हरियाली का नया मॉडल : प्रदेश में 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य, 'नमो वन' और 'श्री राम वाटिका' से संवरेगा हरित क्षेत्र
अभियान के दौरान वन विभाग का जोर फलदार और छायादार पौधे लगाने पर ज्यादा रहेगा. नर्सरी में पौध तैयार की जा रही है.

Published : May 12, 2026 at 9:32 AM IST
भरतपुर: राजस्थान में हरित क्षेत्र बढ़ाने और बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान को गति देने के लिए वन विभाग ने श्री राम वाटिका, नमो वन और नमो नर्सरी जैसी योजनाओं पर काम तेज कर दिया है. प्रदेश में 10 करोड़ पौधरोपण अभियान को धरातल पर उतारने के लिए अन्य जिलों के साथ भरतपुर और डीग जिलों में हरियाली का बड़ा नेटवर्क तैयार किया जा रहा है. पंचायत स्तर पर नमो वन, जिला मुख्यालयों पर उन्नत नमो नर्सरी और प्रत्येक जिले में दो-दो श्री राम वाटिका विकसित करने की तैयारी शुरू हो चुकी है. सघन वृक्षारोपण, फेंसिंग और सुरक्षा व्यवस्था के साथ विकसित होने वाले इन प्रोजेक्ट्स में फलदार एवं छायादार पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी. विभाग का दावा है कि इन योजनाओं से न केवल ग्रीन कवर बढ़ेगा, बल्कि पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक हरियाली का स्थायी मॉडल तैयार होगा.
विभाग के सहायक वन संरक्षक सुरेश चौधरी ने बताया कि नमो वन योजना के तहत पंचायत समिति स्तर पर चरणबद्ध तरीके से हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे. प्रत्येक नमो वन के लिए 50 हेक्टेयर भूमि और 1 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इन क्षेत्रों में सघन वृक्षारोपण के साथ चारों ओर फेंसिंग, प्रवेश द्वार और सुरक्षा प्रबंधन किया जाएगा, ताकि पौधों को नुकसान न पहुंचे और उनका व्यवस्थित विकास हो सके.
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जिला मुख्यालयों पर बनेंगी हाईटेक नमो नर्सरियां: उन्होंने बताया कि विभाग अब जिला मुख्यालयों पर उन्नत नमो नर्सरी भी स्थापित करेगा. प्रत्येक नर्सरी के लिए 2 हेक्टेयर भूमि और 50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है. इन नर्सरियों में बड़े पैमाने पर पौधे तैयार किए जाएंगे, जिन्हें नमो वन, राम वाटिका और आमजन को वितरित किया जाएगा. एसीएफ ने बताया कि बजट 2026-27 में राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले में दो-दो श्री राम वाटिका विकसित करने की घोषणा की है. प्रत्येक वाटिका के लिए 50 हेक्टेयर भूमि का मानक तय किया गया है और 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है. इन वाटिकाओं को विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा, ताकि संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके. भरतपुर जिले में दो श्री राम वाटिकाएं विकसित की जाएंगी, जबकि डीग जिले में भी दो राम वाटिकाओं की तैयारी शुरू हो चुकी है. विभाग का लक्ष्य इन्हें धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व वाले हरित केंद्र के रूप में विकसित करना है.

पंचगौरव योजना में कदंब: वन विभाग की पंचगौरव योजना के तहत भरतपुर और डीग जिलों में विशेष प्रजातियों के पौधे तैयार किए जा रहे हैं. भरतपुर जिले में 60 हजार कदंब के पौधे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि डीग जिले में 1 लाख अर्जुन के पौधे विकसित किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि 15 जून के आसपास मानसून प्रारंभ होते ही पौध वितरण अभियान शुरू कर दिया जाएगा. सरकार ने पौधों की ऊंचाई और श्रेणी के आधार पर दरें निर्धारित की हैं.
- कांटेदार पौधे – 5 रुपए
- दो फीट तक के छायादार पौधे – 6 रुपए
- बड़े पौधे – 75 रुपए तक
एसीएफ सुरेश चौधरी ने बताया कि भरतपुर और डीग जिलों में वर्तमान में 12 से 13 नर्सरियां संचालित हैं. विभाग को इस वर्ष लगभग 16 लाख 90 हजार पौधे तैयार करने का लक्ष्य मिला है, जिसके अनुरूप पौध तैयार करने का कार्य तीव्रता से चल रहा है.

फलदार एवं छायादार पौधों को प्राथमिकता: उन्होंने बताया कि विभाग फलदार और छायादार पौधों पर विशेष ध्यान दे रहा है. आंवला, जामुन, अमरूद और नींबू जैसे फलदार पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जबकि कदंब, नीम और पीपल जैसे छायादार पौधे भी बड़े स्तर पर विकसित किए जा रहे हैं.

