साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा, तीन दोस्तों ने 16 राज्यों में APK फाइल से फोन हैक कर 3 करोड़ ठगे
मोबाइल फोन हैक कर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश,16 राज्यों में करीब 3 करोड़ रुपए की 94 साइबर ठगी घटनाओं का खुलासा

Published : March 3, 2026 at 8:55 PM IST
नई दिल्ली/गाजियाबाद : गाजियाबाद की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एपीके फाइल के माध्यम से मोबाइल फोन हैक कर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने पिंटू कुमार, आदर्श कुमार और प्रशांत दीप समेत कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. 16 राज्यों में करीब 3 करोड़ रुपए की 94 साइबर ठगी की घटनाओं का खुलासा हुआ है. गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 12 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और 8 सिम कार्ड समेत एक कर बरामद हुई है.
फोन हैकर ने साइबर फ्रॉड की ट्रेनिंग दोस्त से ली
पुलिस के मुताबिक, आदर्श कुमार ने फोन हैकर साइबर फ्रॉड करने की ट्रेनिंग अपने दोस्त अभिषेक कुमार से ली थी. अभिषेक कुमार मूल रूप से झारखंड के घोरमारा का रहने वाला है. अभिषेक ने आदर्श को विभिन्न प्रकार की एपीके फाइल भेज कर साइबर फ्रॉड करने के बारे में बताया था. अभिषेक से ट्रेनिंग लेने के बाद पिंटू, आदर्श और प्रशांत एपीके फाइल लोगों के मोबाइल में व्हाट्सएप के माध्यम से भेजा करते थे और फिर फोन हैक कर लेते थे. पिंटू, आदर्श और प्रशांत आपस में दोस्त हैं.
गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध "गर्लफ्रेंड नंबर ऐप" का प्रयोग
साइबर फ्रॉड करने के लिए लोगों के कांटेक्ट नंबर लेने के लिए गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध "गर्लफ्रेंड नंबर ऐप" का प्रयोग किया जाता था. "गर्लफ्रेंड नंबर ऐप" के माध्यम से हजारों की संख्या में लोगों के मोबाइल नंबर मिलते थे. पिंटू, आदर्श और प्रशांत मिलकर बिहार के जमुई निवासी पंकज कुमार यादव से प्रति सिम ₹1200 के हिसाब से सिम खरीद करते थे. सिम खरीदने के बाद नए नंबर से व्हाट्सएप इंस्टॉल करते और एपीके फाइल भेजने का काम शुरू हो जाता.
टेलीग्राम के माध्यम से एपीके फाइल खरीदी जाती
टेलीग्राम के माध्यम से लोगों के फोन हैक करने के लिए एपीके फाइल खरीदी जाती थी. लोग जैसे ही मोबाइल फोन में एपीके फाइल इंस्टॉल करते थे उनके मोबाइल फोन का एक्सेस इन तीनों दोस्तों के पास पहुंच जाया करता था. मोबाइल फोन का एक्सेस हासिल करने के बाद पहले से साइबर फ्रॉड के लिए व्यवस्थित किए गए बैंक खातों में मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से पैसे ट्रांसफर किए जाते थे. बैंक खातों में ट्रांसफर होने के बाद पैसों को बराबर तीनों आपस में बांट लिया करते थे.
एपीके फाइल का नाम सरकारी विभागों के नाम पर
लोगों को किसी प्रकार का शक ना हो इसीलिए यह एपीके फाइल का नाम विभिन्न बैंकों के नाम, और सरकारी विभागों के नाम पर रखा करते थे. जैसे की आरटीओ ट्रैफिक चालान, parivahan.apk आदि. ताकि लोगों को लगे की एपीके फाइल सरकारी सेवा से संबंधित है और इसी विश्वास में लोग इस फाइल को अपने मोबाइल फोन में इंस्टॉल कर लिया करते थे.
डीसीपी सीटी ने दी मामले की जानकारी
डीसीपी सीटी धवल जायसवाल के मुताबिक, गाजियाबाद के मोदीनगर के रहने वाले डॉक्टर श्रवण कुमार के साथ उनके मोबाइल फोन पर व्हाट्सएप के माध्यम से एपीके फाइल भेज कर 10 फरवरी से 19 फरवरी के बीच फ्रॉड किया गया था. बैंक खाते को हैक कर तकरीबन 32 लाख रुपए विभिन्न खातों में ठगों द्वारा ट्रांसफर कर लिए गए. मामले को गंभीरता से लेते हुए वादी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी.
व्हाट्सएप पर भेजी गई एप्लीकेशन को इंस्टॉल करने से बचें
साइबर फ्रॉड की घटना करने वाले झारखंड और बिहार के रहने वाले पिंटू कुमार, आदर्श कुमार और प्रशांत दीप को थाना विजयनगर से गिरफ्तार किया गया है. साहिल और पंकज यादव अभी फरार हैं जिनकी गिरफ्तारी के लिए टीम लगी हुई हैं. आरोपियों की गिरफ्तारी से तकरीबन 3 करोड रुपए की ठगी की करीब 94 घटनाओं का खुलासा हुआ है. व्हाट्सएप पर भेजी गई किसी भी एप्लीकेशन को फोन में इंस्टॉल करने से बचें ताकि इस तरह के फ्रॉड से बचा जा सके.
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