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हिमाचल में बदला खेती का ट्रेंड, अब ये फसलें किसानों को बना रही मालामाल, देश के बड़े शहरों में भारी डिमांड

हिमाचल में किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नकदी फसलों को अपना रहे हैं.

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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : November 10, 2025 at 2:24 PM IST

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Updated : November 10, 2025 at 2:31 PM IST

9 Min Read
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शिमला: हिमाचल प्रदेश में अब खेती का ट्रेंड बदल रहा है. प्रदेश में कभी किसान पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, मक्का और धान तक ही सीमित थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से अब जरूरत और समय की मांग के अनुसार किसानों का नकदी फसलों की ओर रुझान बढ़ा है. इसका खुलासा कृषि विभाग ओर से रबी सीजन में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जारी की गई एग्रीकल्चर प्रोडक्शन प्रोग्राम की रिपोर्ट में भी हुआ है.

सब्जियों की बढ़ी पैदावार

एग्रीकल्चर प्रोडक्शन प्रोग्राम की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 की तुलना में गेहूं सहित जौ का एरिया कम हुआ है. वहीं, कमर्शियल क्रॉप जैसे आलू सहित सब्जियों का एरिया बढ़ा है. ऐसे में विभिन्न किस्मों की सब्जियों की पैदावार बढ़ने से न सिर्फ किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ी है, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नया आयाम मिला है.

हिमाचल में नकदी फसलों की ओर क्यों बढ़ रहा किसानों का रूझान? (ETV Bharat)

बड़े शहरों में हिमाचली सब्जियों की मांग

हिमाचल की उच्च गुणवत्ता और स्वाद से भरपूर इन सब्जियों की देश के बड़े शहरों जबरदस्त मांग है. जिससे पहाड़ों के अन्नदाता अब सब्जियों की खेती से अपनी किस्मत को बदल रहे हैं. आधुनिक तकनीक और बाजार की बढ़ती मांग ने उन्हें नई पहचान दी है. बाहरी राज्यों में इन सब्जियों की बढ़ती मांग के चलते छोटे पहाड़ी राज्य में किसान मालामाल हो रहे हैं. ऐसे में कभी घाटे का सौदा मानी जाने वाली खेती अब किसानों के लिए मुनाफे का जरिया बन रही है.

Himachal Farmers growing cash crops
हिमाचल में सब्जियों के एरिया और उत्पादन लक्ष्य में बढ़ोतरी (ETV Bharat GFX)

चार सालों में एरिया और पैदावार का लक्ष्य

हिमाचल में मंडियों के निर्माण और मार्केट तक परिवहन की सुविधा से सब्जियों की पैदावार से किसानों को अच्छी खासी कमाई हो रही है. साल भर में कई फसलें लेने से कम लैंड होल्डिंग वाले किसान भी सब्जियों से पैसा कमा रहे हैं. ऐसे में पिछले चार सालों में राज्य में कमर्शियल क्रॉप के एरिया सहित पैदावार का लक्ष्य भी बढ़ा है.

  • कृषि विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 में इस बार रबी सीजन में वेजिटेबल की बिजाई के लिए एरिया को बढ़ाकर 37,450 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है. वहीं, चालू वित्त वर्ष में कृषि विभाग ने सब्जियों के उत्पादन का टारगेट 7,86,450 मीट्रिक टन निर्धारित किया है.
  • वित्त वर्ष 2021-22 में रबी सीजन के लिए कृषि विभाग में 27 हजार हेक्टेयर एरिया में 5,95,000 मीट्रिक टन सब्जियों की पैदावार का टारगेट तय किया था.
  • चालू वित्त वर्ष (2025-26) के रबी सीजन में 4 हजार हेक्टेयर में आलू की बिजाई के लिए टारगेट तय किया गया है. जिसके लिए इस बार 52,000 मीट्रिक टन आलू की पैदावार लेने का अनुमान लगाया गया है.
  • वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 में रबी सीजन के लिए कृषि विभाग ने आलू की बिजाई के लिए 2800 हेक्टेयर एरिया में 35,000 मीट्रिक टन आलू की पैदावार का लक्ष्य निर्धारित किया था.
Himachal Farmers growing cash crops
हिमाचल में गेहूं-जौ के एरिया और उत्पादन लक्ष्य में कमी (ETV Bharat GFX)

