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40 साल तक सरकारी नौकरी फिर नई शुरुआत, रिटायर्ड कर्मचारी का मंथली टर्नओवर पहुंचा 25 लाख

टीकमगढ़ के रामलाल प्रजापति ने पथरीली जमीन से शुरुआत कर लिखी सफलता की नई इबारत. सब्जी की खेती करने वालों के लिए बने मिसाल.

TIKAMGARH FARMER SUCCESS STORY
40 साल तक सरकारी नौकरी फिर नई शुरुआत (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 27, 2026 at 8:21 PM IST

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Updated : February 27, 2026 at 9:38 PM IST

7 Min Read
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रिपोर्ट: राजेश कुमार फणीन्द्र/आलोक कुमार श्रीवास्तव

टीकमगढ़: रिटायर्ड होने के बाद अधिकांश लोग आरामदायक जीवन जीने की सोच रखते हैं लेकिन टीकमगढ़ जिले के बड़ागांव धसान के एक रिटायर्ड कर्मचारी ने इस मिथक को तोड़ते हुए एक नई इबारत लिख दी है. उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति और तकनीक का सहारा लेकर सब्जी की खेती को एक नई दिशा दे दी है. खुद की पथरीली जमीन को तकनीक के सहारे उपजाऊ बना दिया जो कई सालों से अनुपयोगी समझी जाती थी. इस जमीन पर चारों ओर अब हरियाली छाई हुई है और वहां सब्जी की फसलें लहलहा रही हैं.

जहां खेती की कल्पना नहीं वहीं से रखी नींव (ETV Bharat)

40 साल तक सरकारी नौकरी फिर नई शुरुआत

आदिम जाति कल्याण विभाग में पदस्थ रहे रामलाल प्रजापति ने 40 साल तक नौकरी की. नौकरी से सेवानिवृत्त हुए तो उन्होंने खुद को शिथिलता से बचाने के लिए सब्जियों की खेती करने की शुरुआत की. वे खुद कहते हैं कि "रिटायरमेंट के बाद हर व्यक्ति शिथिल हो जाता है और उसी से बचने के लिए उन्होंने कुछ करने की लगन नहीं छोड़ी और आज वे इस मुकाम पर पहुंच गए हैं कि अपने ही जिले के 1000 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहे हैं."

MADHYA PRADESH VEGETABLE FARMING
जहां कभी पत्थरों का था ढेर वहां आज हरियाली (ETV Bharat)

जहां खेती की कल्पना नहीं वहीं से रखी नींव

टीकमगढ़ से लगभग 30 किलोमीटर दूर बड़ागांव धसान के रहने वाले रामलाल प्रजापति ने खेती की शुरुआत या यूं कहें की खेती की नींव वहां से रखी जहां से कल्पना करना भी मुश्किल था. लगभग 15 साल पहले उन्होंने उसी पथरीली जमीन को उपजाऊ बनाया और उसी जमीन से सब्जियों की खेती करने की शुरुआत की.

रामलाल प्रजापति खुद कहते हैं कि "किसी भी हालत में घबराना नहीं है और शुरुआत में मुनाफे की चिंता नहीं करनी है." कुछ ही सालों में बंजर जमीन से जब उन्हें उम्मीद की आस दिखी तो इसके बाद फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपना खुद का कृषि फार्म तैयार किया. सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने कृषि और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में खेती की शुरुआत की.

MADHYA PRADESH MILLIONAIRE FARMER
किसानों के लिए प्रेरणा बना वसुंधरा कृषि फार्म (ETV Bharat)

जहां कभी पत्थरों का था ढेर वहां आज हरियाली

किसान रामलाल प्रजापति बताते हैं कि "पहले यह जमीन पथरीली थी. थोड़ी बहुत परंपरागत खेती हुआ करती थी लेकिन इस पथरीली जमीन से एक एक पत्थर निकाल कर ऊपर से मिट्टी डालकर इसको समतल किया गया. कई बार लोग पत्थरों को बेच देते हैं लेकिन हमने ऐसा नहीं किया. मैंने पत्थरों का उपयोग गड्ढों को भरने में किया. मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए जैविक खाद का उपयोग किया और सिंचाई की बेहतर व्यवस्था तैयार की. लगातार प्रयासों के बाद आज यहां कई प्रकार की सब्जियां उगाई जा रही हैं."

किसानों के लिए प्रेरणा बना वसुंधरा कृषि फार्म

रिटायर्ड कर्मचारी रामलाल प्रजापति ने वसुंधरा कृषि फार्म बनाया. अपनी कुछ एकड़ जमीन से खेती की शुरुआत करने वाले रामलाल प्रजापति ने इसके बाद आसपास की कई जमीनों को ठेके पर लेना शुरू कर दिया और टीकमगढ़ जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा बन गए. यह फार्म हाउस अब उन किसानों के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन गया है जो खेती को आधुनिकता और उद्यमशीलता के साथ जोड़ना चाहते हैं. ऐसा इसलिए कि यह जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे कि यहां से रोजाना लगभग 25 टन से अधिक ताजी सब्जियां देश के कई बड़े शहरों में सप्लाई हो रही हैं.

