Explainer: आदमखोर का आरोप झेल रही बाघिन कनकटी व उसकी बहन 10 महीने से दे रही 'परीक्षा', बेकसूर होने का इंतजार
दोनों बाघिन का व्यवहार "नो नेगेटिव इंटरेक्शन विद हुमन" रहा है. सामान्य रूप से शिकार कर रही हैं. पेश है मनीष गौतम की रिपोर्ट...

Published : April 10, 2026 at 5:23 PM IST
कोटाः पिछले साल रणथंभौर टाइगर रिजर्व में एक के बाद एक तीन लोगों की टाइगर अटैक में हुई मौत के बाद एरोहेड बाघिन (T-84) के कुनबे पर आदमखोर (मैन ईटर) होने का आरोप लगा था. इस आरोप के कारण बाघिन एरोहेड के दो बेटियों और एक बेटे को रणथंभौर छोड़ना पड़ा था. दो बाघिन को मुकुंदरा और रामगढ़ में शिफ्ट कर दिया गया, जबकि बाघ को अब तक कैद रखा गया है. कुनबे के बिछड़ने के बीच मुकुंदरा और रामगढ़ टाइगर रिजर्व से खुशखबरी आ रही है कि दोनों बाघिन कनकटी यानी एमटी 8 व आरवीटी-8 सामान्य रूप से व्यवहार कर रही हैं. दोनों बाघिन का व्यवहार "नो नेगेटिव इंटरेक्शन विद हुमन" रहा है.
दोनों बाघिन सामान्य रूप से शिकार कर रही हैं और टेरिटरी बनाकर रह रही हैं. कोटा के मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुकुंदरा व आरवीटीआर के फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट का कहना है कि दोनों बाघिन सामान्य व्यवहार कर रही हैं. दोनों को सब एडल्ट स्थिति में लाया गया था और अब दोनों एडल्ट हो चुकी हैं. इनकी उम्र करीब 3 साल की है. उन्होंने बताया कि दोनों बाघिन को जून 2025 में कुछ अंतराल में लाया गया था. इन्हें आए हुए 10 महीने का समय बीत गया है. दोनों बाघिन का व्यवहार नोर्मल है, इनका कोई भी नेगेटिव इंटरेक्शन ह्मूमन के साथ अब तक सामने नहीं आया है. दोनों बाघिन अपनी टेरिटरी बना चुकी हैं. अब तक कोई भी घटना सामने नहीं आई है.
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एरोहेड के कुनबे पर लगे थे आरोपः रणथंभौर टाइगर रिजर्व में एरोहेड बाघिन (T-84) के कुनबे पर मैनईटर (आदमखोर) होने के आरोप लगे थे. वर्ष 2025 में टाइगर अटैक में लोगों की मौत की तीन घटनाएं सामने आई थी. इसके बाद राज्य सरकार ने कमेटी बनाई थी और इनके कुनबे के दो बाघिन और एक बाघ को शिफ्ट करने की तैयारी की गई थी. जिस दिन कनकटी को मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया, उसी दिन उसकी मां यानी बाघिन एरोहेड की मौत हो गई थी. मुकुंदरा में आने के बाद कनकटी को एमटी 8 तो रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किए गए बाघिन को आरवीटी 8 नाम दिया गया.

ज्यादातर शिकार शाकाहारी प्राणीः सीसीएफ सुगनाराम जाट का कहना है कि जून 2025 में दोनों बाघिन को लाया गया था. मुकुंदरा में दो महीने तक एंक्लोजर में रखा. उसके बाद बाघिन को जंगल में हार्ड रिलीज कर दिया था, जबकि आरवीटीआर (रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व) में एक माह में ही बाघिन को हार्ड रिलीज किया गया था. मुकुंदरा में एमटी 8 ने अपनी टेरिटरी बना ली है. वह ज्यादातर समय दरा घाटी में ही रहती है. इसके साथ ही वह फूटा तालाब, सावन भादो डैम के एरिया तक भी विचरण करती है. उसके बाद वापस लौट आती है. वह इस टेरिटरी से बाहर नहीं जाती है. उन्होंने बताया कि कुछ समय तक रणथंभौर से लाए गए बाघ एमटी 9 का विचरण यहां रहा था. इस बीच में दोनों की मेटिंग हुई या नहीं, इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है.

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उन्होंने बताया कि रामगढ़ में रिलीज की गई बाघिन आरबीटी 8 बूंदी शहर के बाहर के एरिया में अपनी टेरिटरी बनाए हुए है. वह बूंदी किले के आसपास शिकार बुर्ज, सूरज छतरी से होती हुई टनल के ऊपर वाले हिस्से में से बफर जोन के कालड़ा तक जाती है. इसी एरिया में वह घूमती है. दोनों बाघिन ज्यादातर शिकार हर्बिवोर (शाकाहारी प्राणी) का कर रही हैं. दोनों सांभर, चीतल, जंगली सूअर, नीलगाय और कभी-कभी भैंस या गाय को भी शिकार बना लेती हैं.

