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AMU में मशहूर शायर बशीर बद्र को दी गई श्रद्धांजलि, कुलपति बोलीं- एक अनमोल रत्न खो दिया

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बशीर बद्र को एक ऐसी हस्ती बताया, जिन्होंने उर्दू शायरी को सरलता, संवेदना और आम जीवन की भाषा को नई पहचान दी.

AMU में बशीर बद्र को दी गई श्रद्धांजलि.
AMU में बशीर बद्र को दी गई श्रद्धांजलि. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 30, 2026 at 8:39 PM IST

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अलीगढ़ : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने प्रख्यात उर्दू शायर डॉ. बशीर बद्र के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. डॉ. बशीर बद्र का 28 मई 2026 को भोपाल में लंबी बीमारी के बाद 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया था. विश्वविद्यालय प्रशासन ने बशीर बद्र को एक ऐसी हस्ती बताया, जिन्होंने उर्दू शायरी को सरलता, संवेदना और आम जीवन की भाषा से जोड़कर नई पहचान दी. बशीर बद्र का एएमयू से रिश्ता केवल एक छात्र का नहीं, बल्कि एक ऐसे रचनाकार का था जिसने इसी परिसर से अपनी साहित्यिक यात्रा को ऊंचाई दी.

कुलपति प्रो. नाइमा खातून ने कहा कि एएमयू ने एक अनमोल रत्न खो दिया है, जिसकी शायरी ने न केवल विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती दी. उन्होंने कहा कि उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी.

कार्यवाहक कुलपति प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान ने कहा कि बशीर बद्र की शायरी में मानवीय भावनाओं की सादगी और गहराई दोनों मौजूद हैं. उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. कमरुल हुदा फरीदी ने इसे उर्दू साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया और कहा कि उनका साहित्य हमेशा शोध और अध्ययन का विषय बना रहेगा. डॉ. बशीर बद्र को पद्मश्री और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

उनकी प्रमुख कृतियों में आस, आहट, आमद और ‘कुल्लियात-ए-बशीर बद्र’ शामिल हैं. लंबे समय तक बीमारी से जूझने के बावजूद उनकी शायरी लोगों के दिलों में जीवित रही. उनके निधन के साथ उर्दू साहित्य के एक युग का अंत माना जा रहा है, लेकिन उनके शब्द और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा बने रहेंगे. एएमयू बिरादरी और साहित्य जगत ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है.

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