया में विरोधाभास पर उठाए सवाल, कहा- सबूतों से हुई छेड़छाड़
पीड़ित पक्ष के वकील अंकुर पांडे ने कहा, दस्तावेजी विरोधाभास भोपाल पुलिस कमिश्नर और SIT प्रमुख के आधिकारिक बयान के विपरीत.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 15, 2026 at 5:04 PM IST
भोपाल: भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा की मौत मामले में पीड़ित पक्ष के वकील ने भोपाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किये है. अधिवक्ता अंकुर पांडे ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका जताई है. मामले में दो अलग-अलग जब्ती के डाक्यूमेंट्स सामने आए हैं. दस्तावेज़ों के अनुसार, सब-इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा द्वारा 13 मई 2026 को सुबह 9:42 बजे जब्त की गई महत्वपूर्ण सामग्रियों को सील नहीं किया गया था. जबकि बाद में दूसरे पुलिस अधिकारी द्वारा की गई जब्ती पूरी तरह से सीलबंद पाई गई.
एक ही मामले में अपनाई गई दो अलग-अलग जब्ती प्रक्रिया
दस्तावेज़ों के अनुसार, 13 मई 2026 को जब्त की गई सामग्री में फंदा (रस्सी), मोबाइल फोन और एक लैपटॉप शामिल थे. ये सभी मामले की जांच के अहम साक्ष्य माने जा रहे हैं. हालांकि, उपलब्ध रिकॉर्ड में इन सामग्रियों को सील किए जाने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला.
वहीं, 23 मई 2026 को एक अन्य पुलिस अधिकारी द्वारा की गई जब्ती में गिरिबाला सिंह का मोबाइल फोन और एक हेडफोन शामिल था, जिन्हें विधिवत सीलबंद किया गया था. एक ही मामले में दो अलग-अलग जब्ती प्रक्रियाओं में यह अंतर कई सवाल खड़े कर रहा है.
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आपराधिक मामले में जब्त किए गए साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उनकी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उन्हें तुरंत सील करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है. यदि महत्वपूर्ण साक्ष्य बिना सील के रखे गए हों, तो इससे चेन ऑफ़ कस्टडी पर सवाल उठ सकते हैं तथा संभावित छेड़छाड़ की आशंका पैदा हो सकती है.
पुलिस के दावों पर भी उठे सवाल
अधिवक्ता अंकुर पांडे ने कहा कि यह दस्तावेजी विरोधाभास भोपाल पुलिस कमिश्नर और विशेष जांच दल (SIT) प्रमुख के उस आधिकारिक बयान के विपरीत दिखाई देता है, जिसमें कहा गया था कि फंदा फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) द्वारा जब्त किया गया था. यदि दस्तावेज़ों में दर्ज जानकारी सही पाई जाती है, तो यह जांच प्रक्रिया और साक्ष्यों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकती है. उन्होंने कहा कि एसआई दिनेश शर्मा पर क्या 5 हज़ार का अर्थदंड लगाना काफ़ी है?
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
मामले से जुड़े पक्षों ने पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है. उनका कहना है कि जब्ती प्रक्रिया, साक्ष्यों की सुरक्षा और विभिन्न अधिकारियों के बयानों में सामने आए विरोधाभासों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे.

