सीतापुर पार्किंग को बनाया 'अस्थायी होटल', यात्रियों को सुलाने पर फूटा व्यापारियों का गुस्सा
केदारनाथ मार्ग पर स्थित सीतापुर पार्किंग में यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था करने पर व्यापारी भड़के, पार्किंग संचालक ने आरोपों को किया खारिज

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : May 26, 2026 at 10:41 PM IST
रुद्रप्रयाग: विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम यात्रा के बीच सीतापुर पार्किंग को लेकर बड़ा विवाद भड़क उठा है. यात्रियों की सुविधा के नाम पर पार्किंग स्थल को कथित तौर पर 'अस्थायी होटल' में बदल देने के आरोपों ने स्थानीय होटल कारोबारियों और व्यापारियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है.
आरोप है कि पार्किंग परिसर में गद्दे-रजाई बिछाकर यात्रियों को रातभर ठहराया जा रहा है और उनसे प्रति व्यक्ति शुल्क वसूला जा रहा है. इस पूरे मामले को लेकर अब स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो 28 मई से उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा.
सीतापुर में पार्किंग स्थल में यात्रियों को सुलाने की व्यवस्था पर भड़के व्यापारी: बता दें इन दिनों यात्रा सीजन अपने चरम पर है, लेकिन इसी बीच सीतापुर में पार्किंग स्थल में यात्रियों को सुलाने की व्यवस्था ने स्थानीय होटल व्यवसायियों की नींद उड़ा दी है. व्यापारियों का आरोप है कि वाहन पार्किंग के लिए निर्धारित जगह को नियमों के विपरीत व्यावसायिक सराय की तरह संचालित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय होटल, लॉज और गेस्ट हाउस कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं.
होटल कारोबारियों ने पार्किंग स्थल पहुंचकर जोरदार विरोध दर्ज कराया और प्रशासन पर मिलीभगत के गंभीर सवाल खड़े किए. व्यापारियों का कहना है कि पूर्व में क्षेत्रीय विधायक की ओर से स्पष्ट आश्वासन दिया गया था कि पार्किंग परिसर में गद्दे-रजाई लगाकर यात्रियों को नहीं सुलाया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद खुलेआम यह व्यवस्था जारी है. इससे स्थानीय व्यापारियों में भारी नाराजगी है.
"पार्किंग का उद्देश्य वाहनों को खड़ा करना है, न कि उसे होटल या धर्मशाला में बदल देना. पार्किंग में यात्रियों को सुलाकर मोटी रकम वसूली जा रही है. जबकि, स्थानीय व्यापारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. छोटे होटल व्यवसायियों की रोजी-रोटी पर सीधा हमला किया जा रहा है."- मनोज सेमवाल, सचिव, होटल एसोसिएशन
उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में पहले भी जिला प्रशासन को अवगत कराया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. अब दोबारा जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई है कि पार्किंग संचालक का 10 वर्षीय टेंडर निरस्त किया जाए. इसे केवल सीमित अवधि के लिए लागू किया जाए. साथ ही पार्किंग परिसर में यात्रियों को सुलाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग उठाई गई है.

होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मेश नौटियाल, उपाध्यक्ष कल्पेश चौहान, कोषाध्यक्ष मंजीत गजवान समेत बड़ी संख्या में होटल व्यवसायियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो व्यापारी सड़क पर उतरेंगे और आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा. व्यापारियों ने साफ कहा कि यदि हालात बिगड़ते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी.
वहीं, दूसरी ओर दिल्ली निवासी पार्किंग संचालक भरत भूषण ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि 'उन्होंने विधिवत टेंडर लिया है और टेंडर की शर्तों में यात्रियों को प्रति व्यक्ति 100 रुपए में गद्दा-रजाई उपलब्ध कराने का प्रावधान दर्ज है.' हालांकि, स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि टेंडर में ऐसी व्यवस्था शामिल है, तो यह स्थानीय पर्यटन व्यवसाय और होटल उद्योग के लिए बेहद घातक साबित होगी.
उनका आरोप है कि यात्रा सीजन में बाहरी ठेकेदार करोड़ों की कमाई कर रहे हैं. जबकि स्थानीय लोग आर्थिक नुकसान झेलने को मजबूर हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर केदारनाथ यात्रा के नाम पर पार्किंग स्थलों को व्यवसायिक ठिकानों में बदलने की अनुमति किसने दी?
क्या प्रशासन की आंखों के सामने स्थानीय व्यापारियों की आजीविका छीनी जा रही है? क्या बाहरी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए स्थानीय कारोबारियों के हितों की अनदेखी की जा रही है? इन सवालों ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है. फिलहाल, यह मामला गरमाया हुआ है.
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