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दवा में नुकसान हुआ तो Banned Drug, बिना लाइसेंस चला रहे थे फैक्ट्री

गुजरात एटीएस, राजस्थान एसओजी और भिवाड़ी पुलिस ने की छापेमारी.

accused was found with materials for making counterfeit medicines.
नकली दवा बनाने की सामग्री के साथ आरोपी (ETV Bharat Bhiwadi)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : December 29, 2025 at 6:46 PM IST

4 Min Read
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जयपुर: राजधानी जयपुर से करीब 200 किलोमीटर दूर भिवाड़ी की एक फैक्ट्री में नकली दवाएं बनाई जा रही थी. इसकी भनक गुजरात एटीएस को लगी तो गुजरात एटीएस, राजस्थान एसओजी और पुलिस ने छापेमारी की. छापेमारी में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. फैक्ट्री में नींद की प्रतिबंधित दवाएं बनाई जा रही थी. इन्हें गुजरात के रास्ते विदेश तक सप्लाई करने की जानकारी मिली है. फिलहाल पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. दो अन्य लोगों के नाम भी पूछताछ में सामने आए हैं. माना जा रहा है कि इस मामले की जांच में आगे कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं.

गुजरात एटीएस को मिली पुख्ता जानकारी: जयपुर रेंज आईजी एचजीआर सुहासा ने बताया कि खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी के इंडस्ट्रियल एरिया में एक फैक्ट्री में अवैध रूप से प्रतिबंधित श्रेणी की दवा बनाने की जानकारी गुजरात एटीएस को मिली थी. गुजरात एटीएस और राजस्थान एसओजी ने पुलिस को इसकी जानकारी दी और संयुक्त अभियान चलाकर छापे मारे. इसमें आगरा निवासी अंशुल, भदौही निवासी अखिलेश और बनारस निवासी कृष्णा को गिरफ्तार किया. अखिलेश और अंशुल केमिकल इंजीनियर और व्यवसायी हैं. उन्होंने केमिस्ट कृष्णा को अपने साथ रखा था.

जानकारी देते एचजीआर सुहासा, आईजी, जयपुर रेंज (ETV Bharat)

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हाइड्रोक्विनाइन टैबलेट के लिए मांगा लाइसेंस: पड़ताल में सामने आया कि आरोपी भिवाड़ी में करीब 3500 वर्गमीटर की जगह किराए पर ली थी. जहां उन्होंने हाइड्रोक्विनाइन टैबलेट बनाने का काम शुरू किया. उन्होंने एपीएल फार्माकेस के नाम से कंपनी बनाकर ड्रग कंट्रोलर से लाइसेंस लेने का प्रयास किया, लेकिन लाइसेंस नहीं मिला. उन्होंने जो सेटअप बनाया था, उसे अन्य दवा ब्रोमोप्रोपेन बनाने के लिए इस्तेमाल किया. यह दवा बनाकर सप्लाई भी की. यह दवा प्रतिबंधित श्रेणी में नहीं आती है.

दो लोगों ने ऑर्डर देकर बनवाई प्रतिबंधित दवा: उन्होंने बताया कि सामान्य श्रेणी की दवा बनाने के काम में जब अखिलेश और अंकुश को नुकसान होने लगा तो इनसे दो लोगों ने संपर्क किया. जिन्होंने इनसे इसी सेटअप में अल्प्राजोलम दवा का पाउडर बनाने का ऑर्डर दिया, जो प्रतिबंधित श्रेणी में आता है. प्राथमिक अनुसंधान में सामने आया कि आरोपियों ने तीन बार अल्प्राजोलम की सप्लाई की. इसका एक बैच बनाने में 11 दिन लगते हैं. उनका कहना है कि इस मामले में शामिल दो अन्य लोगों के बारे में पुलिस पूछताछ और अनुसंधान कर रही है.

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40-50 लाख रुपए किलो है कीमत: पड़ताल में सामने आया कि अखिलेश और अंशुल ने केमिस्ट कृष्णा यादव को अपने साथ मिला लिया. उनका कहना है कि फैक्ट्री से 21 किलो 100 ग्राम पाउडर जब्त किया है. इसमें साढ़े चार किलो अल्प्राजोलम पाउडर है, जबकि बाकी अन्य सामग्री है. इसमें आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है. उनका कहना है कि आरोपी जो प्रतिबंधित दवा बना रहे थे, उसका इस्तेमाल एंजाइटी कम करने के लिए होता है. साथ ही मनोविज्ञान से जुड़ी दवाएं बनाने में भी इसका उपयोग होता है. एक किलो पाउडर की कीमत 40-50 लाख रुपए होती है.

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सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी पुलिस: उन्होंने बताया कि आरोपी अंशुल और अखिलेश बिजनेसमैन हैं, जो फार्मास्युटिकल व केमिकल इंडस्ट्री में काम कर चुके हैं. इन्होंने हाइड्रोक्विनोन टैबलेट्स बनाने के लिए नई फैक्ट्री शुरू की थी. इसका उपयोग प्रतिबंधित श्रेणी का अल्प्राजोलम पाउडर बनाने में किया जाने लगा. उनका कहना है कि आरोपियों ने अब तक कहां-कहां प्रतिबंधित दवा की सप्लाई की है, इसे लेकर पड़ताल जारी है. फिलहाल, जिन दो लोगों ने उन्हें प्रतिबंधित दवा बनाने का ऑर्डर दिया. पुलिस उन्हें तलाश रही है. उनकी गिरफ्तारी और पूछताछ में सामने आएगा कि बनाया गया पाउडर कहां-कहां सप्लाई किया है. उनकी गिरफ्तारी में इस नेटवर्क से जुड़े कई और लोगों के नाम सामने आने की संभावना है.

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उधर, भिवाड़ी एसपी प्रशांत किरण ने बताया कि पकड़े गए तीनों लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड देखा जा रहा है. पुलिस पूछताछ में घरेलू विवाद सामने आए हैं. मादक पदार्थ की सप्लाई चेन का पता लगा रहे हैं.