AICC स्क्रीनिंग कमेटी में टीएस सिंहदेव को बड़ी जिम्मेदारी, गठबंधन से लेकर धर्मांतरण और सनातन पर दिए बयान
पूर्व उप मुख्यमंत्री सिंहदेव ने बीजेपी पर निशाना साधा. कहा कि वोट की राजनीति में धर्म का उपयोग करने से धर्म को ही नुकसान होगा.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 4, 2026 at 7:52 PM IST
रायपुर. अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (AICC) ने 5 राज्यों की स्क्रीनिंग कमेटियों की घोषणा की है. छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव को तमिलनाडु और पुडुचेरी के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इसे सिंहदेव ने न केवल अपने लिए बल्कि छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व और पहचान की बात बताया. नियुक्ति के साथ ही उन्होंने गठबंधन राजनीति, भाजपा के बयानों, धर्मांतरण कानून और सनातन पर भी बात रखी.
AICC की नई जिम्मेदारी, छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण: टीएस सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और वरिष्ठ नेताओं ने छत्तीसगढ़ को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर मौका दिया है.
यह मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से गर्व की बात है, लेकिन उससे भी ज्यादा यह छत्तीसगढ़ के लिए पहचान और सम्मान का विषय है. राष्ट्रीय राजनीति में भागीदारी निभाने का अवसर मिला है.- T.S सिंहदेव, पूर्व CM
गठबंधन को मजबूत कर जीत हासिल करना: अपनी नई भूमिका की चुनौतियों पर सिंहदेव ने कहा कि राजनीति में सबसे बड़ी चुनौती चुनाव जीतने की होती है. उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटें हैं, जहां डीएमके के साथ कांग्रेस गठबंधन में सरकार चला रही है. कांग्रेस वहां जूनियर पार्टनर है और आगे भी INDIA गठबंधन के तहत मिलकर चुनाव लड़ेंगे. लक्ष्य स्पष्ट है, गठबंधन को मजबूत रखते हुए दोबारा सरकार बनाना. पुडुचेरी को लेकर उन्होंने कहा कि वहां भी कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनने की प्रबल संभावना है.
भाजपा के बयान पर पलटवार: भाजपा नेताओं के इस बयान पर कि छत्तीसगढ़ के नेताओं को कितनी भी बड़ी जिम्मेदारी दे दी जाए, कोई लाभ नहीं मिलेगा, इस पर भी सिंहदेव ने तीखा जवाब दिया. उन्होंने कहा, जवाबदारी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं होती. संगठन समय-समय पर परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार जिम्मेदारी देता है. उन्होंने याद दिलाया कि वे पहले भी ओडिशा, झारखंड, त्रिपुरा, राजस्थान और महाराष्ट्र में पार्टी के लिए काम कर चुके हैं. यह उसी सिलसिले की एक और जिम्मेदारी है.
धर्मांतरण विवाद और हिंदू सम्मेलन पर: प्रदेश में चल रहे हिंदू सम्मेलन, युवा संवाद और धर्मांतरण कानून से जुड़े विवादों पर सिंहदेव ने कहा कि सनातन की अवधारणा को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा, सनातन का अर्थ वसुधैव कुटुंबकम है यानी पूरा विश्व एक परिवार है. सनातन का आधार सत्य है, जो अनंत है. उनका आरोप था कि आज सत्य को नकारकर यह कहा जा रहा है कि जो हम बोलेंगे वही सत्य होगा, और यही सबसे बड़ा द्वंद है.
वोट की राजनीति में धर्म का उपयोग, धर्म को ही नुकसान: सिंहदेव ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए भावनाएं भड़काने की कोशिश की जा रही है. राजनीति में कई दुश्चक्र होते हैं, लेकिन जब धर्म जैसे पवित्र मार्ग को वोट की राजनीति में लाया जाता है, तो सबसे ज्यादा नुकसान धर्म को ही होता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि धर्म सत्य के सिद्धांत पर चलता है, न कि सत्ता की सुविधा के अनुसार.
आदिवासी अंचल, सनातन और प्रकृति का सवाल: सिंहदेव ने आदिवासी क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की परंपराएं ही सनातन की जीवंत मिसाल हैं. उन्होंने बताया कि बस्तर जैसे इलाकों में लोग देवी-देवताओं की मूर्तियां विशेष पद्धति से बनाते हैं, हफ्तों-महीनों जंगल में रहकर तैयारी करते हैं और फिर पूजा-अर्चना करते हैं. यही उनकी सनातन परंपरा है.
किस सनातन की बात?: सिंहदेव ने खनन और औद्योगिक विकास के नाम पर वनों की कटाई पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, अगर जंगल, पेड़ और प्रकृति ही नहीं बचेंगे तो किस सनातन की बात करेंगे? उनका तर्क था कि पर्यावरण भी सनातन सत्य का हिस्सा है. कोयला, बॉक्साइट, आयरन निकालने के लिए जंगल काटे जा रहे हैं क्या यही सनातन है?
सत्य ही सनातन है: टीएस सिंहदेव ने कहा कि सनातन का अर्थ वह सत्य है जो कभी मिटता नहीं. वसुधैव कुटुंबकम को छोड़कर, पर्यावरण और सत्य को नकारकर सनातन की बात करना एक विरोधाभास है. उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म, राजनीति और विकास तीनों का आधार सत्य और संवेदनशीलता होना चाहिए, न कि केवल सत्ता और समावेश होना चाहिए, न कि केवल सत्ता और वोट की राजनीति.

