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आंखों में रोशनी नहीं लेकिन लाइफ में है विजन, टीकमगढ़ के भूपेंद्र लोगों को दे रहे प्रेरणा

कहते हैं कि जीत हमेशा हौसले और जज्बे से ही होती है. टीकमगढ़ के भूपेन्द्र सिंह ने आंखों की रोशनी जाने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत.

TIKAMGARH BLIND SUCCESS STORY
आंखों में रोशनी नहीं लेकिन लाइफ में है विजन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 22, 2026 at 6:04 PM IST

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Updated : February 22, 2026 at 7:20 PM IST

3 Min Read
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टीकमगढ़: जब कुछ कर गुजरने का हौसला हो, तो राह के पत्थर अड़चनें नहीं, बल्कि सीढ़ी बन जाती हैं. ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है, टीकमगढ़ के एक छोटे से गांव कवराटा के रहने वाले भूपेंद्र सिंह ने. उनकी आंखों की रोशनी छोटी सी उम्र में ही चली गई. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और कई सफलताएं हासिल की. फिलहाल भूपेंद्र सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहें हैं और आत्मनिर्भर बन समाज सेवा करना चाहते हैं.

छोटी सी उम्र में चली गई आंखों की रोशनी

टीकमगढ़ जिले के एक छोटे से गांव कवराटा के रहने वाले भूपेंद्र सिंह अपने 4 भाइयों में सबसे छोटे हैं. वे एक साधारण से परिवार से ताल्लुक रखते हैं. भूपेन्द्र जब कक्षा 2 में अपने ही गांव के स्कूल में पढ़ाई करते थे, तब उनकी आंखों की रोशनी चली गई. परिवार के लोगों ने काफी इलाज करवाया, लेकिन उनकी आंखों की रोशनी वापस नहीं आई. तब से लेकर आज तक भूपेंद्र देख नहीं सकते.

दृष्टिबाधित भूपेंद्र का लक्ष्य है UPSC क्रैक करना (ETV Bharat)

हमेशा टॉपर लिस्ट में रहे शामिल

आंखों की रोशनी खोने के बाद भूपेंद्र घर पर ही रहने लगे. इसके बाद उन्होंने परिवार वालों से पढ़ाई करने की इच्छा जाहिर की. परिवार वालों ने भी उनका सपोर्ट किया. भूपेंद्र ने हिम्मत नहीं हारी और अच्छे से पढाई की. उन्होंने 2018 में 10वीं बोर्ड परीक्षा दी. जिसमें अपनी मेहनत और लगन से भूपेंद्र ने 94% लाकर मध्य प्रदेश में टॉप टेन (दिव्यांगो में) की लिस्ट में शामिल थे. इसके बाद ग्वालियर से 12वीं की पढ़ाई की, जहां स्कूल में टॉपर रहे और अपनी कैटेगरी में मध्य प्रदेश में थर्ड रैंक पर रहे. इसके साथ ही उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है.

Tikamgarh inspiration for society
टीकमगढ़ निवासी भूपेंद्र समाज के लिए हैं प्रेरणा (ETV Bharat)

यूपीएससी है अगला लक्ष्य

भूपेन्द्र बताते हैं कि "मेरा लक्ष्य सिविल सर्विस में जाकर समाज और देश की सेवा करना है. मैं यूपीएससी की तैयारी कर रहा हूं. मैंने जेआरएफ क्वालीफाई किया है. एमपीपीएससी 2025 का प्री क्वालीफाई कर चुके हैं. असिस्टेंट प्रोफेसर रिटिन भी क्वालीफाई है." वहीं, भूपेंद्र की मेहनत और हौसले की गांव वाले खूब तारीफ करते हैं.

TIKAMGARH INSPIRATION FOR SOCIETY
छोटी सी उम्र में चली गई आंखों की रोशनी (ETV Bharat)

गांव के ही राजेन्द्र सिंह बताते हैं कि "भूपेंद्र दृष्टिबाधित होते हुए भी बहुत मेहनती हैं. वे आत्मनिर्भर बनने की कोशिश में जुटे हुए हैं. ऐसे व्यक्ति का संघर्ष समाज के लिए मिसाल है. समाज में वे सम्मानजनक तरीके से जीवनयापन करने के हकदार हैं. भूपेंद्र समाज के लिए प्रेरणदायी हैं."

Last Updated : February 22, 2026 at 7:20 PM IST