लखनऊ में ज़ब्त वाहनों को मिलेगा स्थायी ठिकाना, अहिमामऊ में परिवहन विभाग को ज़ल्द मिलेगा अपना पहला डिटेंशन यार्ड
लखनऊ में ज़ब्त वाहनों के लिए परिवहन विभाग के अहियामऊ में 136 हल्के और 15 भारी वाहनों को रखा जा सकता है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 2, 2026 at 9:34 AM IST
लखनऊ: परिवहन विभाग के प्रवर्तन दस्तों की तरफ से चलाए जाने वाले चेकिंग अभियान के दौरान जिन वाहनों को बंद करने की नौबत आती थी, और थानों में उनके खड़े करने की जगह नहीं मिलती थी. यही वज़ह है कि कई बार वाहनों को चालान करके ही छोड़ना पड़ता था, लेकिन अब इससे मुक्ति मिलने वाली है. जो वाहन सीज़ करने लायक होंगे, उन्हें सीज़ किया जाएगा और डिटेंशन यार्ड में खड़ा किया जाएगा. अब परिवहन विभाग को थानों के चक्कर लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.
राजधानी लखनऊ में ज़ब्त वाहनों को रखने की वर्षों पुरानी समस्या का अब ज़ल्द समाधान हो जाएगा. परिवहन विभाग के लिए अहिमामऊ में तैयार किया गया डिटेंशन/डम्पिंग यार्ड निर्माण का काम पूरा हो चुका है. अब तकनीकी समिति के निरीक्षण के बाद इसे परिवहन विभाग को हस्तांतरित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है. 2.55 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस यार्ड में एक साथ 136 हल्के वाहन, 15 भारी वाहन और 86 दोपहिया वाहन, यानी कुल 237 वाहन खड़े किए जा सकेंगे.

अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर ने बताया कि यह व्यवस्था लखनऊ में परिवहन विभाग और प्रवर्तन टीमों की कार्रवाई के बाद जब्त या निरुद्ध होने वाले वाहनों को व्यवस्थित तरीके से रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. अभी पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार कार्रवाई के बाद वाहनों को थानों और उपलब्ध खुले स्थानों में खड़ा करना पड़ता है. इससे थानों में जगह की समस्या के साथ-साथ सड़क किनारे या अन्य खुले स्थानों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है.
परिवहन आयुक्त उत्तर के निर्देश पर लखनऊ में डिटेंशन यार्ड के लिए ज़मीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी. इसके बाद नगर आयुक्त लखनऊ से जमीन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया. नगर निगम की ओर से अहिमामऊ में 0.780 हेक्टेयर यानी 83,958 स्क्वॉयर फीट भूमि निरुद्ध वाहनों की पार्किंग के लिए अस्थायी रूप से उपलब्ध कराई गई है.
2.55 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ यार्ड
परिवहन आयुक्त के निर्देश पर मुख्य भवन, गार्ड रूम और बाउंड्री वॉल आदि के निर्माण के लिए 2.55 करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत किए गए. 21 अगस्त को संबंधित कार्यदायी संस्था ने बताया कि डिटेंशन यार्ड/डम्पिंग यार्ड से संबंधित सभी निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं. अब कार्य पूरा होने के बाद इसे परिवहन विभाग को हस्तांतरित किया जाना है. हस्तांतरण से पहले तकनीकी समिति यार्ड का निरीक्षण करेगी.
इस समिति में लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, सिंचाई विभाग के अभियंताओं को शामिल किया गया है. समिति स्थल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके बाद हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

अब तक 5628 वाहनों का चालान, 491 सीज़
आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2026-27 में लखनऊ के प्रवर्तन दलों ने कुल 5,628 वाहनों का चालान किया है, जबकि 491 वाहनों को बंद किया गया. हालांकि वर्तमान में प्रवर्तन अधिकारियों के पास वाहनों को बंद करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है.
कई बार थानों में भी जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण वाहनों को बंद नहीं किया जा पाता और चालान करके वाहन छोड़ना पड़ता है. नए डम्पिंग यार्ड के संचालन के बाद काफी हद तक दिक्कत दूर हो जाएगी. निर्धारित यार्ड उपलब्ध होने से कार्रवाई के बाद वाहनों को आसानी से बंद किया जा सकेगा.
पी-4 पार्किंग और कल्ली यार्ड से भी होगी व्यवस्था बेहतर
फिलहाल पी-4 पार्किंग और कल्ली यार्ड पीजीआई में वाहन खड़े किए जाते हैं. नए अहिमामऊ डम्पिंग यार्ड के उपलब्ध होने से इन स्थानों पर खड़े वाहनों को भी आवश्यकता के अनुसार नए यार्ड में शिफ्ट किया जा सकेगा. इससे अलग-अलग स्थानों पर ज़ब्त वाहनों के बिखरे रहने की समस्या कम होगी और वाहनों के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था विकसित होगी.
नया डिटेंशन यार्ड सिर्फ परिवहन विभाग के लिए पार्किंग सुविधा नहीं है, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. ज़ब्त वाहन लंबे समय तक थानों के आस-पास खड़े रहने से परिसरों में जगह घिरती है. कई स्थानों पर ऐसे वाहनों की वजह से अव्यवस्था भी पैदा होती है.
अहिमामऊ यार्ड के संचालन के बाद कार्रवाई के बाद वाहनों को निर्धारित परिसर में भेजना संभव होगा. इससे थानों पर दबाव कम होगा, खुले स्थानों में वाहनों के जमावड़े में कमी आएगी और सड़क किनारे वाहनों के खड़े रहने से होने वाली यातायात संबंधी परेशानी कम होगी.