RETIRED EMPLOYEE RAMLAL PRAJAPATI
महानगरों में हो रहीं सब्जियां सप्लाई (ETV Bharat)

200 एकड़ से ज्यादा जमीन पर सब्जी की खेती

किसान रामलाल प्रजापति टीकमगढ़ में कई जगह खेती कर रहे हैं. बड़ागांव में उनकी खुद की 30 एकड़ जमीन है और यहीं पर उन्होंने 60 एकड़ जमीन ठेके पर ली है. यहां पर वह बैगन, टमाटर, शिमला मिर्च जैसी कई सब्जियों के साथ मिर्ची की खेती कर रहे हैं. किसान रामलाल प्रजापति बताते हैं कि "इसके अलावा हैदापुर गांव में भी 60 एकड़, वहीं टीकमगढ़ के बरई घाट पर 90 एकड़ और आसपास 40 एकड़ और 12 एकड़ जमीन ठेके पर ले रखी है. इन सभी 5 फार्म हाउस पर सब्जी की खेती कर रहे हैं."

महानगरों में हो रहीं सब्जियां सप्लाई

सब्जियों की गुणवत्ता और मात्रा इतनी अधिक है कि रोजाना 10 वाहनों के माध्यम से सब्जियां लखनऊ, दिल्ली, हैदराबाद, कानपुर, झांसी और आंध्रप्रदेश तक भेजी जा रही हैं. रामलाल प्रजापति खुद कहते हैं कि "एक अनुमान के अनुसार लगभग 25 टन सब्जियां रोजाना देश के कई शहरों में सप्लाई की जा रही हैं."

RAMLAL PRAJAPATI VEGETABLE FARMER
पौधों की नर्सरी की तैयार (ETV Bharat)

पौधों की नर्सरी की तैयार

सब्जियों के साथ यहां नर्सरी का काम भी बीते 3 सालों से किया जा रहा है और अब तक करीब लाखों पौधे तैयार कर किसानों को किफायती दरों पर उपलब्ध कराए गए हैं. रामलाल प्रजापति बताते हैं कि "वसुंधरा कृषि फार्म का मासिक टर्नओवर लगभग 25 लाख रुपए के आसपास पहुंच गया है. ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और जैविक उर्वरकों के उपयोग से उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है. जिले में कम से कम 250 किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं. वहीं मध्य प्रदेश के 30 से 35 जिलों के किसान उनसे सलाह लेने आते रहते हैं."

लगभग 1000 से ज्यादा लोगों को मिला रोजगार

सब्जियों की खेती कर सेवानिवृत्त कर्मचारी ने ना केवल खुद खेती को लाभ का धंधा बनाया है बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं.

रामलाल प्रजापति बताते हैं कि "सभी पांचों फार्म पर लगभग 900 से 950 कर्मचारी काम कर रहे हैं. इस तरह के फॉर्मिंग मॉडल से स्थानीय लोगों को खेतों में काम मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है. कई परिवारों की आजीविका अब इसी खेती पर निर्भर हो गई है. जहां लोग अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए महानगरों में पलायन करते थे वहीं आज सैकड़ों लोगों को यहीं आजीविका मिली है और किसानों को नई दिशा."

रोजगार मिलने से रुका पलायन

स्थानीय लोगों का कहना है कि सब्जियों की तुड़ाई, पैकिंग और परिवहन से जुड़े कार्यों में अब सैकड़ों लोगों को काम मिल रहा है. पहले जो लोग रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन करते थे, अब उन्हें गांव में ही काम मिल रहा है. खेत में काम करने वाली धनवती ने बताया कि "जब यहां खेती नहीं होती थी तो हमें रोजगार के लिए शहरों की ओर जाना पड़ता था लेकिन अब हमें यही रोजगार मिलता है और हमारी अच्छे से आजीविका चलती है."

दोनों बेटे खेती में कर रहे सहयोग

यह फार्म साबित करता है कि समर्पण, तकनीक और मेहनत से खेती को भी एक सफल स्टार्टअप की तरह चलाया जा सकता है. रामलाल प्रजापति अपने दोनों बेटों के साथ कृषि फार्म का संचालन कर रहे हैं. उनके बेटे मनोज प्रजापति एग्रीकल्चर से एमएससी है और एक निजी कंपनी में कृषि सलाहकार भी हैं. वहीं दूसरे बेटे नीरज प्रजापति एमफॉर्मा करने के बाद अपने पिता के साथ मिलकर इस फार्म का संचालन कर रहे हैं.

Last Updated : February 27, 2026 at 9:38 PM IST