पीढ़ियों से जैविक खेती की परंपरा, प्रगतिशील किसान की छत्तीसगढ़ समेत दूसरे राज्यों में भी चर्चा
महासमुंद के किसान अंतर्यामी प्रधान अपनी 65 एकड़ जमीन पर पूरी तरह जैविक खेती कर रहे हैं.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : April 25, 2026 at 5:45 PM IST
महासमुंद: आज जहां खेती में रसायनों और बढ़ती लागत ने किसानों की कमर तोड़ दी है, वहीं महासमुंद के बसना के छोटे से गांव मिलाराबाद के एक किसान अंतर्यामी प्रधान ने नई मिसाल पेश की है. वह अपनी 65 एकड़ जमीन पर पूरी तरह जैविक खेती कर रहे हैं.
किसान कहते हैं कि 27 एकड़ जमीन पर आज तक कभी एक दाना यूरिया या DAP नहीं डाला गया. पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गाय के गोबर से खाद और गौमूत्र से दवाई बनाकर उपयोग करते हैं.
पूर्वजों की परंपरा रखी कायम
1970 के बाद हमारे देश में रासायनिक खाद का चलन बढ़ गया. लेकिन मेरे पूर्वजों ने 27 एकड़ खेत में रासायनिक खाद का कोई इस्तेमाल नहीं किया. मेरे पिताजी ने कहा कि मैं 27 एकड़ के इस प्लॉट में रासायनिक खाद नहीं डालने दूंगा, इसलिए उस 27 एकड़ के खेत में एक भी रासायनिक खाद नहीं डाली गई-अंतर्यामी प्रधान, किसान

65 एकड़ में जैविक खेती
अंतर्यामी प्रधान बताते हैं कि हमने सोचा कि जैविक खेती ज्यादा से ज्यादा की जाए. 27 एकड़ के बाद 40 एकड़ में जैविक खेती करने लगे. अब हम 65 एकड़ में जैविक खेती कर रहे हैं.

जैविक खेती से कम खर्च में ज्यादा उत्पादन
किसान का कहना है कि रासायनिक खेती में प्रति एकड़ 20-25 हजार रुपये खर्च होते हैं. वहीं जैविक तरीके से यह खर्च मात्र 5 से 7 हजार रह गया है. जैविक विधि से उन्हें प्रति एकड़ 18 से 22 क्विंटल की उपज मिल रही है, जो रासायनिक खेती के बराबर है.

60 गौवंश से जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशक
किसान बताते हैं कि उनकी इस सफलता की रीढ़ हैं, उनके 60 गौवंश. सालाना 250-270 ट्रॉली जैविक खाद तैयार होती है. गौमूत्र, नीम, धतूरा और सीताफल की पत्तियों से वे ब्रह्मास्त्र नाम का प्राकृतिक कीटनाशक बनाते हैं, जिससे फसलें पूरी तरह रोगमुक्त रहती हैं.

हमारी चार पीढ़ी हो गई है, हम गौपालन कर रहे हैं. गौपालन ही जैविक खेती का आधार है. हम गौपालन के साथ ही मुर्गा, बत्तख पालन करते हैं. भेड़ बकरी भी पाले हैं-अंतर्यामी प्रधान, किसान
जैविक उत्पादों को दिया दादी के नाम का ब्रांड
किसान काला नमक, चिन्नौर, काली मूंछ और दुबराज जैसी दुर्लभ सुगंधित धान की किस्मों का संरक्षण कर रहे हैं. उन्होंने अपने उत्पादों को अपनी दादी की याद में श्रीमोती ब्रांड का नाम दिया है.
अंतर्यामी की मेहनत का फल सिर्फ अनाज नहीं, बल्कि अच्छी सेहत और आमदनी भी है. उनका सुगंधित काली मूंछ चावल 350 रुपये किलो तक बिकता है. चावल के साथ गेहूं का आटा, दाल, गुड़, सब्जी सहित अन्य उत्पाद भी बनाते हैं. किसान बताते हैं कि रायपुर, बिलासपुर और सरायपाली से भी ग्राहक पहुंचते हैं.

दूसरों को भी रोजगार दे रहा किसान
किसान न सिर्फ खुद समृद्ध हैं, बल्कि दूसरों को रोजगार भी दे रहे हैं. 10 से 25 लोगों को उन्होंने काम पर रखा है. अंतर्यामी प्रधान का कहना है कि अगर सही तकनीक अपनाई जाए तो खेती घाटे का नहीं, बल्कि मुनाफे का सौदा है.

अंतर्यामी प्रधान बताते हैं कि हमारे परिवार के लोग सौ साल से ज्यादा जी रहे हैं. दादाजी 107 साल तक जिंदा रहे. पिताजी भी सौ साल से ज्यादा जीए. मां भी 103 साल तक जिंदा रहीं.

मैं मानता हूं कि उनके ज्यादा समय तक जिंदा रहने और स्वस्थ रहने का आधार भी जैविक खेती रही. जैविक खाद से बनी वस्तुओं का आहार में इस्तेमाल करने की वजह से वो लोग स्वस्थ रहते थे-अंतर्यामी प्रधान, किसान
जैविक खाद से हर सीजन में होती है खेती
अंतर्यामी प्रधान कहते हैं कि हमारे पूर्वजों को कभी पैसे की कमी नहीं रही. जब धान होता था तो सीजन में धान बेचते थे. धान के बाद गेहूं, अरहर, गुड़ होता था. ये सिस्टम चलते रहता था. अक्टूबर नवंबर में पुराना चावल बेचते थे. इस तरह साल भर उनके पास पैसे की आवक रहती थी.

दूसरे किसानों को जैविक खेती करने की सलाह
अंतर्यामी प्रधान ने दूसरे किसानों से भी जैविक खेती अपनाने की अपील की है. उनका यह भी कहना है कि साग सब्जी के लिए शासन को भी दो मार्केट की व्यवस्था करनी चाहिए. एक मार्केट जैविक खाद का और दूसरा मार्केट रासायनिक खाद से उगाई गई सब्जी का होना चाहिए.

दूर दूर तक हो रही किसान की चर्चा
अब इस किसान की चर्चा छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्यों तक पहुंच चुकी है. वे न केवल जमीन को जहरमुक्त बना रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ कल की नींव रख रहे हैं.
जिला पंचायत सदस्य और किसान नेता जुगनू जागेश्वर चंद्राकर का कहना है कि निश्चित तौर पर किसान अंतर्यामी प्रधान ने खेती किसानी को एक नयी दिशा दी है, जिससे और भी अन्य किसानों को प्रेरणा लेनी चाहिए.
महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने भी किसान की तारीफ की है. उन्होंने कहा है कि सभी किसानों को ज्यादा से ज्यादा जैविक खेती करनी चाहिए. किसान को कार्यशाला में बुलाकर सम्मानित भी किया जाएगा.
जैविक खेती कर बने समृद्ध
जहां आज कई किसान खेती किसानी में बड़े बड़े खर्च से परेशान होते है. वहीं पूर्वजों की तकनीक को अपनाते हुए आज यह किसान ऊंचाईयों को छू रहे हैं और बेहतरीन जीवन यापन कर रहे हैं. खास बात यह भी है कि वो न सिर्फ खुद समृद्ध हैं, बल्कि दूसरे लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.

