पाकुड़ में मनाया हूल दिवस, याद किये गये शहीद सिदो-कान्हू
पाकुड़ में हूल दिवस के मौके पर सिदो-कान्हू मुर्मू पार्क में शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई.

Published : June 30, 2026 at 3:02 PM IST
|Updated : June 30, 2026 at 6:07 PM IST
पाकुड़/बोकारो/जामताड़ा: जिला मुख्यालय सहित प्रखंड मुख्यालयों एवं ग्रामीण इलाकों में हूल दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है. जिला मुख्यालय के सिदो-कान्हू मुर्मू पार्क में शहीद सिदो-कान्हू, चांद- भैरव की प्रतिमा पर प्रशासनिक अधिकारियों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों, सामाजिक एवं छात्र संगठनों ने माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.
शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया
ग्राम प्रधानों ने शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव की पूजा अर्चना पारंपरिक रीति रिवाज से की. हूल दिवस के अवसर पर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने झांकी निकाली. झारखंड मुक्ति मोर्चा के सैकड़ों कार्यकर्ता रैली की शक्ल में पार्क पहुंचे और प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. वहीं उप विकास आयुक्त अरविंद लाल, पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह, नगर परिषद अध्यक्ष सबरी पाल के अलावा भाजपा, कांग्रेस, आजसू, जदयू तथा राजद के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी सिदो- कान्हू और चांद-भैरव की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.

हूल दिवस के अवसर पर लिट्टीपाड़ा के डुमरिया में पूर्व विधायक दिनेश विलियम मरांडी, विधायक हेमलाल मुर्मू ने अपने समर्थकों के साथ शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.

आज भी लोग सिदो-कान्हू, चांद-भैरव को याद करते हैं
स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई 1855 में अंग्रेज सैनिकों के साथ पाकुड़ के धनुष पूजा में हुई थी, जहां एक रात में ही अंग्रेजो ने मार्टिलो टावर का निर्माण कराया था और स्वतंत्रता संग्राम में शामिल सिदो-कान्हू, चांद- भैरव सहित हजारों लोगों पर इसी मार्टिलो टावर से गोलिया बरसायी थीं लेकिन सिदो-कान्हू, चांद- भैरव सहित आंदोलन में शामिल लोगों ने तीर धनुष से अंग्रेज सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए थे और अंग्रेज सैनिकों को वहां से भागना पड़ा था. पाकुड़ जिला मुख्यालय के धनुष पूजा में सिदो-कान्हू मुर्मू के नाम से पार्क बनाया गया है और यहीं पर स्थित मार्टिलो टावर को देख कर लोग याद ताजा करते हैं.
बोकारो
बोकारो में भी हूल दिवस पर शहीदों को याद किया गया. चास के आईटीआई मोड़ स्थित सिदो-कान्हू की आदम प्रतिमा पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष रतनलाल मांझी समेत सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया. इस दौरान सभी ने सिदो-कान्हू, फूलो-झानो मुर्मू की वीरता को याद किया. उन्होंने कहा कि उन शहीदों के बताए संदेश को हमें गांव-गांव तक पहुंचाने का काम करना चाहिए.
20 हजार से ज्यादा आदिवासी मारे गए
पहले जन-विद्रोह 1857 की क्रांति से 2 साल पहले ही संथाल आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेड़ दी थी. ये भारत का पहला संगठित विद्रोह माना जाता है. इस विद्रोह के बाद जनता में एक प्रकार का उबाल आया और सभी मोर्चे पर छोटे-छोटे टुकड़ों में विरोध शुरू हो गया. अंग्रेज, जमींदार और महाजन मिलकर आदिवासियों की जमीन हड़प रहे थे. लगान वसूली में जुल्म, सूदखोरी, औरतों पर अत्याचार हो रहा था. इसी के खिलाफ सिदो-कान्हू ने विद्रोह का बिगुल फूंका.

जामताड़ा
हूल दिवस जामताड़ा में धूमधाम के साथ मनाया गया. इस मौके पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने गाजे बाजे के साथ जुलूस निकाला और सिदो कान्हू चौक पर जाकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.

इस मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया. इसमें आदिवासी संस्कृति कला से संबंधित कलाकारों ने अपना प्रदर्शन किया. हूल दिवस पर झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी सिदो कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण की.
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