सूरज ढलने के बाद आज आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा, खुली आंखों से कतई न देखें
आज सौर मंडल के 6 ग्रह, बुध, शुक्र, शनि, अरुण, वरुण, और वृहस्पति लगभग एक ही कतार में दिखाई दे सकते हैं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : February 28, 2026 at 11:59 AM IST
|Updated : February 28, 2026 at 2:44 PM IST
गोरखपुर: आज यानी 28 फरवरी की शाम आप सभी अपनी नजरें आसमान की ओर टिका लीजिए. इस दिन हमारे सौर मंडल के 6 ग्रह, बुध (Mercury), शुक्र (Venus), शनि (Saturn), अरुण (Uranus), वरुण (Neptune), और बृहस्पति (Jupiter), लगभग एक ही कतार में दिखाई दे सकते हैं. यह वह खगोलीय स्थिति है, जब सौर मंडल के कई ग्रह एक ही समय में आकाश के लगभग एक ही हिस्से में, एक काल्पनिक रेखा (क्रांतिवृत्त Ecliptic) के आसपास दिखाई दे सकते हैं.
याद रखें कि इन ग्रहों को खुली आंखों से कतई न देखें. दूरबीन या टेलीस्कोप के बिना देखना हानिकारक हो सकता है.
गौर करें तो IIA (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एस्ट्रोफिजिक्स) ने वायरल सोशल मीडिया पोस्ट में वादा किए गए सेलेस्टियल परेड पर पानी फेर दिया है. IIA ने 28 फरवरी को एक दुर्लभ प्लैनेटरी अलाइनमेंट के दावों को "बहुत बढ़ा-चढ़ाकर और गुमराह करने वाला" बताया है.
ग्रहों की इस स्थित को लेकर कुछ खगोल वैज्ञानिक इसका अर्थ ये बताते हैं कि सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा लगभग एक ही समतल (plane) में करते हैं, जो पृथ्वी से देखने पर यह सभी उसी मार्ग पर एक कतार या चाप (arc) में दिखाई देते हैं.

वहीं खगोलविद की मानें तो 3 या अधिक ग्रह एक साथ दिखाई दें, तो सामान्यत: इसे “प्लैनेटरी परेड” कहा जाता है. 6 या उससे अधिक ग्रहों का एक साथ दृश्य होना और भी कम बार होता है.

गोरखपुर के वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि "यह अद्भुत खगोलीय नजारा सूर्यास्त के लगभग 30 मिनट बाद शुरू होगा. इसके लिए बस एक ऐसी जगह ढूंढ़नी है, जहाँ से पश्चिमी क्षितिज (Western Horizon) साफ दिखाई दे."
बता दें कि शुक्र, बृहस्पति, बुध, शनि, अरुण और नेपच्यून ग्रह को देखने के लिए किसी अच्छी टेलिस्कोप / दूरबीन या किसी विशेष बाइनाकुलर की जरूरत होगी. इस दौरान आकाश में चांद का भी साथ होगा और इस शाम चांद भी 92% चमक के साथ बृहस्पति के बेहद करीब (लगभग 4°) पर नजर आएगा. यह नज़ारा इस दृश्य को और भी खूबसूरत बना देगा. इस प्रकार की खगोलीय घटना को खगोल विज्ञान की भाषा में 'प्लैनेटरी अलाइनमेंट' या ग्रहीय संरेखण भी कहा जाता है.

क्या यह सभी ग्रह, हक़ीकत में एक साथ होंगे ?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दूरी से ये ग्रह केवल पृथ्वी से देखने पर एक लाइन में दिखते हैं, अंतरिक्ष में ये एक-दूसरे से करोड़ों किलोमीटर दूर अपनी कक्षाओं में होते हैं. यदि सामने ऊंची इमारतें या पेड़ हैं, तो आप नीचे स्थित ग्रहों (बुध और शनि) को नहीं देख पाएंगे. साथ ही मौसम का हाल ख़्याल रखना ही होता है कि इसके लिए आसमान का साफ और बादल रहित होना अनिवार्य है. कई प्रमुख समस्याओं में से एक जो कि है प्रकाश प्रदूषण, इसीलिए इस लाइट पॉल्यूशन से भी बचें, शहर की तेज लाइटों से दूर अंधेरी जगह पर यह नजारा और भी साफ एवं स्पष्ट दिखेगा.

खगोलविद के अनुसार, जो लोग इन ग्रहों को एक कतार में देखना चाहते हैं, उन्हें 28 फरवरी को सूर्यास्त के लगभग 25 से 30 मिनट बाद पश्चिम दिशा के आकाश की तरफ दूरबीन/टेलीस्कोप या विशेष बिनाकुलर से देखना चाहिए.

बता दें कि इन 6 ग्रहों में से चार ग्रह, सूर्य के अत्यंत निकट होंगे, जो शाम के उजाले में केवल थोड़े समय के लिए ही दिखाई देंगे. शुक्र और बुध क्षितिज (धरती की रेखा) के सबसे करीब होंगे, उनके बाद शनि ग्रह और अरुण ग्रह (यूरेनस) का स्थान होगा. जबकि अरुण ग्रह और वृहस्पति ग्रह आकाश में काफी ऊंचाई पर स्थित होंगे. इस कारण तीन से अधिक ग्रहों को एक साथ देख पाना एक कठिन चुनौती हो सकती है, क्योंकि अरुण ग्रह बिना दूरबीन के दिखाई ही नहीं देता है. भारत में सूर्यास्त लगभग 6:20 PM (स्थान के अनुसार थोड़ा अलग) पर होगा.

