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जिस स्कूल के आंगन में पढ़कर बने अफसर, अब उसे लिया गोद, 9वीं से 12वीं के छात्रों को आजीवन देंगे मिड-डे मील

देवीराम शर्मा ने स्कूल को 20 हजार रुपये दिए. साथ ही समय-समय पर धन उपलब्ध करवाने का वादा किया. सुरेश शर्मा की रिपोर्ट

देवी राम शर्मा
देवी राम शर्मा ने केल्वी स्कूल को लिया गोद (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 29, 2026 at 7:31 PM IST

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Updated : August 29, 2026 at 7:44 PM IST

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ठियोग: वक्त का पहिया भले ही इंसान के चेहरे पर झुर्रियां उकेर दे या उसके कंधे पर बड़े से बड़े पद का तमगा सजा दे, लेकिन बचपन की कच्ची पगडंडियां और स्कूल के वो पुराने कमरे इंसान की यादों से कभी ओझल नहीं होते हैं. 1962 में केल्वी प्राथमिक स्कूल की चौखट पर उंगली थामे खड़ा हुआ छोटा सा बच्चा स्कूल को गोद लेने आधी सदी के बाद लौटेगा ये किसी नहीं सोचा था.

68 वर्षीय देवीराम शर्मा एसडीएम ठियोग के रीडर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं. उन्होंने सीनियर सेकेंडरी स्कूल केल्वी को गोद लिया है. 'माय स्कूल माय प्राइड' कार्यक्रम के तहत उन्होंने ये कदम उठाया है. स्कूल को गोद लेने के दौरान प्रिंसिपल डॉ. रमेश वर्मा की अध्यक्षता में स्कूल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. स्कूल स्टाफ और बच्चों ने उनका जोरदार स्वागत किया. देवी राम शर्मा अपनी पत्नी और परिवार के साथ स्कूल पहुंचे थे. स्कूल प्रिंसिपल ने उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत करवाया.

माय स्कूल माय प्राइड के तहत स्कूल को लिया गोद (ETV Bharat)

9वीं से 12वीं तक के बच्चों को मिड डे मील

कार्यक्रम में देवीराम और उनकी धर्मपत्नी केसरी शर्मा ने 9वीं से 12वीं कक्षा के सभी 93 बच्चों और स्टाफ के लिए अपनी जेब से आजीवन रोजाना दोपहर का भोजन (मध्याह्न भोजन) देने का बादा किया, तो पूरे हॉल में एक सन्नाटे के बाद तालियों की गूंज भर गई. देवीराम शर्मा ने भावुक होकर अपनी स्वैच्छिक निधि से 20,000 रुपये सौंपते हुए कहा कि जिस मिट्टी ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया उसके आगे ये कुछ भी नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि स्कूल की जरूरतों के हिसाब से फंड देते रहेंगे.

पत्नी के साथ देवी राम
पत्नी के साथ देवी राम (ETV Bharat)

वहीं, स्कूल प्रिंसिपल रमेश वर्मा ने कहा कि "सरकार की ओर से चलाए गए 'माय स्कूल माय प्राइड' कार्यक्रम के तहत स्कूल से पढ़े पुराने छात्र देवी राम जी ने रिटायरमेंट के बाद स्कूल को गोद लिया है, जिससे स्कूल में चल रही कमी और स्कूलों में घटती संख्या को कम किया का सकता है."

वहीं, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष मुकेश वर्मा ने खुशी जाहिर करते हुए इसे क्षेत्र के लिए गर्व की बात बताया. उन्होंने कहा कि इससे कहीं न कहीं स्कूल को बहुत फायदा होगा. उम्मीद है कि इससे स्कूल में छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी होगी.

