Special : बिना मां के भी टाइगर सीख गए जंगल में रहने के तौर तरीके, अनाथ शावकों का पूरा हुआ रिवाइल्ड रखने का प्रोसेस
हाड़ौती के जंगलों में बाघ के दो शावकों को रिवाइल्ड रखने का प्रोसेस पूरा हुआ और यह सफल भी रहा. मनीष गौतम की रिपोर्ट...

Published : July 8, 2026 at 8:55 PM IST
कोटा: बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में दो सप्ताह पहले मेल टाइगर आरवीटी 7 को खुले जंगल में एंक्लोजर से रिलीज किया गया. इसके बाद बाहर खुले जंगल में अपनी टेरिटरी बनाने में जुट गया है. उसने शिकार भी किया है, जिसमें भारी भरकम भैंस को मार गिराया. वह एंक्लोजर में भी शिकार कर रहा था. इसके पहले करीब चार महीने पहले अप्रैल माह में उसकी बहन और फीमेल टाइगर एमटी 7 को मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के एंक्लोजर से खुले जंगल में रिलीज किया गया था.
इसके साथ ही दोनों को रिवाइल्ड रखने का प्रोसेस पूरा हुआ है और यह सफल भी रहा. यह दोनों हाड़ौती के अलग-अलग टाइगर रिजर्व में करीब डेढ़ साल से थे. इसके पहले इन्हें वन्य जीव विभाग के कार्मिकों ने रिवाइल्ड रखने के लिए काफी मेहनत की है. इन्हें अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में रखा गया था. यह दोनों प्रदेश के एकमात्र रिवाइल्ड बाघ और बाघिन हैं, जिन्हें मां टी-114 की मौत के बाद भी वन विभाग ने मेहनत कर रिवाइल्ड रखा है.
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन और फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा निर्देश पर ही इन्हें रिवाइल्ड रखने का प्रयास किया था. यह दोनों ही शावक करीब 2 साल अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में रहे. इसके बाद करीब 15 से 18 महीने इन्हें टाइगर रिजर्व एंक्लोजर में रखा गया. नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की अनुमति के बाद जंगलों में हार्ड रिलीज किया गया है. दोनों बाघ और बाघिन दूसरे अन्य टाइगर की तरह शिकार कर रहे हैं.
इसके अलावा दोनों ने अपने हार्ड रिलीज के बाद टेरिटरी भी बना ली है. पेड़ों के पंजे पर अपने टेरिटरी के निशान कर दिए हैं. अपने मलमूत्र से सीमाओं को चिन्हित कर दिया है. इसके अलावा एंक्लोजर के बाहर शिकार भी कर रहे हैं. जहां पर एमटी-7 अब तक ढाई महीने में एक दर्जन के आसपास शिकार कर चुकी है, वहीं आरवीटी-7 भी दो सप्ताह में दो शिकार कर चुका है.
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टाइगर एक्सपर्ट और पूर्व डीसीएफ दौलत सिंह शक्तावत का कहना है कि सभी प्रजातियों में नेचुरल इंस्टिंक्ट होती है. इसमें उनके जन्मजात और स्वाभाविक व्यवहार अपने आप ही आ जाते हैं. इसी के तहत यह टाइगर नेचुरल रूप से अपनी टेरिटरी बना रहे हैं और सेंट मार्किंग भी कर रहे हैं. इसी के तहत पेड़ों पर स्क्रैच भी कर रहे हैं, ताकि दूसरे टाइगर से उनका कनफ्लिक्ट नहीं हो.

