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तीन साल के बच्चे को हुआ लिवर कैंसर, डॉक्टरों ने 7 घंटे में बचा दी जिंदगी!

अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस पर एम्स पटना में ऐतिहासिक सर्जरी हुई. तीन वर्षीय बच्चे के लिवर कैंसर का सफल ऑपरेशन किया गया. पढ़ें

LIVER CANCER
कॉसेप्ट फोटो (GETTY IMAGES)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 16, 2026 at 1:40 PM IST

5 Min Read
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पटना : अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस पर पटना एम्स के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने हेपाटोब्लास्टोमा से पीड़ित तीन वर्षीय बच्चे की जटिल लिवर सर्जरी कर उसकी जान बचा ली. यह ऑपरेशन न केवल तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था, बल्कि इसमें बच्चे में मौजूद जन्मजात विसंगतियों का भी एक साथ इलाज किया गया, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया.

हेपाटोब्लास्टोमा है लिवर कैंसर : डॉक्टरों के अनुसार, हेपाटोब्लास्टोमा बच्चों में पाया जाने वाला एक दुर्लभ लेकिन तेजी से फैलने वाला लिवर कैंसर है. समय पर पहचान और उपचार न होने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है. बच्चे को लंबे समय से पेट में सूजन, दर्द और कमजोरी की शिकायत थी. जांच के दौरान अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और अन्य परीक्षणों से पुष्टि हुई कि बच्चे के लिवर में बड़ा ट्यूमर विकसित हो चुका है. इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने सर्जरी को ही सबसे उपयुक्त विकल्प माना.

7 घंटे चला ऑपरेशन : डॉ सौरभ ने बताया कि यह सर्जरी करीब सात घंटे तक चली, जिसे चिकित्सकीय भाषा में राइट हेपेटेक्टॉमी (Right Hepatectomy) कहा जाता है. ऑपरेशन के दौरान बच्चे के लिवर के पूरे दाहिने हिस्से को सुरक्षित रूप से निकाल दिया गया, ताकि कैंसरग्रस्त ऊतक पूरी तरह हटाया जा सके. कहा कि इस तरह की सर्जरी अत्यंत जटिल मानी जाती है, क्योंकि लिवर अत्यधिक रक्त आपूर्ति वाला अंग होता है और थोड़ी सी भी लापरवाही जानलेवा रक्तस्राव का कारण बन सकती है.

बच्चे में थी जन्मजात विसंगतियां : डॉ सौरभ के अनुसार इस मामले को और जटिल बनाने वाली बात यह थी कि बच्चे में जन्मजात विसंगतियां भी पाई गई थीं. जांच में सामने आया कि उसे मेकल्स डाइवर्टिकुलम (Meckel's Diverticulum) और इंगुइनल हर्निया (Inguinal Hernia) की समस्या भी थी.

''आमतौर पर इन स्थितियों के लिए अलग-अलग सर्जरी करनी पड़ती है, लेकिन डॉक्टरों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने एक ही ऑपरेशन में तीनों समस्याओं का इलाज करने का निर्णय लिया. सर्जिकल टीम ने न केवल ट्यूमर को हटाया, बल्कि मेकल्स डाइवर्टिकुलम और इंगुइनल हर्निया का भी सफल उपचार किया.''- डॉ सौरभ

चुनिंदा केंद्रों में ही होती है ऐसी जटिल सर्जरी : डॉ अमित सिंह ने कहा कि इस तरह की जटिल सर्जरी देश के चुनिंदा विशेष केंद्रों में ही संभव हो पाती है, क्योंकि इसके लिए बाल कैंसर सर्जरी में उच्च स्तर की विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और समन्वित टीमवर्क की आवश्यकता होती है. इस ऑपरेशन में पीडियाट्रिक सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और नर्सिंग स्टाफ ने मिलकर काम किया.

''ऑपरेशन से पहले बच्चे की कीमोथेरेपी और अन्य जरूरी तैयारियां भी की गई थीं, ताकि सर्जरी के दौरान जोखिम कम से कम हो. सर्जरी के बाद बच्चे को गहन चिकित्सा इकाई में निगरानी में रखा गया. फिलहाल उसकी हालत स्थिर है और उसमें तेजी से सुधार हो रहा है.''- डॉ अमित सिंह

बच्चे की होगी नियमित फॉलो अप : अस्पताल प्रशासन का कहना है कि आगे की उपचार प्रक्रिया में नियमित फॉलो-अप और आवश्यकतानुसार कीमोथेरेपी शामिल होगी, ताकि कैंसर की पुनरावृत्ति की संभावना को कम किया जा सके. डॉक्टरों का मानना है कि समय पर सर्जरी होने से बच्चे के स्वस्थ जीवन की संभावना काफी बढ़ गई है.

अस्पताल प्रशासन ने इस सफलता को टीमवर्क का परिणाम बताया है और कहा है कि यह उपलब्धि बिहार में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की क्षमता को दर्शाती है. डॉक्टरों ने अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के अवसर पर यह संदेश भी दिया कि बच्चों में कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. पेट में लगातार सूजन, वजन कम होना, भूख न लगना और असामान्य दर्द जैसे संकेत दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है. समय पर जांच और सही उपचार से बच्चों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर भी काबू पाया जा सकता है.

डॉक्टरों की बड़ी टीम रही शामिल : यह सफल ऑपरेशन पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की टीम द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. अमित कुमार सिन्हा, डॉ. सौरव श्रीवास्तव, डॉ. अमित कुमार, डॉ. राशि, डॉ. दिगंबर चौबे और डॉ. गौरव शामिल रहे. इसके अलावा गैस्ट्रोसर्जरी विभाग से डॉ. उत्पल आनंद और डॉ. बसंत जबकि पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया से डॉ. चांदनी शामिल रही. विशेषज्ञों की लंबी टीम के लिए तकनीकी रूप से यह सर्जरी बहुत ही चुनौती पूर्ण रही.

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