मिड डे मील देने का किया वादा
मिड डे मील देने का किया वादा (ETV Bharat)

'टीचर ने कंधे पर उठाकर घुमाया'

वहीं, कार्यक्रम में यादों के पन्ने पलटते हुए पलटते हुए देवीराम शर्मा का गला भर आया. उन्होंने कहा, "मैं 1962 से 1967 तक इस स्कूल का छात्र रहा हूं. वो दिन मैं कभी नहीं भूल सकता, जब पूरे ब्लॉक में 5वीं कक्षा में प्रथम आने पर मेरे मास्टर जी ने मुझे खुशी के मारे अपने कंधों पर उठा लिया था. 8वीं में गड़कुफरी स्कूल में 6 में से 5 साथी फेल हो गए थे और मैं अकेला पास होने वाला छात्र था. ये अपने आप में गर्व का विषय था."

तीन बार पास की HAS की लिखित परीक्षा

गरीबी की दीवारें इतनी ऊंची थीं कि डॉक्टर बनने की चाहत गाइडेंस की कमी ने तोड़ दिया. देवीराम ने हार नहीं मानी. बिजली बोर्ड में महज 4.25 रुपये की दिहाड़ी पर खंबों के बीच पसीना बहाया. दिनभर जिस्म तोड़ मेहनत और ढलती शाम को 'शिमला इवनिंग कॉलेज' के कमरों में किताबों के साथ जूझते थे.

1967 केल्वी स्कूल से की पांचवी तक की पढ़ाई
1967 केल्वी स्कूल से की पांचवी तक की पढ़ाई (ETV Bharat)

देवीराम ने बताया कि काम के साथ-साथ बीए ऑनर्स किया. बिजली विभाग में रेगुलर जॉब मिल गई, लेकिन उसको छोड़ने के निर्णय किया और जिला प्रशासनिक सेवा में काम करना शुरू किया ओर साथ में MA इंग्लिश MA लोक प्रशासन, MA इकोनॉमिक्स की पढ़ाई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से की. तीन बार एचएएस (HAS) की लिखित कठिन परीक्षा पास की, लेकिन इंटरव्यू पार नहीं कर पाए. इसके बावजूद हौसला नहीं टूटा. पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाते हुए कुरुक्षेत्र से वकालत की और इग्नू से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. 2016 में रीडर टू SDM ठियोग के पद से सेवानिवृत हुए.

सीनियर सेकेंडरी स्कूल केलवी
सीनियर सेकेंडरी स्कूल केल्वी (ETV Bharat)

क्या है 'माय स्कूल माय प्राइड' स्कूल योजना

'माय स्कूल माय प्राइड' स्कूल अडॉप्शन प्रोग्राम है. इसकी शुरुआत जनवरी 2024 में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में की गई थी. इसका मकसद सरकारी स्कूलों में शिक्षा, अध्यापन और अन्य गतिविधियों की गुणवत्ता में सुधार करना हैं. इसके तहत जनप्रतिनिधियों, राजपत्रित अधिकारियों और जिला से लेकर उपमंडल स्तर तक के अधिकारियों को सरकारी स्कूल को गोद लेने के लिए प्रेरित किया गया है. गोद लिए गए स्कूलों में शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों को बेहतर बनाने के लिए मेंटरशिप और सहयोग उपलब्ध करवाना है.अब तक प्रदेश में 6,546 सरकारी स्कूल गोद लिए जा चुके हैं.

9वीं से 12वीं के बच्चों के लिए मिड डे मील की व्यवस्था
9वीं से 12वीं के बच्चों के लिए मिड डे मील की व्यवस्था (ETV Bharat)
जिलाप्राथमिकमाध्यमिककुल
(GPS/GCPS)प्राथमिक (GMS)माध्यमिक (जीएचएस)माध्यमिक (GSS)
बिलासपुर4273258177694
चंबा98339961631281
हमीरपुर7426298236
कांगड़ा605521883581203
किन्नौर113193366
कुल्लू134562109310
लाहौल-स्पीति5061930
मंडी2440156322722
शिमला6714314125
सिरमौर95637611461200
सोलन3173914360559
ऊना1110117120
कुल382421199515166546

इस योजना का मकसद स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना है. इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकारी स्कूलों के विकास में प्रशासन और समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है.

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Last Updated : August 29, 2026 at 7:44 PM IST