चार सालों में इतना हेक्टेयर कम हुआ गेहूं और जौ का एरिया

हिमाचल प्रदेश में किसानों का नकदी फसलों की और बढ़ता ट्रेंड बताता है कि पिछले चार सालों में रबी सीजन में गेहूं और जौ की बिजाई का एरिया कम हुआ है. कृषि विभाग ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 रबी सीजन में 3,22,000 हेक्टेयर एरिया में गेहूं की बिजाई का लक्ष्य तय किया गया है. वहीं गेहूं की पैदावार के लिए 6,50,000 मीट्रिक टन का टारगेट तय किया गया है. इसी तरह से वित्त वर्ष 2021-22 के रबी सीजन में 3,40,000 हेक्टेयर एरिया में गेहूं की बिजाई से 6,72,000 मीट्रिक तक पैदावार का लक्ष्य रखा गया था. इसी तरह से चालू वित्त वर्ष के रबी सीजन में 18,000 हेक्टेयर एरिया में जौ की बिजाई कर 30,000 मीट्रिक टन पैदावार लेने का टारगेट तय किया गया है. वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 में 19,500 हेक्टेयर एरिया में जौ की बिजाई कर 35,500 मीट्रिक टन पैदावार लिए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था.

खाद्यान्न, दालें और कमर्शियल क्रॉप की बिजाई का लक्ष्य

कृषि विभाग में चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए खाद्यान्न, दालें और कमर्शियल क्रॉप की बिजाई के लिए टारगेट निर्धारित कर दिया है.

  1. रबी सीजन में खाद्यान्न में 3,22,000 हेक्टेयर एरिया गेहूं की बिजाई का लक्ष्य तय किया है.
  2. जौ की बिजाई 18,000 हेक्टेयर में किए जाने का टारगेट रखा गया है.
  3. दालों में चना 270 हेक्टेयर, लेंटिल (दालें) 710 हेक्टेयर व 12,290 हेक्टेयर एरिया में मटर की बिजाई का लक्ष्य तय किया गया है.
  4. कमर्शियल क्रॉप में आलू 4,000 हेक्टेयर और 37,450 हेक्टेयर पर वेजिटेबल की बिजाई का लक्ष्य रखा गया.
Himachal Farmers growing cash crops
हिमाचल से बाहरी राज्यों को सब्जियों की सप्लाई (ETV Bharat GFX)

बाहरी राज्यों को भेजी 3.53 लाख क्विंटल सब्जियां

हिमाचल में किसानों को अच्छी कमाई होने से सब्जियों की पैदावार बढ़ रही है. पिछले वित्त वर्ष में अकेले ढली सब्जी मंडी से विभिन्न प्रकार की 3,53,213 क्विंटल सब्जियां पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, कोलकाता, यूपी सहित अन्य बड़े राज्यों को भेजी गई. ऐसे में हिमाचल की सब्जियों की बाहरी राज्यों में ज्यादा मांग होने से किसानों के चेहरों पर रौनक लौटी है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है. कृषि उपज मंडी समिति शिमला एवं किन्नौर के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 के मुताबिक ढली सब्जी मंडी से हरी मटर 1,19275 क्विंटल, फ्रेंच बीन्स 78,907 क्विंटल, फूलगोभी 82,956 क्विंटल, पत्ता गोभी 49,429 क्विंटल, शिमला मिर्च 19,384, आलू 2652 क्विंटल और 613 क्विंटल खीरा बाहरी राज्यों को भेजा गया.

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सब्जी मंडी ढली में अब तक पहुंची 3.05 लाख क्विंटल सब्जी (ETV Bharat)

इस बार 3.05 लाख सब्जियों का आगमन

राजधानी शिमला में स्थिति ढली सब्जी मंडी इस बार भी हरियाली से लबालब नजर आ रही है. वित्त वर्ष के इस सीजन अब तक ढली सब्जी मंडी में 3,05,507 क्विंटल सब्जियों की आगमन दर्ज किया जा चुका है. किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं. वहीं, बाहरी राज्यों में भी उपभोक्ताओं को ताजी सब्जियों की भरपूर आपूर्ति हो रही है. कृषि उपज मंडी समिति शिमला एवं किन्नौर के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2025-26 में ढली सब्जी मंडी में हरी मटर 1,19,551 क्विंटल, फ्रेंच बीन्स 51,792 क्विंटल, फूल गोभी 78,871 क्विंटल, पत्ता गोभी 40,400 क्विंटल, शिमला मिर्च 10,624 क्विंटल, आलू 4008 क्विंटल और 261 क्विंटल खीरा का आगमन हुआ है.

