अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट टूर्नामेंटः झारखंड के तीन खिलाड़ी श्रीलंका में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व
अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए भारतीय टीम में झारखंड के तीन खिलाड़ियों का चयन हुआ है.

Published : November 9, 2025 at 4:36 PM IST
रांचीः झारखंड के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. झारखंड राज्य के तीन दिव्यांग क्रिकेटर पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं. यह खिलाड़ी श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट महासंग्राम में हिस्सा लेंगे, जो 13 नवंबर से 17 नवंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा.
इन खिलाड़ियों में रामगढ़ के अतहर अली, बोकारो के महावीर मोदी और साहिबगंज के नाजिर शामिल हैं. तीनों खिलाड़ी झारखंड राज्य दिव्यांग क्रिकेट टीम के नियमित सदस्य रहे हैं और अपने प्रदर्शन के दम पर राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है. अब ये खिलाड़ी भारतीय टीम का हिस्सा बनकर श्रीलंका की धरती पर तिरंगा लहराने को तैयार हैं.
तीनों खिलाड़ी रांची रेलवे स्टेशन से रवाना होकर चेन्नई पहुंचेंगे, जहां से वे हवाई मार्ग से कोलंबो के लिए उड़ान भरेंगे. रवाना होने से पहले रेलवे स्टेशन पर परिवारजनों, खेल प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इन खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं. कई लोगों ने कहा कि यह पल न केवल खिलाड़ियों के लिए, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गौरव का क्षण है.
राज्य दिव्यांग क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि झारखंड के इन खिलाड़ियों ने पिछले वर्षों में कई राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन किया है. रामगढ़ के अतहर अली को उनकी गेंदबाजी के लिए जाना जाता है, जबकि बोकारो के महावीर मोदी एक बेहतरीन ऑलराउंडर हैं. साहिबगंज के नाजिर अपनी तेजतर्रार फील्डिंग और सटीक बल्लेबाजी के लिए मशहूर हैं.
संघ के सचिव ने कहा कि यह उपलब्धि दिखाती है कि अगर मन में जज्बा हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती. इन खिलाड़ियों ने साबित किया है कि सीमाएं केवल शरीर की नहीं, सोच की होती हैं.
टीम चयन की घोषणा के बाद पूरे झारखंड में खुशी की लहर दौड़ गई है. सोशल मीडिया पर खेल प्रेमी लगातार बधाइयां दे रहे हैं. रांची, रामगढ़, बोकारो और साहिबगंज में स्थानीय संगठनों ने जश्न भी मनाया. स्कूलों और कोचिंग सेंटर्स में इन खिलाड़ियों की सफलता को प्रेरणा के रूप में साझा किया जा रहा है.
इन खिलाड़ियों की कहानी न केवल संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है, बल्कि यह उन तमाम युवाओं के लिए संदेश भी है जो किसी न किसी कारणवश खुद को सीमित महसूस करते हैं. झारखंड के ये तीन सपूत यह साबित करने जा रहे हैं कि अगर मेहनत और लगन हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता.
झारखंड के खेल प्रेमियों की उम्मीद है कि श्रीलंका की सरजमीं पर यह तिकड़ी न सिर्फ बेहतरीन प्रदर्शन करेगी, बल्कि भारत का परचम लहराकर राज्य का नाम भी रोशन करेगी.
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