चिल्फी वन क्षेत्र के गांवों में बाघ की धमक, मवेशियों को बना रहा शिकार, ग्रामीणों में दहशत
कवर्धा के चिल्फी इलाके में इन दिनों बाघ की दहशत है. वन विभाग अलर्ट पर है. महबूब खान की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : September 1, 2026 at 5:20 PM IST
कबीरधाम: कबीरधाम जिले के चिल्फी वन क्षेत्र में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी सामने आने से ग्रामीणों में डर और दहशत का माहौल है. बरेंडीपानी गांव के पास एक नर बाघ ने मवेशी का शिकार किया है. घटना के बाद वन विभाग ने इलाके में कैमरा ट्रैप लगाए हैं, जिनमें बाघ की तस्वीरें लगातार कैद हो रही हैं.
दहशत में ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि बाघ अक्सर गांव के आसपास दिखाई देता है. कई बार उसकी दहाड़ की आवाज भी आसानी से सुनाई देती है. इसके चलते वनांचल क्षेत्र के ग्रामीण दिन में जंगल की ओर मवेशी चराने जाने और रात के समय घरों से बाहर निकलने में भी भय महसूस कर रहे हैं.
कैमरे में कैद हुआ शिकार करता बाघ
डीएफओ निखिल अग्रवाल ने बताया कि बरेंडीपानी इलाके में बाघ द्वारा एक गाय का शिकार किया गया है. खास बात यह है कि गाय का शिकार करते हुए बाघ वन विभाग के कैमरा ट्रैप में कैद हुआ है.
चिल्फी के बरेंडीपानी का मामला है. कान्हा से लगा हुआ एरिया है. अविभाजित मध्यप्रदेश के समय चिल्फी कान्हा का बफर जोन था. उस एरिया में बाघ की आवक जावक रहती है. कैमरा ट्रेप में बाघ की पुष्टि हुई है-निखिल अग्रवाल, डीएफओ, कवर्धा
कवर्धा वन विभाग की अपील
बाघ की तस्वीर सामने आने के बाद वन विभाग ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है. आसपास के गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की गई है.बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए क्षेत्र में अतिरिक्त कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं. वन विभाग ने ग्रामीणों से जंगल की ओर अकेले नहीं जाने, मवेशियों को चराने के दौरान सतर्क रहने और रात के समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है.
हम मुनादी कराते हैं. अनावश्यक जल्दी सुबह या देर रात जंगल में अकेले ना जाएं. पर्याप्त रोशनी रखें. डंडा लेकर जाएं. लोगों के साथ जाएं-निखिल अग्रवाल, डीएफओ, कवर्धा
भोरमदेव क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी
कबीरधाम जिले का भोरमदेव अभयारण्य कान्हा टाइगर रिजर्व से लगा हुआ है. लंबे समय से कान्हा क्षेत्र से बाघ-बाघिनों की आवाजाही भोरमदेव अभ्यारण्य तक होती रही है. पहले बाघिन प्रजनन और शावकों को जन्म देने के दौरान इस क्षेत्र में आती थी. कुछ समय बाद वापस कान्हा लौट जाती थी.
पिछले कुछ समय से बाघ-बाघिन का एक परिवार दो शावकों के साथ भोरमदेव अभयारण्य में ही लगातार विचरण कर रहा है. अब शावक भी बड़े हो चुके हैं. क्षेत्र में बाघों की लगातार मौजूदगी और शिकार की घटनाएं सामने आती रहती हैं.
मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की चिंता
कुछ महीने पहले सूपखार के जंगल में एक चरवाहे पर बाघ के हमले की घटना सामने आई थी. चरवाहा अपने मवेशियों को चराने जंगल गया था, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटा. परिजनों द्वारा तलाश किए जाने पर जंगल में उसका शव मिला था. इस घटना के बाद ग्रामीणों में जंगल जाने को लेकर भय और बढ़ गया है.
कान्हा में बढ़ती बाघों की संख्या भी एक वजह
जानकारों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है. क्षेत्र में बाघों के बीच वर्चस्व को लेकर संघर्ष की घटनाएं भी सामने आती रही हैं. ऐसे में कुछ बाघ नए क्षेत्र की तलाश में भोरमदेव अभयारण्य की ओर पहुंच रहे हैं.
भोरमदेव का जंगल बाघ और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास माना जाता है. यहां पानी और पर्याप्त वन्यजीवों की मौजूदगी के कारण बाघों को भोजन भी उपलब्ध हो जाता है.