3 साल चला है पूरा प्रोसेस : कोटा के डीसीएफ अनुराग भटनागर ने बताया कि 31 जनवरी 2023 को रणथंभौर टाइगर रिजर्व से दो शावको को अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया था, तब इनकी उम्र करीब 2 महीने की थी. इन्हें बायोलॉजिकल पार्क में तत्कालीन अधिकारियो की देखरेख में ह्यूमन टच से दूर रखना था. उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया. काफी कम उम्र में दोनों शावकों के होने के बावजूद भी कैमरा ट्रैप से उनकी निगरानी शुरू कर दी.
बायोलॉजिकल पार्क के स्टाफ को इनसे दूर रहकर ही मॉनिटरिंग करनी थी. अगर इन्हें हाथ लगाया जाता या ह्यूमन टच में ज्यादा रहते तो फिर यह वाइल्ड नहीं रह पाते. इनकी देखरेख के लिए पार्क प्रबंधन और पशु चिकित्सा पूरी निगरानी बनाए हुए थे. वाइल्ड एनिमल अक्सर दिन में आराम करते हैं और रात में ही वितरण करते हैं. ऐसा ही माहौल इन दोनों शावकों का शुरू से बनाया गया. इन शावकों के सब एडल्ट होने पर करीब 2 साल की उम्र होने के बाद दिसंबर 2024 में ही इन्हें अलग-अलग रिजर्व में भेजा गया.
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शिकार करना सिखाया, लेकिन बाकी सब स्वतः सीख गए : सीसीएफ सुगनाराम जाट ने बताया कि दोनों शावकों को शिकार करना सिखाया गया था. उन्हें अनटच और पूरी तरह से जंगल का माहौल दिया गया था. सबसे ज्यादा स्टाफ की भूमिका इसमें रही है. उनके लिए बायोलॉजिकल पार्क के एंक्लोजर को जंगल में तब्दील कर दिया था. शुरुआत में दोनों शावकों को दूध और अंडा दिया गया. बाद में उन्हें मीट पर शिफ्ट किया गया, जिसमें पैक्ड लेक्ट पाउडर दिया गया था. यह मिल्क पाउडर जैसा ही था.

इसके बाद छोटे-छोटे शिकार दिए, जिनमें मुर्गा या अन्य थे, जिनको मारकर उन्होंने सेवन करना शुरू किया. धीरे-धीरे वह नेचुरल तरीके से बड़े वन्य जीव के शिकार पर शिफ्ट किए गए. उन्हें जब टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया और एंक्लोजर में रखा गया, तब वहां सांभर, नील गाय, जंगली सूअर और अन्य कई शिकार उन्होंने किए हैं. अब तो भारी भरकम भैंस और बैल को भी शिकार बना लेते हैं.
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जैतपुर रेंज में बनाई टेरिटरी : इधर, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किए गए मेल बाघ आरवीटी- 8 ने अपनी टेरिटरी बनाना शुरू कर दिया है. उसने जैतपुर रेंज में अपनी टेरिटरी बनाई है. यह प्रदेश का रिवाइल्ड बाघ है, जिसे वन्यजीव विभाग ने पूरी मेहनत कर जंगली रखने का प्रयत्न किया है. अब वह जंगल में अपनी शिकार भी करने लगा है. उसने जंगल में छोड़ने के कुछ दिन में ही एक भैंस को मार गिराया है. रेडियो कॉलर से विभाग इसकी पूरी मॉनिटरिंग कर रहा है. जबकि मुकुंदरा में एमटी-8 ने अपनी टेरेटरी पहले ही स्टेब्लिश कर चुकी है.
अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में दोनों भाई-बहन को साथ रखा गया था, जहां पर उन्हें बिना बिना हाथ लागाए वन्य जीव विभाग के कार्मिकों ने शिकार करना सिखाया है. उन्हें छोटे-छोटे शिकार दिए गए और जिसे बड़े शिकार तक कितने तक पहुंचा दिए हैं. आज यह दोनों बाघ और बाघिन एक मिसाल पेश कर रहे हैं कि रिवाइल्ड रखा है. जंगल के तौर तरीके आमतौर पर अपनी मां से सीखते हैं, जिसमें यह करीब 18 से 20 महीने अपनी मां के साथ रहकर पूरी ट्रेनिंग लेते हैं, लेकिन बिना मां के उन्हें वन्य जीव विभाग ने पूरी ट्रेनिंग दी है.
इधर, एक सब एडल्ट ने भी बनाई टेरिटरी : रणथंभौर से 20 अगस्त 2023 को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में लाई गई एक बाघिन को आरवीटी-3 नाम दिया है. इसने 2024 में एक शावक को जन्म दिया था. यह करीब 2 साल का है, पहले यह मां के साथ था, लेकिन यह सब एडल्ट करीब 18 माह का है. ऐसे में एक माह से अलग रह रहा है. यह भी अपनी टेरिटरी अलग बना रहा है. करीब एक माह से वह मां से सीखे जंगल में रहने के तौर तरीकों से अपनी मौजूदगी के सबूत दे रहा है. अलग रहकर शिकार कर रहा है और जंगल में रह रहा है.

