छत्तीसगढ़ के आंगन का नया साज, पूरी धरा पर सजे विकास का राग, इस होली जलकर खत्म हो नक्सलवाद
31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन रखी गई है. रेड कॉरिडोर छोड़ने वाले नक्सलियों का रेड कॉर्पेट पर स्वागत हो रहा है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : March 2, 2026 at 8:56 PM IST
भूपेंद्र दुबे की रिपोर्ट
रायपुर: "महके जो दिगंत तो समझो बसंत है". बसंत के ये राग प्रकृति की उस ऊर्जा को बताती हैं, जिससे हर बार नए जीवन का संचार होता है. धरती का हर हिस्सा हरियाली को अपने भीतर संजोए नए कलेवर में उस अध्याय को लिखती है, जिससे नई अवधारणाएं पुष्पित पल्लवित होती हैं.
सुंदर धार हरियाली को सजा कर एक ऐसी वसुंधरा बनाती है, जहां इस मौसम में प्रेम का संचार सबसे ऊपर होता है. इस बार छत्तीसगढ़ भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में नए संकल्प को गढ़ रहा है, या यूं कहें कि इस होली के बाद एक ऐसे अध्याय को लिखने जा रहा है, जिसमें जिस नक्सल के नासूर का दंश दशकों तक छत्तीसगढ़ ने झेल है. इस बार नक्सलवाद को इसी होलिका में जला देना है. जिसमें नक्सलवाद का वह नासूर जो जंगल में लोगों को जाने से डराता था, व्यवस्था विकास वाली जो उस राह पर जाने से डराती थी, विकास का वह लोक जो जनता की उम्मीदों का होता है, किसी और डगर पर था. यह सब कुछ नए कलेवर में खुद को हरे रंग में सजा अब उसे लाल सलाम की तरफ नहीं जाएगा, बल्कि लाल रंग ऐसी जगह होगा जिस पर चलने के लिए पुष्पों की बरसात होगी. लेकिन वह विकास के नए अध्याय को जोड़ेगा, नई परिकल्पना को संकल्पित और संचारित करेगा.
नक्सलवाद की होलिका का होगा दहन
होली नई ऊर्जा, क्षमा और मिला-जुलकर आगे चलने की प्रेरणा देता है. वेदों में जो होली संबंधी मंत्र मिलते हैं, वे हमें याद दिलाते हैं कि मनुष्य, प्रकृति और पूरा ब्रह्मांड, सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. वेद हमें तीन बड़ी बातें सिखाती हैं. पहला, प्रकृति का सम्मान-धरती, बारिश, फसल, पेड़-पौधे, ये सब हमारे साथी हैं. दूसरी, मेहनत की पवित्रता, बीज बोना, फसल काटना, जानवरों की देखभाल करना ये केवल काम नहीं, पूजा के बराबर हैं. तीसरी, जीवन का चक्र- सर्दी के बाद गर्मी, अंधेरे के बाद प्रकाश, दुख के बाद सुख हर चीज बदलती है.
नक्सलवाद के नासूर को करना है जलाकर राख
प्रकृति के इस पूरे स्वरूप को छत्तीसगढ़ ने अपने आंगन में सजा रखा है. जीवन का हर चक्र छत्तीसगढ़ में पूरा जीवंत है. चाहे धरती की बात हो, बारिश की बात हो, पानी की बात हो या जंगल की बात हो, यही छत्तीसगढ़ है इसी से छत्तीसगढ़ बना है. लेकिन इस बने हुए छत्तीसगढ़ में एक बिगड़ी हुई व्यवस्था नक्सल के नासूर की थी, जो इस बार की होली में जलानी है. एक शपथ 31 मार्च 2026 का लिया गया है, इसके बाद छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा. कहने का तात्पर्य यह भी है कि 2027 में जब बसंत आएगा और उस बार की होली जलेगी, तो उसमें नक्सलवाद का ना तो नाम होगा ना नक्सलवाद छत्तीसगढ़ में होगा. हरी भरी धरती, हरियाली और विकास के उस सोपान को समेटे अपने लोगों को आगे ले जाने का काम करेगी और छत्तीसगढ़ का दामन विकास के इसी बुनियाद का आधार बनेगा.