सब्जी मंडी ढली में अब तक सब्जियों का आगमन

(वित्त वर्ष 2025-26)

सब्जियांमात्रा (क्विंटल में)
हरी मटर1,19,551
फ्रेंच बीन्स51,792
फूल गोभी78,871
पत्ता गोभी40,400
शिमला मिर्च10,624
आलू4008
खीरा261
कुल3,05,507
Source- कृषि उपज मंडी समिति शिमला एवं किन्नौर

अकेले ढली सब्जी मंडी में 1500-2000 करोड़ का कारोबार

"मैं पिछले 20 से 25 सालों से ढली सब्जी मंडी में मां हटेश्वरी ट्रेडिंग कंपनी के नाम से काम कर रहा हूं. जब मैं वर्ष 2000 के आसपास इस मंडी में आया था तो उस समय एक लाख क्विंटल के आसपास ही सब्जियां ढली सब्जी मंडी में आती थी. यह कारोबार बढ़कर अब साढ़े तीन क्विंटल सब्जियों तक पहुंच गया है. सब्जियों का कारोबार बहुत बड़ा है. अकेले ढली सब्जी मंडी में ही साल भर में 1500 से 2000 करोड़ का कारोबार होता है." - नरेंद्र ठाकुर, आढ़ती, ढली सब्जी मंडी

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कृषि विभाग ने नकदी फसलों के निर्धारित किया एरिया और उत्पादन लक्ष्य (ETV Bharat)

सब्जियों ने भरी किसानों की जेब

हिमाचल में किसान पारंपरिक फसलों से हटकर अब सब्जियों की अधिक पैदावार लेने लगे हैं. इसको लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि जैसे किसान गेहूं उगाते हैं, तो उसके लिए न तो रेट मिलते हैं और न ही मार्केट उपलब्ध है. वहीं, किसान साल में सब्जियों की 3 से 4 फसलें लेता है. उन्होंने कहा कि वेजिटेबल कैश क्रॉप है. आजकल मटर का भाव 100 से 130 रुपए प्रति किलो है. जो किसान 3 से 4 बोरी लेकर आता है, वह 60 हजार से 1 लाख रुपए लेकर जा रहा है. जिससे उसे काफी फायदा हो रहा है. वहीं, मक्की की तरफ तो किसानों का रुझान ही बहुत कम हो गया है, क्योंकि इसकी पैदावार भी कम हुई है. मार्केट की भी सुविधा नहीं है और मक्की बिकती भी कम है. उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में गेहूं और मक्की की फसल अधिक कामयाब है. वहीं, यहां वेजिटेबल और हॉर्टिकल्चर का ही ज्यादा काम है.

बड़े शहरों में थाली का जायका बढ़ाती है ये सब्जियां

"अभी गर्मियों का सीजन आना है. इसके लिए दिसंबर में मटर, फ्रेंच बीन्स और फूल गोभी की बिजाई शुरू हो जाएगी. इन सब्जियों की डिमांड देश भर में रहती है. हिमाचल में रासायनिक दवाओं का कम छिड़काव किया जाता है, इसलिए इन सब्जियों का स्वाद भी अलग है." - नरेंद्र ठाकुर, आढ़ती, ढली सब्जी मंडी

किन राज्यों में होती है सब्जियों की सप्लाई?

आढ़ती नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि आने वाले गर्मियों के सीजन में हिमाचल से हरी मटर की सप्लाई कोलकाता, मद्रास, गुजरात, महाराष्ट्र, यूपी पंजाब सहित देशभर में जाएगी. जिसका किसानों को बहुत ज्यादा फायदा होगा. उन्होंने बताया कि सरकार और मंडियां भी बना रही है और किसानों को सुविधा भी दे रही है. दिल्ली में भी सब्जी मंडी का विस्तार हो रहा है. जब यह काम पूरा होगा तो यहां और ज्यादा कारोबार बढ़ेगा. जिससे किसानों की आर्थिकी और ज्यादा मजबूत होगी.

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Last Updated : November 10, 2025 at 2:31 PM IST