अभिषेक बनर्जी के साथ मारपीट : गहलोत बोले- बंगाल में उत्पात मचा रहे हैं बीजेपी और आरएसएस के लोग
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा- बंगाल में भाजपा घुसी नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग ने जबरन घुसाई है.

Published : May 31, 2026 at 1:13 PM IST
जयपुर: पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ शनिवार को हुई मारपीट मामले को लेकर सियासत भी अब तेज होने लगी है. विपक्षी नेताओं ने इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की है तो वहीं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी भाजपा और आरएसएस पर हमला बोला है. गहलोत ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जबसे टीएमसी की हार हुई है, तब से ही आरएसएस और बीजेपी के लोग उत्पात मचा रहे हैं.
गहलोत ने रविवार को अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मैंने चुनाव के दौरान ही कोलकाता जाकर कहा था कि अगर बीजेपी बंगाल में जीत गई तो पूरा देश निराशा होगा. यह बात मैंने सोच समझकर कही थी, क्योंकि बंगाल की संस्कृति त्याग और बलिदान की है. सुभाष चंद्र बोस और रविंद्र नाथ टैगोर की धरती है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल में बीजेपी घुसी नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग ने जबरन घुसाई है. ढाई लाख पैरामिलिट्री फोर्स को बंगाल में तैनात किया गया, जबकि पूरे देश में जब लोकसभा चुनाव होते हैं तो 3 लाख पैरा मिलिट्री फोर्स की तैनाती होती है. गहलोत ने कहा कि उत्तर प्रदेश से गए आईपीएस अफसर गली मोहल्ले में लोगों को धमका रहे हैं. आईपीएस और आईएएस अधिकारियों का काम केवल चुनाव ऑब्जर्वर का होता है, लोगों को धमकाने का नहीं.
बंगाल में डबल इंजन की मार पड़ रही है : पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 27 लाख लोगों को वोट डालने से वंचित कर दिया. होना यह चाहिए था कि जब तक 27 लाख वोटों का फैसला नहीं होता, तब तक चुनाव को स्थगित किया जाना था. सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया कि अगली बार वोट डाल लेना, यह कैसी टिप्पणी हुई. ऐसा कभी नहीं होना चाहिए, क्योंकि एक जायज वोट भी वंचित नहीं रहना चाहिए.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अभिषेक बनर्जी सांसद हैं और टीएमसी के नेता हैं, इसलिए उनके साथ मारपीट का मामला प्रकाश में आ गया. जबकि जबसे तृणमूल कांग्रेस वहां चुनाव हारी है तब से ही वहां पर भाजपा और आरएसएस के लोग गुंडागर्दी कर रहे हैं. चाल चरित्र और चेहरे की बात करने वाले लोग अब एक्सपोज हो गए हैं. टीएमसी के कार्यालयों पर हमले हो रहे हैं, दफ्तर खाली करवाए जा रहे हैं. चुनाव आयोग भी चुप्पी साधकर बैठा हुआ है और पुलिस सत्ता बदलते ही बदल जाती है. गहलोत ने कहा कि अब केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार है तो वहां पर डबल इंजन की मार लोगों पर पड़ रही है.
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युवा पीढ़ी को समझना होगा : पूर्व मुख्यमंत्री ने युवा पीढ़ी से आह्वान करते हुए कहा कि देश की युवा पीढ़ी को समझना चाहिए कि देश किस दिशा में जा रहा है, क्या विचारधारा होनी चाहिए. अगर अब युवा पीढ़ी विचारधारा के तौर पर आगे नहीं आएगी तो फिर कौन आगे आएगा. उनको विचारधारा के राजनीति में उतरना चाहिए, चाहे छात्र हो, युवा हो उनका अब राजनीति में प्रवेश करने का समय आ गया है. उनको चिंतन मनन करना चाहिए. वो किसी पार्टी में जाएं, लेकिन देश की क्या विचारधारा होनी चाहिए, उस पर उन्हें विचार करना चाहिए.
डीके शिवाकुमार हमेशा पार्टी के लिए संकटमोचक रहे : वहीं, कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के तौर पर चुने गए डीके शिवकुमार को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जिस रूप में मुख्यमंत्री पद का फैसला हुआ है वो काबिले तारीफ है. राहुल गांधी ने सबसे बात करके सबको विश्वास में लेकर परिवर्तन का फैसला लिया है, क्योंकि सिद्धारमैया बहुत ही अनुभवी थे. लंबे समय से राजनीति की है, अच्छा काम किया है, लेकिन कई बार राजनीति में फैसले लेने पड़ते हैं.
गहलोत ने कहा कि डीके शिवाकुमार भी काबिल हैं, पार्टी के प्रति समर्पित हैं और हमने देखा है कि समय-समय पर वह पार्टी के लिए संकट मोचक की भूमिका में रहे हैं. भाजपा ने मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान में जब हॉर्स ट्रेडिंग के जरिए सरकार गिराने की कोशिश की थी, तब वो हमेशा पार्टी के साथ खड़े रहे जो. जिम्मेदारी उन्हें दी गई उन्होंने निभाई है. गहलोत ने कहा कि हिमाचल में बीजेपी ने हॉर्स ट्रेडिंग के जरिए पांच विधायकों को तोड़ लिया था और राज्यसभा के उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी भी चुनाव हार गए थे. तब भी उन्होंने वहां जाकर विधायकों की समझाइश की थी और सरकार बचा ली थी. वो अलग व्यक्तित्व के धनी हैं. उम्मीद है कि वो नए उत्साह के साथ आगे बढ़ेंगे और काम करेंगे.
कांग्रेस जिलाध्यक्षों का प्रशिक्षण शिविर अच्छा फैसला : वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पुष्कर में चल रहे कांग्रेस जिलाध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर को लेकर कहा कि जिलाध्यक्षों के चयन के लिए हाईकमान ने नई पॉलिसी बनाई है. जिसमें पहले पर्यवेक्षक जिलों में जाते हैं, जिलाध्यक्षों की रायशुमारी में कोई हस्तक्षेप नहीं होता और वे पांच नाम लेकर दिल्ली जाते हैं. उसके बाद एक नाम का चयन होता है. यह प्रक्रिया पूरे देश में चल रही है.
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अशोक गहलोत ने कहा कि पुष्कर में 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर चल रहा है. जिलाध्यक्षों को यह भी कहा गया है कि अगर वो अच्छा काम करते हैं तो उनको सेंट्रल इलेक्शन कमेटी में बैठने का मौका मिलेगा, जिसमें वो विधायक और सांसद प्रत्याशी के चयन में अपनी राय देंगे. लेकिन देखने वाली बात यह है कि जिलाध्यक्ष राहुल गांधी की भावनाओं को कितना आत्मसात कर पाते हैं. किस रूप में अपने आप को समर्पित करते हैं और किस रूप में वो घर-घर जाकर पब्लिक से संपर्क करते हैं.
पूर्व सीएम ने कहा कि जिलाध्यक्ष की टिप्स पर पूरा जिला होना चाहिए, तभी वो राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की भावनाओं को जनता तक पहुंच पाएंगे. साथ ही बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था जैसी समस्याएं भी जनता तक पहुंचा पाएंगे. यह एक अच्छी शुरुआत हुई है और इस प्रशिक्षण शिविर के बाद कांग्रेस संगठन को इससे और मजबूती मिलेगी.