रेड कॉरिडोर से रेड कॉरपेट
छत्तीसगढ़ जो कभी रेड कॉरिडोर के नाम से जाना जाता था और इस कॉरिडोर में जाने वाले लोग संविधान के समानांतर सत्ता चलाते थे, अब रेड कार्पेट पर चल रहे हैं. ग्रीन कॉरिडोर का एक नया अध्याय छत्तीसगढ़ में शुरू हो रहा है. यह छत्तीसगढ़ की विकास की वह हरियाली है, जो मानव विकास से लेकर अर्थव्यवस्था के विकास की ऐसी आधारभूत संरचना है, जो आगे आने वाले समय में बदलते छत्तीसगढ़ की बड़ी बुनियाद गढ़ेगी. इसकी शुरुआत इसी बार की होली में होना है. जब रेड कॉरिडोर का बचा-खुचा जो कुछ है, सब कुछ बटोर कर इसी जलने वाली होलिका में जला देना है. यहां से एक विकसित छत्तीसगढ़ की कल्पना को हरे रंग में सजा देना है. अगर कुछ रंगने की जरूरत पड़े तो विकास की हरियाली से छत्तीसगढ़ के दामन को हरा भरा कर देना है. ऐसा इसलिए ताकि नई आधारभूत संरचना विकास का वह आधार स्तंभ बन जाए, जिसमें छत्तीसगढ़ के विकास की रफ्तार देश नहीं पूरी दुनिया में नंबर वन बने. छत्तीसगढ़ का यह नारा सबसे ऊपर बुलंद होकर चले कि "छत्तीसगढ़िया सब ले बढ़िया".
विकास वाली होली का होगा आगाज
छत्तीसगढ़ विकास की डगर पर चले, इसे लेकर छत्तीसगढ़ में हर जगह अनुरोध हो रहा है. छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि जो लोग समाज की मुख्य धारा से अभी भी भटके हुए हैं, उन लोगों से मैं निवेदन कर रहा हूं कि वो समाज के मुख्य धारा से जुड़ें. इसे आत्मसमर्पण नहीं बल्कि पुनर्वास कहा जाएगा और अगर वह लोग देश की सेवा करना चाहते हैं, समाज की सेवा करना चाहते हैं तो समाज की मुख्यधारा से जुड़कर समाज सेवा करें. विजय शर्मा ने कहा कि ये मैं उनसे निवेदन कर रहा हूं.
मानवीय मूल्य होंगे स्थापित, खूनी विचारधारा का होगा अंत
व्यवस्था में संविधान और संविधान विरोध का जो द्वंद छत्तीसगढ़ में चला रहा है, उसमें छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री का यह बयान उस लाइन को पूरा करता है, जिसमें महके दिग दिगंत की बात हो रही है. मानवीय संरचना में हरियाली का वह स्वरूप जो विकास का है, साथ ही इंद्रधनुषी रंग जो मानवीय मूल्यों को स्थापित करता है, हर वो रंग इसमें पिरोया गया है. मानवीय मूल्यों से समाज विकास की अवधारणा मजबूत होती है. यह सब कुछ इस बार की होली में छत्तीसगढ़ के बुनियाद में है. क्योंकि छत्तीसगढ़ का दामन अगर किसी चीज से सबसे ज्यादा डरा है तो नक्सलवाद के उस दंश से है, जिसमें अपने ही भटक कर अपनों के दुश्मन बन गए हैं. अब उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने का काम किया जा रहा है.
कई रचनाओं में लिखा भी गया है की होली में दिल मिल जाते हैं, दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं. इस लाइन की प्रासंगिकता इसलिए दुश्मन और दोस्त वाली नहीं है क्योंकि छत्तीसगढ़ को और मजबूत करने का काम सभी को करना है. इसमें सभी छत्तीसगढ़ के हैं, छत्तीसगढ़िया हैं. विरोध वाली विचारधारा जो दुश्मनी को लेकर आई थी, इस साल होलिका में जलाकर नए छत्तीसगढ़ को बनाने का एक मजबूत संकल्प लेकर चलेगी. ऐसा हो, यह सभी की उम्मीद है और ऐसा हो यही छत्तीसगढ़ की अपने छत्तीसगढ़िया लोगों से मांग है. ईटीवी भारत परिवार की तरफ से आप सभी लोगों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं.

