'RTI में रिकॉर्ड गायब होने का बहाना अब नहीं चलेगा' पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
पटना हाई कोर्ट ने RTI कानून पर बड़ा फैसला सुनाया है. मामले में कोर्ट ने 4 सप्ताह में सूचना देने का आदेश दिया. रिपोर्ट-आनंद वर्मा

Published : August 21, 2026 at 10:22 PM IST
पटना: पटना हाई कोर्ट ने आरटीआई (सूचना से अधिकार कानून) को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है. अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड का फटा, अपठनीय या गायब होने का हवाला देकर सूचना देने का इनकार नहीं किया जा सकता है. साथ ही राज्य अपने ही रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने में हुई विफलता का लाभ नहीं उठा सकता.
क्या है पूरा मामला? : कोर्ट ने सिवान जिला के सिवान सदर अंचल से याचिकाकर्ता से संबंधित बरवड़ा रजिस्टर उपलब्ध नहीं होने पर राजस्व अभिलेखों के आधार पर रिकॉर्ड पुनर्निर्मित करने का निर्देश देते हुए कहा कि संबंधित कार्यालय को आठ सप्ताह में यह कार्य हर हाल में पूरा करना होगा.
मोहमद रिजवान की याचिका : जस्टिस राज कुमार की एकलपीठ ने सिवान जिला के मोहमद रिजवान द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. याचिकाकर्ता ने बरवडा और रजिस्टर-2 की प्रमाणित प्रति सिवान सदर अंचल द्वारा उपलब्ध नहीं कराने पर यह याचिका हाई कोर्ट दायर की थी.
अधिकारी का सूचना देने से इनकार : सिवान सदर अंचल के संबंधित अधिकारी ने रिकॉर्ड की मूल प्रति उपलब्ध नहीं होने और उपलब्ध प्रति के अपठनीय होने का हवाला देते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया था.
कोर्ट ने बरवाड़ा को सार्वजनिक दस्तावेज मानते हुए कहा कि बरवडा सरकारी रिकॉर्ड है और इसे सार्वजनिक दस्तावेज के रूप में देखा जा सकता है. इसमें सह-हिस्सेदारों तथा उनके द्वारा दिए गए लगान आदि का विवरण रहता है और यह भूमि विवाद एवं बंटवारे से जुड़े मुकदमों में साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सकता है.
हाई कोर्ट ने अधिकारियों के इस रुख को भी विरोधाभासी माना कि एक ओर मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई, जबकि दूसरी ओर उसकी फटी और अपठनीय फोटोप्रति उपलब्ध होने की बात कही गई. कोर्ट ने कहा कि ऐसा रवैया आर टी आई कानून के मूल उद्देश्य के विपरीत है. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि रिकॉर्ड नहीं मिले, तो उसका पुनर्निर्माण करना होगा.
कोर्ट ने इसके लिए जिला प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा गया कि वह बरवदा रजिस्टर का चार सप्ताह के भीतर भौतिक तलाश अंचलाधिकारी कार्यालय समेत भूमि सुधार उपसमाहर्ता कार्यालय समेत जिला अभिलेखागार में भी करे. यदि रिकॉर्ड नहीं मिलता है, तो राजस्व अभिलेखों में उपलब्ध प्रविष्टियों के आधार पर उसका पुनर्निर्माण किया जाए.
यदि रिकॉर्ड फटा या पढ़ने योग्य नहीं मिलता है, तो उसे डिजिटल रूप से सुरक्षित करने, बड़ा करने अथवा विशेषज्ञ से टाइप कराने के बाद संबंधित अंचल कार्यालय से प्रमाणित कर याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराया जाए. कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग द्वारा इस मामले में 6 जनवरी, 2012 को पारित किए गए आदेश के साथ ही लोक सूचना अधिकारी सदर अंचल सिवान द्वारा 28 जून 2011 के आदेश को निरस्त कर दिया.
कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक प्राधिकरणों का यह वैधानिक दायित्व है कि वे ऐसे रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, जिससे आरटीआई के तहत सूचना उपलब्ध कराई जा सके. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा गया कि आर टी आई की दूसरी अपील को 30 दिनों के भीतर अथवा अधिकतम 45 दिनों की अवधि में निस्तारित किया जाना चाहिए, ताकि सूचना मांगने वाला व्यक्ति लंबे समय तक अपने अधिकार से वंचित न रहे.
अदालत ने पूरे मामले में दिए गए निर्देशों का पालन आदेश की तिथि से आठ सप्ताह के भीतर सुनिश्चित करने का आदेश संबंधित अधिकारियों को दिया है. कोर्ट ने कहा कि आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना से संबंधित दस्तावेजों का आवेदक को निरीक्षण करने का अवसर दिया जाना चाहिए. यदि निरीक्षण से इनकार किया जाता है, तो इसका ठोस कारण बताना होगा.धारा 8 के अपवाद में नहीं आने वाले दस्तावेजों के निरीक्षण से सामान्य आधार पर इनकार नहीं किया जा सकता.
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