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महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने कांग्रेस में वापसी का ऐलान किया, बोले- भाजपा मुझे रास नहीं आई

चार बार विधायक व एक बार सांसद महेंद्रजीत सिंह मालवीय कांग्रेस में लौट रहे हैं. मालवीय सुखजिंदर सिंह रंधावा और गोविंद डोटासरा से मिले.

महेंद्रजीत सिंह मालवीय
महेंद्रजीत सिंह मालवीय (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 11, 2026 at 2:40 PM IST

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जयपुर: राजस्थान की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है. लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए दिग्गज आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय फिर से कांग्रेस में लौट रहे हैं. मालवीय ने ईटीवी भारत से बातचीत में खुद इसकी पुष्टि की और कहा कि उनका मन हमेशा कांग्रेस में ही था. बांसवाड़ा-डूंगरपुर के वागड़ क्षेत्र के कद्दावर नेता मालवीय ने कांस्टीट्यूशन क्लब में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से बैठक की. इस दौरान उनके साथ कांग्रेस विधायक अर्जुन बामनिया व रमिला खड़िया भी मौजूद रहीं.

भाजपा में छोटा कद, कांग्रेस में लंबा सफर: महेंद्रजीत सिंह मालवीय राजस्थान के आदिवासी समाज के प्रमुख चेहरे हैं. वे बागीदौरा विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके हैं और 1998 में बांसवाड़ा से सांसद भी चुने गए. पूर्व अशोक गहलोत सरकार में जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने वागड़ क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया. 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बागीदौरा से भारी मतों से जीत हासिल की, लेकिन लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष का पद न मिलने से नाराज होकर भाजपा में शामिल हो गए. भाजपा ने उन्हें बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट से टिकट दिया, लेकिन वे भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के राजकुमार रोत से करीब ढाई लाख वोटों से हार गए. विधायकी भी उपचुनाव में खो दी. मालवीय ने कहा, "भाजपा का डबल इंजन का नारा सुनकर गया था, लेकिन विकास कार्य अटक गए. भाजपा मुझे रास नहीं आई."

महेंद्रजीत सिंह मालवीय से खास बातचीत (ETV Bharat Jaipur)

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कांग्रेस नेताओं से सकारात्मक बैठक: रविवार की बैठक में मालवीय ने प्रदेश नेतृत्व को बताया कि उनके क्षेत्र के कार्यकर्ता व जनता कांग्रेस को ही स्वीकार करती है. मालवीय ने कहा, "हम भाजपा में तो गए थे, लेकिन मन कांग्रेस में ही रहा. हम कांग्रेसी थे, हैं और रहेंगे." मालवीय ने जोर देकर कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी व माइनॉरिटी वर्गों को कांग्रेस ही सही मायने में प्रतिनिधित्व देती है. उन्होंने हरदेव जोशी व मोहनलाल सुखाड़िया जैसे नेताओं का उदाहरण दिया जो उनके क्षेत्र से मुख्यमंत्री बने. डोटासरा ने स्वागत करते हुए कहा कि मालवीय का अनुभव कांग्रेस को मजबूत करेगा, खासकर आदिवासी बेल्ट में.

मनरेगा बचाओ अभियान में बिगुल फूंकेंगे: कांग्रेस में वापसी के साथ ही मालवीय ने तीन राज्यों- राजस्थान, गुजरात व मध्य प्रदेश- के आदिवासियों का बड़ा सम्मेलन आयोजित करने का ऐलान किया. इसका मुख्य मुद्दा मोदी सरकार की मनरेगा नीति पर होगा. ईटीवी से खास बातचीत में मालवीय ने कहा, "जिला प्रमुख रहते 3 लाख मजदूर काम करते थे. पंचायत राज मंत्री के समय 56 लाख थे, अब दयनीय स्थिति है. बांसवाड़ा में रोज 3 करोड़ रुपये मजदूरों के हाथ जाते थे, अब दो-दो साल से भुगतान नहीं हुआ." वे इस महीने ही बड़ी रैलियां करेंगे. कांग्रेस का 10 जनवरी से शुरू हुए 'मनरेगा बचाओ संग्राम' में मालवीय की भूमिका अहम होगी. पार्टी का कहना है कि 'जी राम जी' कानून ने मनरेगा को कमजोर कर दिया है. फंड सीमित, पंचायतों का अधिकार खत्म, मजदूरी अनिश्चित.

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बीएपी पर तीखा प्रहार: मालवीय ने बीएपी को "बुलबुला" बताया जो कभी सत्ता में नहीं आ सकती. कहा, "विकास सत्ता में होने वाला ही कर सकता है. गरीब इलाके को सरकार की जरूरत है, बीएपी से लोग दुखी हैं." उन्होंने कहा कि अन्य भाजपा में गए नेताओं की वापसी उनकी इच्छा पर निर्भर, लेकिन वे तो कांग्रेस में ही रहेंगे. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मालवीय की वापसी से कांग्रेस का आदिवासी वोटबैंक मजबूत होगा, खासकर आगामी उपचुनाव व स्थानीय निकाय चुनावों में.

राजनीतिक निहितार्थ: यह वापसी भाजपा के लिए झटका है. 2024 में मालवीय को टिकट देकर पार्टी ने आदिवासी वोट साधने की कोशिश की थी, लेकिन हार के बाद उनका असंतोष बढ़ा. कांग्रेस इसे अपनी रणनीति की जीत बता रही है. मालवीय ने कहा, "मैं दो-तीन लाख की रैलियां कर चुका हूं. यह धमाका बड़ा होगा." आलाकमान से औपचारिक बातचीत के बाद वे पूर्ण रूप से सक्रिय होंगे. वागड़ क्षेत्र में कांग्रेस की कमजोरी दूर हो सकती है, जहां बीएपी व भाजपा का दबदबा है.

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