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कैसे हुआ हरिद्वार का 54 करोड़ का भूमि खरीद घोटाला, किस भूमिका में था कौन अफसर? देखें टाइमलाइन

हरिद्वार नगर निगम ने 15 करोड़ की जमीन 54 करोड़ में खरीदी थी, इस जमीन खरीद घोटाले में आईएएस अफसर भी फंसे हैं.

HARIDWAR MUNICIPAL CORPORATION SCAM
हरिद्वार भूमि घोटला. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : June 20, 2026 at 7:38 PM IST

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हरिद्वार: हरिद्वार नगर निगम के भूमि घोटाले में अब सजा की घड़ी आ गई है. 15 करोड़ रुपए की जमीन 54 करोड़ रुपए में खरीदकर सरकारी खजाने को चपत लगाई गई थी, उसकी चपेट में दो आईएएस अफसर भी आ गए हैं. धामी सरकार के फैसले को उत्तराखंड के 26 साल के इतिहास का सबसे सख्त फैसला माना जा रहा है.

हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में अब तक 14 अफसर निलंबित हैं: हरिद्वार के भूमि खरीद घोटाले में 2 आईएएस और 12 अन्य अधिकारी निलंबित हो चुके हैं. अब दो आईएएस अफसरों में से एक के लिए सेवा से बर्खास्तगी और एक के लिए मेजर पनिशमेंट की संस्तुति हो रही है. आईए आपको हरिद्वार भूमि घोटाले की पूरी टाइम लाइन समझाते हैं.

हरिद्वार की इसी भूमि खरीद पर हुआ था घोटला. (ETV Bharat)

2024 में शुरू हुई थी भूमि खरीद की प्रक्रिया: दरअसल 2022 में भूमि खरीद की योजना बनी. हरिद्वार नगर निगम ने सितंबर 2024 में कूड़ा निस्तारण परियोजना के लिए सराय क्षेत्र में जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी. भूमि का मूल्यांकन कर खरीद प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. आठ अंकों की बड़ी रकम चुकाकर रजिस्ट्री करायी गयी. रजिस्ट्री कराने के बाद ही शिकायतें सामने आने लगी. आरोप लगे कि जमीन का मूल्य बहुत कम था, उसके लिए ज्यादा रकम चुकाई गई है. जमीन के चयन पर सवाल खड़े हुए तो कृषि भूमि से व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तन की प्रक्रिया पर भी उंगली उठी.

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इस तरह समझिए हरिद्वार भूमि घोटाला का पूरा लेखा जोखा. (PHOTO-ETV Bharat)

हरिद्वार नगर निगम ने 54 करोड़ में खरीदी थी जमीन: अक्टूबर-नवंबर 2024 में हरिद्वार नगर निगम ने करीब 54 करोड़ रुपये में जमीन खरीद ली. दिसंबर 2024–अप्रैल 2025 में खरीद प्रक्रिया, मूल्यांकन और अनुमोदन को लेकर अनेक शिकायतें सामने आने लगीं. इसके लिए राजस्व विभाग और नगर निगम के अफसरों की भूमिका पर सवाल उठने लगे.

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हरिद्वार भूमि घोटाले में पूर्व डीएम की भूमिका (PHOTO-ETV Bharat)

29 मई 2025 को आई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट: जांच शुरू हुई तो 29 मई 2025 को शासन को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी गई. इस रिपोर्ट में जमीन खरीद में बड़ी अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का खुलासा हुआ. जांच रिपोर्ट के आधार पर 3 जून 2025 को सीएम धामी ने दो आईएएस अफसरों समेत 10 अफसरों को निलंबित कर दिया. साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस जांच के आदेश दे दिए. इधर भूमि की रजिस्ट्री निरस्त करने और भुगतान की वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी जारी हो गए.

