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बाघ RVT 7 को किया आजाद, लेकिन वापस एनक्लोजर में पहुंचा, अधिकारी बोले- रास्ता पूरी तरह खुला

18 माह बाद एनक्लोजर से बाघ RVT 7 को किया आजाद, लेकिन वापस एनक्लोजर में पहुंचा. जानिए पूरा मामला...

Tiger RVT 7
एनक्लोजर से बाघ RVT 7 को किया आजाद (Source : RVT Bundi)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : June 24, 2026 at 3:44 PM IST

4 Min Read
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बूंदी: रामगढ़ टाइगर रिजर्व में करीब 18 माह से अधिक समय से एनक्लोजर में बंद बाघ RVT 7 को आखिर बूंदी स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर खुले जंगल में आजादी मिल ही गई. बाघ के जंगल में छोड़ने को लेकर पिछले कई माह से एनटीसीए से निर्देश नहीं मिलने से बाघ की आजादी पर एनक्लोजर में कैद था.

हालांकि, गत 7 जून को मुख्य वन संरक्षक सहित विभाग के अन्य उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में बाघ को जंगल में प्राकृतिक आवास में छोड़ने के लिए बाघ को रेडियो कॉलर पहनाया गया था, उसके बाद से कभी भी बाघ के खुले जंगल में छोड़ने के कयास लगाए जा रहे थे. मंगलवार शाम पूरे प्रोटोकॉल के तहत बाघ को एनक्लोजर से खुले जंगल में रिलीज करने के लिए रीवाइल्डिंग एनक्लोजर के दरवाजे खोले गए, लेकिन बाघ एक बार बाहर निकल कर वापस एनक्लोजर में लौट गया.

फिलहाल, बाघ एनक्लोजर में ही मौजूद है. उधर कोटा के मुख्य वन संरक्षक सुगना राम जाट ने बताया कि 23 जून की शाम रामगढ़ विषधारी के विशेष रीवाइल्डिंग एनक्लोजर के दरवाजे खोले गए. शाम 6.15 बजे आजादी का रास्ता खुलने के बाद बाघ ने रात करीब 10 बजे दो बार बाहर निकलने का प्रयास किया. कुछ देर के लिए वह एनक्लोजर से बाहर भी आया, लेकिन नए माहौल को परखने के बाद वापस भीतर लौट गया. जाट ने बताया कि फिलहाल बाघ एनक्लोजर के भीतर ही है. हालांकि, उसके लिए रास्ता पूरी तरह खुला है और किसी भी समय वह जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकता है.

पढ़ें : 18 माह से RVTR के एनक्लोजर में बंद बाघ RVT-7 को मिलेगी आजादी, प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी

मां से बिछड़ कर अनाथ हो गया था बाघ : कोटा के मुख्य वन संरक्षक सुगना राम जाट ने बताया कि करीब दो साल पहले जो बाघ शावक अपनी मां से बिछड़कर असमय अनाथ हो गया था, वह अब फिर से जंगल की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की दहलीज पर खड़ा है. राजस्थान वन विभाग ने रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में पुनर्वासित नर बाघ RVT 7 को प्राकृतिक आवास में मुक्त कर वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ दिया.

RVT 7 रणथम्भौर की बाघिन T-114 का शावक है. लगभग दो से तीन माह की उम्र में मां से बिछड़ने के बाद उसके सामने जीवन का संकट खड़ा हो गया था. वन विभाग की टीम ने उसे रेस्क्यू कर कोटा के अभेड़ा जैविक उद्यान पहुंचाया, जहां उसकी देखभाल शुरू हुई. सामान्य चिड़ियाघर की परवरिश से अलग, इस शावक को जंगल में लौटाने की तैयारी के साथ पाला गया. करीब 22 माह तक विशेषज्ञों की निगरानी में उसे प्राकृतिक शिकार करने, जंगल में रहने और आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण दिया गया. उसके व्यवहार, स्वास्थ्य और शिकार क्षमता का लगातार मूल्यांकन किया जाता रहा.

18 माह पूर्व एनक्लोजर में किया था शिफ्ट : कोटा के मुख्य वन संरक्षक सुगना राम जाट ने बताया कि 5 दिसंबर 2024 को बाघ को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के पांच हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित विशेष रीवाइल्डिंग एनक्लोजर में स्थानांतरित किया था. यहां उसे लगभग पूरी तरह प्राकृतिक परिस्थितियों में रखा गया, ताकि वह जंगल के वातावरण में खुद को ढाल सके.

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पिछले डेढ़ वर्ष में उसके शिकार कौशल और व्यवहारिक क्षमताओं की गहन निगरानी की गई. उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की अनुशंसाओं और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की मंजूरी के बाद उसे जंगल में छोड़ने का फैसला लिया गया. 7 जून को उसके गले में GPS-VHF रेडियो कॉलर लगाया गया, जिससे उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके.

बाघ की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर, टीम तैनात : रामगढ़ टाइगर रिजर्व के डीएफओ अरुण कुमार डी का कहना है कि बाघ का एनक्लोजर से बाहर आकर फिर लौट जाना उसके स्वाभाविक व्यवहार का हिस्सा है. नए क्षेत्र में जाने से पहले बाघ आसपास के वातावरण का आकलन करता है और पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही स्थायी रूप से अपना क्षेत्र तय करता है. बाघ की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. GPS-VHF रेडियो कॉलर, रेडियो टेलीमेट्री, कैमरा ट्रैप और फील्ड स्टाफ की मदद से उसकी गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है. इसके लिए विशेष मॉनिटरिंग टीम और त्वरित प्रतिक्रिया दल भी तैनात किए गए हैं.