ग्रहों को देखने का सबसे अच्छा समय 6:45 PM से 7:15 PM के बीच होगा, क्योंकि इसके बाद बुध ग्रह और शुक्र ग्रह और कुछ ही देर बाद में शनि ग्रह भी, क्षितिज से नीचे चले जाएंगे.
खगोलविद ने बताया कि अगली ऐसी खगोलीय घटना अक्टूबर 2028 के अंत में घटित होगी, जब सूर्योदय से पहले पांच ग्रह एक साथ दिखाई देंगे. इसके बाद, फरवरी 2034 के अंत में, पांच ग्रह फिर से सूर्यास्त के बाद दिखाई देंगे, हालांकि उस दौरान भी शुक्र और बुध को उतना स्पष्ट देख पाना कुछ चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
28 Feb को कोई 'सेलेस्टियल अलॉइनमेंट' नहीं
IIA (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एस्ट्रोफिजिक्स) ने वायरल सोशल मीडिया पोस्ट में वादा किए गए सेलेस्टियल परेड पर पानी फेर दिया है, और 28 फरवरी को एक दुर्लभ प्लैनेटरी अलाइनमेंट के दावों को "बहुत बढ़ा-चढ़ाकर और गुमराह करने वाला" बताया है.
जबकि इंटरनेट ट्रेंड्स एक शानदार नज़ारे का सुझाव देते हैं, जहाँ सोलर सिस्टम के सभी प्लैनेट एक लाइन में होंगे.
बेंगलुरु-बेस्ड इंस्टीट्यूट के साइंटिस्ट्स ने साफ़ किया है कि ज़्यादातर ऑब्ज़र्वर के लिए इन बॉडीज़ की असल विज़िबिलिटी एक कोऑर्डिनेटेड डिस्प्ले से बहुत दूर होगी. अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया पेज पर जारी एक जानकारी देने वाले वीडियो में, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) ने सोशल मीडिया पर अभी ट्रेंड कर रहे डिजिटल फिक्शन से एस्ट्रोनॉमिकल फैक्ट को अलग करने के लिए एक डिटेल्ड ब्रेकडाउन दिया.
सोशल मीडिया पर "प्लैनेट परेड" शब्द का इस्तेमाल अक्सर आसमान के एक ही हिस्से में दिखने वाले कई ग्रहों के बारे में बताने के लिए किया जाता है, लेकिन एक्सपर्ट इस बात पर ज़ोर देते हैं कि ये ग्रह लाखों किलोमीटर दूर रहते हैं और शायद ही कभी वायरल ग्राफ़िक्स में दिखाई गई "परफ़ेक्ट लाइन" बनाते हैं.
वीडियो में बताया गया है कि सिर्फ़ जुपिटर ही ऐसा ग्रह है जिसे आसानी से देखा जा सकता है, जो शाम के आसमान में ऊपर होगा और सुबह लगभग 3.30 बजे तक डूबेगा नहीं. ऐसे में जो लोग छोटा टेलिस्कोप या दूरबीन इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें ग्रह के मुख्य बेल्ट और उसके गैलीलियन चांद दिखाई देंगे, लेकिन सोलर सिस्टम के दूसरे सदस्यों को ढूंढ़ना काफ़ी मुश्किल होगा.
मर्करी और वीनस अभी सूरज के बहुत करीब हैं और सूरज डूबने के सिर्फ़ 45 मिनट बाद डूबने की उम्मीद है. शाम के समय होराइज़न से सिर्फ़ 10 से 12 डिग्री ऊपर होने के कारण, वीडियो में बताया गया है कि उन्हें देखना लगभग नामुमकिन होगा. इसी तरह, सैटर्न सूरज डूबने के लगभग 1.5 घंटे बाद डूबेगा और होराइज़न पर बहुत नीचे रहेगा, जबकि मार्स सुबह देखने वालों को पूरी तरह से दिखाई नहीं देगा, क्योंकि यह सूरज से पहले डूब जाएगा.
टेलिस्कोप, बाइनोकुलर्स या बिना मदद के आंखों का इस्तेमाल न करें
IIA ने वीडियो का इस्तेमाल एक ज़रूरी सेफ्टी वॉर्निंग जारी करने के लिए किया. इसमें स्काईवॉचर्स से कहा गया कि वे सूरज डूबने से पहले मर्करी, वीनस या सैटर्न को खोजने के लिए टेलिस्कोप, बाइनोकुलर्स या बिना मदद के आंखों का इस्तेमाल न करें. ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स से गलती से सीधी धूप लगने से आंखों को हमेशा के लिए और गंभीर नुकसान हो सकता है, जो लोग दूर के ग्रहों यूरेनस और नेपच्यून को ढूंढ़ रहे हैं. उनके लिए इंस्टीट्यूट ने साफ किया कि टेलिस्कोप ज़रूरी हैं, क्योंकि नेपच्यून को ढूंढ़ना खासकर सैटर्न के पास होने की वजह से मुश्किल है.
मार्च और अप्रैल को देखते हुए, IIA वीडियो में कहा गया है कि देखने के हालात बदल जाएंगे, क्योंकि जुपिटर हर शाम जल्दी डूबने लगेगा. इसके उलट, वीनस पश्चिमी आसमान में ज़्यादा देर तक दिखेगा। उस समय तक, मार्स और सैटर्न के मर्करी के साथ पूर्वी सुबह के आसमान में दिखने की उम्मीद है, जो 28 फरवरी के बहुत ज़्यादा चर्चित अलाइनमेंट की तुलना में एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्ज़र्वेशन के लिए ज़्यादा भरोसेमंद मौका देगा.
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