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जानिए हरिद्वार भूमि घोटाले में किस अधिकारी की क्या भूमिका थी. (PHOTO-ETV Bharat)

नगर निगम ने कोर्ट जाने का फैसला लिया: मामला यहीं ठंडा नहीं हूआ. 5 जून 2025 को हरिद्वार नगर निगम ने विवादित भूमि की रजिस्ट्री रद्द कराने के लिए अदालत जाने का निर्णय लिया. इसके लिए नए जिलाधिकारी की मौजूदगी में कानूनी राय ली गई.

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हरिद्वार भूमि घोटाला मामले में जांच के साथ एक्शन (PHOTO-ETV Bharat)

11 जून 2025 से विजिलेंस ने शुरू की भूमि खरीद घोटाले की जांच: इधर हरिद्वार नगर निगम में जो चल रहा था उसके इतर 11 जून 2025 को विजिलेंस टीम भूमि घोटाले की जांच करने हरिद्वार पहुंच गई. विजिलेंस टीम ने विवादित भूमि का निरीक्षण किया और संबंधित अफसरों के बयान दर्ज किए. जून 2025 से जून 2026 तक विजिलेंस की गहन जांच-पड़ताल चली. इस दौरान अनेक अफसरों के बैंक रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग, मूल्यांकन रिपोर्ट और अनुमोदन प्रक्रिया की जांच हुई.

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हरिद्वार भूमि घोटाले में आरोपों से शुरू हुआ पूरा खेल (PHOTO-ETV Bharat)

विजिलेंस जांच में घोटाले की पुष्टि हुई, सीएम ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए: 19 जून 2026 को विजिलेंस की जांच में हरिद्वार भूमि खरीद में अनियमितताओं की पुष्टि हो गई. इस पर सीएम धामी ने सख्त कार्रवाई की. तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई. तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मेजर पेनाल्टी की सिफारिश की गई. दरअसल ये दोनों आईएएस अफसर हैं तो इन पर अंतिम फैसला केंद्र करेगा. वहीं अन्य अफसरों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए.

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जांच के बाद हरिद्वार भूमि घोटाले में धोखाधड़ी की पुष्टि हुई. (PHOTO-ETV Bharat)

भूमि खरीद के दौरान हरिद्वार में ये अफसर थे तैनात: आइए अब आपको बताते हैं कि हरिद्वार भूमि खरीद मामले में किस आईएएस की क्या भूमिका रही. भूमि खरीद मामले में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त वरुण चौधरी प्रमुख प्रशासनिक अफसर थे. जमीन चयन, मूल्य निर्धारण संबंधी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने और खरीद प्रक्रिया को फाइनलाइज करने में उनकी भूमिका बताई गई. धामी सरकार ने वरुण चौधरी के खिलाफ सबसे सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति की है. वरुण चौधरी उत्तराखंड कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. वरुण की आयु लगभग 41 वर्ष है. उनका जन्म 16 जून 1985 को हुआ था. वह 2017 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS के अधिकारी हैं.

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जांच के लिए हरिद्वार भूमि घोटाले में विजिलेंस की एंट्री हुई. (PHOTO-ETV Bharat)

कर्मेंद्र सिंह हरिद्वार के डीएम थे: कर्मेंद्र सिंह उस समय हरिद्वार के डीएम थे. डीएम के रूप में वो जिले के सबसे बड़े अफसर थे. ऐसे में भूमि खरीद से जुड़े राजस्व और प्रशासनिक अनुमोदनों की निगरानी उनके अधिकार क्षेत्र में थी. जांच में उनकी भूमिका को लेकर धामी सरकार ने मेजर पेनाल्टी यानी गंभीर दंड की केंद्र सरकार से सिफारिश की है. कर्मेंद्र सिंह उत्तराखंड कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. उनकी जन्म तिथि 9 सितंबर, 1971 है. अभी उनकी आयु लगभग 55 वर्ष है.

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जानिए हरिद्वार भूमि घोटाले के मुख्य आरोप. (PHOTO-ETV Bharat)

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