मजदूरों के सामने आ गया खूंखार बाघ, VIDEO में देखें फिर क्या हुआ?
कैमूर में बाघ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें बाघ सड़क पर मजदूरों का रास्ता रोककर खड़ा है.

Published : January 4, 2026 at 3:20 PM IST
कैमूर: ट्रैक्टर पर सवार होकर काम करने जा रहे मजदूरों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब सामने खूंखार बाघ आ गया. सिट्टी पिट्टी गुम हो गई. हालांकि इस दौरान लोगों ने बाघ का वीडियो भी बनाया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
मजदूरों के सामने आया बाघ: यह वीडियो कैमूर के अधौरा पहाड़ी का बताया जा रहा है. वीडियो डालने वाले के मुताबिक बीते दिनों कुछ लोग ट्रैक्टर पर सवार होकर अधौरा पहाड़ी के जंगल में स्थित खेत में काम करने के लिए जा रहे थे. इसी दौरान पहाड़ी रास्ते में जंगल से निकल कर बाघ आ गया.
क्या कहता है वन विभाग?: हालांकि वन विभाग इसकी पुष्टि नहीं करता है कि यह बाघ अधौरा पहाड़ी में देखा गया है. जिला वन पदाधिकारी संजीव रंजन ने बताया कि एक वीडिय़ो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें बताया जा रहा है कि कैमूर पहाड़ी क्षेत्र में बाघ देखा गया है. उसमें एक बाघ भी दिख रहा है.
वीडियो को जांच के लिए भेजा: डीएफओ ने वीडियो की जांच के लिए वन विभाग को भेजा है. जांच के बाद चलेगा कि सच में कैमूर पहाड़ी क्षेत्र में बाघ देखा गया है या फिर झठी खबर फैलायी जा रही है. पोस्ट की जांच के बाद ही खुलासा होगा. कहा कि अगर वीडियो सत्य पाया जाता है तो विभाग आगे की प्रक्रिया अपनाएगी.
"वन विभाग की टीम के द्वारा वीडियो का सत्यापन किया जा रहा है. अगर वीडियो को सत्य पाया जाता है तो वन विभाग की टीम के द्वारा इस मामले पर कार्रवाई की जाएगी. अगर वीडियो फेक पाया जाता है तो वीडियो में टाइगर देखने वाले व्यक्ति के ऊपर गलत अफवाह फैलाने के जुर्म में कार्रवाई होगी." -संजीव कुमार, डीएफओ, कैमूर
इससे पहले भी बाघ की झूठी खबर फैली थी: बता दें कि इससे पहले भी 2025 के जून में इस तरह के वीडियो सामने आए थे, जिसमें कहा गया था कि पहाड़ी क्षेत्र में बाघ देखा गया है, लेकिन तत्कालीन डीएफओ मनीष कुमार ने वीडियो की जांच कराया तो वह फेक पाया गया. कहीं और से वीडियो लेकर सोशल मीडिया पर डाला गया था.
विंध्याचल पर्वतमाला क्षेत्र में आता है इलाका: बता दें कि यह इलाका विंध्याचल पर्वतमाला क्षेत्र में आता है. भारत के मध्य से गुजरात से बिहार तक यह पर्वतमाला फैला है. यह पहाड़ उत्तर और दक्षिण भारत में विभाजन का काम करता है. गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार को यह पहाड़ जोड़ता है.

मां विंध्यावासिनी का निवास स्थल: इस पर्वत को लेकर धार्मिक मान्यताएं भी है. यूपी 51 शक्तिपीठों में से एक मां विंध्यावासिनी का मंदिर है. मान्यता है कि महिषासुर का वध करने के बाद देवी विंध्याचल पर्वत को अपना निवास बनाया था. इस क्षेत्र में बाघ और शेर का निवास रहा है.
5 दशक पहले जाते थे बाघ: मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कैमूर हिल्स के आसपास 5 दशक पहले बाघ पाए जाते थे, लेकिन अवैध गतिविधि के कारण यह विलुप्त होने लगा. 2018 और 2019 में बाघ के पैरों के निशान और मल पाए गए थे. जांच में बाघ के होने की पुष्टि हुई थी. इसके बाद कोरोनाकाल में 2020 में एक नर बाघ को कैमरा में कैद किया गया था. इसके बाद से कोई बाघ नहीं दिखा.
कैमूर अभयारण्य को विकसित करने की योजना: बिहार में वर्तमान में इकलौता वाल्मीकि टाइगर रिजर्व है, जो पश्चिम चंपारण में स्थित है. सरकार कैमूर में अभयारण्य विकसित करने की योजना बना रही है. कैमूर में 1,504 वर्ग किलोमीटर में अभयारण्य फैला है. राष्ट्रीय़ बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने कैमूर वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व घोषित करने की मंजूदी दे दी है.
ये भी पढ़ें:

