सूरजकुंड मेले में थर्ड जेंडर का स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र, आर्टिफिशियल ज्वैलरी समेत खूबसूरत प्रोडक्ट्स देख खिंचे चले आ रहे लोग
फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में पहुंची किन्नर राशि ने बेहद खूबसूरत ज्वैलरी स्टॉल लगाया है और दूसरे लोगों को रोज़गार भी दे रही है.


Published : February 8, 2026 at 3:14 PM IST
|Updated : February 8, 2026 at 5:54 PM IST
फरीदाबाद: सूरजकुंड मेला सिर्फ कला का उत्सव नहीं, बल्कि ऐसे बदलावों का मंच है, जहां हर हुनर को उसकी सही पहचान मिलती है. अब थर्ड जेंडर भी इस बदलाव का हिस्सा है और अलग मुकाम पर अपनी एक ऊंची पहचान बना रहे हैं. इस बार फरीदाबाद में अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर क्राफ्ट मेले में ऐसी कहानी सामने आई है, जो समाज की सोच बदलने की ताकत रखती है. एक थर्ड जेंडर कलाकार, जिसका नाम राशि है और वो पिछले 15 वर्षों से बधाईयां मांग कर अपनी जिंदगी चलाती थीं, आज वो अपनी कला से खुद की एक नई पहचान बना चुकी हैं. राशि तरह-तरह की आर्टिफिशियल ज्वैलरी बनाती हैं, इसके साथ ही पेंटिंग और लेडीज बैग भी बनाती है. अपनी इस कला को लेकर वो सूरजकुंड मेले में आई हुई हैं.
परेशानियों का सामना किया : ईटीवी भारत की टीम से बातचीत के दौरान राशि ने बताया कि "मैंने इस काम की शुरुआत 2 साल पहले की थी और आज मेरा बिजनेस ठीक ठाक चल रहा है. थर्ड जेंडर होने के चलते कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा. 15 साल तक मैंने टोली बधाई मांगी, लेकिन शुरू से ही मन में था कि कुछ अलग करना है और अपनी कम्युनिटी को आगे लेकर चलना है. यही वजह है कि मैंने इस काम की शुरुआत की. हालांकि पेंटिंग का शौक मुझे बचपन से ही था, तो पहले मैंने पेंटिंग बनाई. उसके बाद धीरे-धीरे आर्टिफिशियल ज्वैलरी का काम शुरू किया".
कमाल का हुनर है: राशि ने बताया कि "मैं गले का सेट, ईयररिंग, बाली, ब्रेसलेट वगैरा बनाती हूं. इसके बाद मैंने हाथों से लेडीज़ बैग बनाना भी शुरू किया. धीरे-धीरे मेरा काम चल पड़ा. हालांकि शुरुआत में दिक्कत बहुत ज्यादा आई. लोग हमें दूसरी नजर से देखते थे. लेकिन अब समाज की सोच बदल रही है और मैं चाहती हूं कि सरकार भी हमारी मदद करें. जितने थर्ड जेंडर के लोग हैं, उनके लिए सरकार कुछ अच्छा सोचें".

समाज को बदलने वाली सोच: राशि का कहना है कि "मैं चाहती हूं कि आने वाले टाइम में मैं अपने साथ ज्यादा से ज्यादा थर्ड जेंडर के लोगों को रोजगार दूं. हालांकि इस समय मेरे पास दो-तीन थर्ड जेंडर कम्युनिटी के लोग हैं, जो सड़कों पर पहले 12 घंटे भीख मांगते थे, उनको मैंने रोजगार दिया है. हालांकि ज्यादा रोजगार में अभी नहीं दे सकती. मैं चाहूंगी कि आने वाले दिनों में और भी ज्यादा थर्ड जेंडर के लोगों को रोजगार दूं. ताकि समाज की सोच बदल पाए".

"अपनो के साथ ने बढ़ाया हौसला": राशि ने बताया कि "परिवार की बात करूं तो मेरे घर में मम्मी, पापा, भाई हैं. उन लोगों ने मुझे बहुत ज्यादा सपोर्ट किया. जब मैंने उनको बताया कि मैं अपना काम शुरू करने जा रही हूं. तो उन्होंने खूब सपोर्ट किया और यही वजह है कि आज मैं इस अंतरराष्ट्रीय मेले में आई हुई हूं. यहां पर मेरे द्वारा हाथों से बनाई गई प्रोडक्ट को लोग खूब पसंद कर रहे हैं. खरीदारी भी कर रहे हैं. वहीं, मैं समाज को एक मैसेज भी देना चाहूंगी कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है. बल्कि अगर अपने अंदर हुनर है, तो उसको निखारने की जरूरत है और यही वजह है कि मैंने भी अपने अंदर की कला को निखारा".

समाज में बराबरी का दर्जा मिले : राशि ने बताया कि " मैं चाहती तो मैं भी दूसरे थर्ड जेंडर की तरह अभी भी सड़कों पर भीख मांगती या बधाईयां लेती. लेकिन मैंने अपना काम शुरू किया. मैं पहले से ज्यादा अभी मेहनत कर रही हूं और मैं चाहती हूं कि एक दिन थर्ड जेंडर लोगों को समाज में बराबरी का हिस्सा मिले. ताकि वो लोग भी बधाई या भीख मांगना छोड़कर जो उनके अंदर छुपी कला है उसे निखारें".

पर्यटकों ने की राशि की सराहना: वहीं, राशि के स्टॉल पर गाजियाबाद से सामान लेने आई महिला रेखा ने बताया कि "ये अच्छी बात है कि थर्ड जेंडर के लोग अब ऐसा काम कर रहे हैं और उनके द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट बहुत अच्छे हैं. मैं लोगों से अपील करुंगी कि लोग यहां पर आए और इनका सामान खरीदें, ताकि इनका और ज्यादा हौसला बढ़े, जब मैं इस स्टोर पर आई तो खुद हैरान रह गई कि थर्ड जेंडर के लोग भी अपनी छुपी प्रतिभा को अब बाहर निकाल रहे हैं. मैं राशि की सराहना करूंगी और इनका मैं हौसला भी बढ़ाऊंगी ताकि इसी तरह से ये आगे काम कर सकें".

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