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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव दोहरी मतदाता सूची मामला, फिर होगा बड़ा एक्शन, जानिये अपडेट

पंचायत चुनाव दोहरी मतदाता सूची मामले में शक्ति सिंह बर्तवाल ने लंबित पड़े मामलों पर एक्शन लेने की बात कही है.

NAINITAL HIGH COURT
त्रिस्तरी पंचायत चुनाव (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : April 30, 2026 at 2:01 PM IST

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देहरादून: त्रिस्तरी पंचायत चुनाव को लेकर शक्ति सिंह बर्तवाल ने जुलाई महीने में हाईकोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल की थी. जिसके बाद 11 जुलाई को हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश आए. जिसमें कहा गया था कि एक से अधिक मतदाता सूची वाले प्रत्याशी त्रिस्तरी पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते हैं. राज्य निर्वाचन आयोग को भी इसकी सूचना दी गई.

हाईकोर्ट के निर्णय की पालना के लिए राज्य निर्वाचन आयोग से आग्रह किया गया था. राज्य निर्वाचन आयोग ने इस निर्णय को नहीं मानते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जिसमें 11 जुलाई के निर्णय को स्थगित करने की बात कही. सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस निर्णय को यथावत रखा.

देहरादून प्रेस क्लब में शक्ति सिंह ने कहा हाल ही में धारी नैनीताल की ग्राम पंचायत भदरेठ और चंपावत की शक्तिपुरबुंगा जिला पंचायत सीट पर हुए ऐतिहासिक निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है. उन्होंने मामले पर प्रकाश डालते हुए कहा नैनीताल(धारी) एसडीएम अंशुल भट्ट की कोर्ट ने भदरेठ की ग्राम प्रधान आशा मटियाली का निर्वाचन रद्द कर दिया है. उन्होंने बताया जांच में पाया गया कि उनका नाम दो जगह की मतदाता सूची में दर्ज था. कोर्ट ने दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी निर्मल सिंह को प्रधान घोषित करने का आदेश दिया.

शक्ति सिंह ने कहा चंपावत में जिला जज अनुज कुमार संगल की कोर्ट ने जिला पंचायत सदस्य कृष्णानंद जोशी का चुनाव शून्य घोषित कर दिया. जोशी का नाम पल्सौं ग्राम पंचायत और चंपावत पालिका के नागनाथ वार्ड, दोनों जगह दर्ज था. उन्होंने कहा लोकतंत्र की पवित्रता पर संकट और न्यायिक हस्तक्षेप उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम 2016 स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि कोई भी व्यक्ति एक से अधिक मतदाता सूची में दर्ज नहीं हो सकता है. उसके बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग के कार्य प्रणाली के कारण कई अपात्र लोगों ने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. जिसके पास हाई कोर्ट के 11 जुलाई के ऐतिहासिक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी.

शक्ति सिंह ने कहा सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग के तर्कों को खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आप वैधानिक प्रावधानों के विपरीत निर्णय कैसे ले सकते हैं ? यह टिप्पणी संवैधानिक संस्थाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है. उन्होंने कहा न्याय में देरी पर चिंता वर्तमान में उत्तराखंड की विभिन्न जिला अदालतों में इस मामले से संबंधित लगभग 1200 चुनावी याचिकाएं लंबित पड़ी हुई हैं. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद इन मामलों में अपेक्षित गति नहीं दिख रही है.

शक्ति सिंह ने कहा वह इस मामले को लेकर न्यायालय जा रहे हैं. उनका यह भी कहना है कि हम एक बार फिर हाई कोर्ट की शरण में जा रहे हैं. जिससे 11 जुलाई के आदेश को प्रभावी रूप से लागू कराया जा सके. उनका कहना है कि हाईकोर्ट में राज्य निर्वाचन आयुक्त और सेक्रेटरी के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल करने जा रहे हैं. इनके कृत्यों से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में असर पड़ा. हम किसी भी प्रत्याशी को दोषी इसलिए नहीं मानते हैं,चूंकि नॉमिनेशन को निरस्त करने का अधिकार रिटर्निंग अधिकारी और राज्य निर्वाचन आयुक्त के दिशा निर्देशों पर होता है. दोनों ने ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया. इसलिए वह अवमानना याचिका दाखिल करने जा रहे हैं.

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