किसी व्यक्ति का कभी पीछा नहीं कियाः सीसीएफ सुगनाराम जाट ने बताया कि बाघिन ने कभी किसी व्यक्ति का पीछा करने का प्रयास नहीं किया. केवल एक बार बाघिन एमटी 8 ने दरा में हाइवे को क्रॉस किया था. वह रिजर्व में स्थित गांव के आबादी वाले एरिया के आसपास पहुंच गई थी, लेकिन इसके बाद वह अपने टेरिटरी के एरिया में ही चली गई थी.
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मैन ईटर होने पर लगातार लोगों का पीछा करते हैंः वन्यजीव विभाग में उपवन संरक्षक के पद से रिटायर्ड दौलत सिंह शक्तावत को ब्रेव टाइगर मैन के नाम से जाना जाता है. साल 2010 में रणथंभौर टाइगर रिजर्व में एसीएफ रहते समय उन पर टाइगर ने हमला कर दिया था. टाइगर के मैन इटर होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन पर जिस टाइगर ने हमला किया था, वह भी आदमखोर नहीं था. उस टाइगर ने कुछ सालों में लोगों पर हमले जरूर किए थे, लेकिन वह मैन ईटर कैटेगरी में नहीं था. दौलत सिंह शक्तावत का कहना है कि कार्निबोरा में बिग कैट्स में शामिल टाइगर, लायन और पैंथर के मैन ईटर होने पर वह लगातार लोगों का पीछा करते हैं. इस दौरान उन्हें व्यक्ति सीधा शिकार लगते हैं. ऐसे में टाइगर आमतौर पर कुल शिकार में से आधे शिकार ह्रूमन का करने लग जाते हैं, अन्यथा उन्हें मैन ईटर नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि आरवीटीआर व एमएचटीआर में घटनाएं नहीं होना साबित करता है कि रणथंभौर में अप्रैल 2025 से जून 2025 में हुई घटनाएं केवल एक्सीडेंट ही थे.

रणथंभौर में घटना एक्सीडेंटली हुईः ब्रेव टाइगर मैन शक्तावत का कहना है कि आमतौर पर टाइगर 4 से 6 दिन के आसपास में अपना शिकार कर लेता है. बीते 10 महीना में इन्होंने कई शिकार किए हैं और ऐसा एक्सीडेंट कभी सामने नहीं आया कि किसी ह्रूमन का पीछा किया हो. शक्तावत का कहना है कि केवल रणथंभौर में ही ह्रूमन का आना-जाना रहता है ऐसा नहीं है, मुकुंदरा में भी इसी तरह के हालात हैं और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में भी ऐसा ही है. दोनों रिजर्व में ह्यूमन की मौजूदगी रहती है. टाइगर को इसकी जानकारी रहती है, इसलिए रणथंभौर की घटना केवल एक्सीडेंटली हुई लगती है. आमजन ने लगातार हुए घटनाओं के बाद इन बाघ-बाघिन को मैन ईटर मान लिया था. उन्होंने कहा कि आमतौर पर टाइगर ह्यूमन को देखकर खुद छुपने की कोशिश करता है या फिर दूर हो जाता है. मैन ईटर होने की स्थिति में वह पीछा करते हुए भी व्यक्ति का शिकार कर लेता है.

54 दिन में हुई थी तीन घटनाएंः रणथंभौर में 16 अप्रैल 2025 को त्रिनेत्र गणेश मंदिर के नजदीक 7 वर्षीय बालक कार्तिक सुमन पर टाइगर ने हमला करके जान ले ली थी. 11 मई 2025 को वन विभाग के रेंजर देवेंद्र चौधरी की भी मौत टाइगर हमले में हुई थी. इसके बाद बाघिन कनकटी को ट्रेंकुलाइज कर रणथंभौर के एक एंक्लोजर में बंद कर दिया था. इसके बाद रणथंभौर दुर्ग के जैन मंदिर के सेवादार राधेश्याम माली पर बाघ ने 9 जून को हमला कर दिया था. इससे उसकी मौत हो गई थी.

बाघ अब तक एंक्लोजर में कैदः 9 जून को हमले में राधेश्याम की मौत होने के बाद बाघ को एंक्लोजर में शिफ्ट किया गया था. इसके बाद वह अभी तक वहीं कैद है. नर शावक को करौली-धौलपुर टाइगर रिजर्व (KDTR) में शिफ्ट करना था, लेकिन यह अटक गया है. इन हमलों में बाघिन कनकटी व उसके भाई पर आरोप लगे थे. इस घटना के पहले ही दोनों बाघिन को मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व में शिफ्ट कर दिया गया था. इन तीनों टाइगर की मां एरोहेड की 19 जून 2025 में मौत हो गई थी. उसके बोन कैंसर होना सामने आया था.
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दोनों बाघिन की मासिक रिपोर्ट भेजते हैंः सीसीएफ सुगनाराम जाट का कहना है कि रामगढ़ और मुकुंदरा में लाई गई दोनों बाघिन की मासिक रिपोर्ट भेजी जाती है. इसमें इनका व्यवहार और विचरण के संबंध में जानकारी होती है. साथ ही शिकार के संबंध में भी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है. यह सब कुछ नॉर्मल रहा है, इनका व्यवहार बिल्कुल भी असामान्य नहीं रहा है, अन्य बाघ बाघिन की तरह रिजर्व में रह रही है.

टेरिटरी संघर्ष मैन वर्सेस टाइगर कनफ्लिक्ट पर शिफ्टिंगः रिटायर्ड डीसीएफ दौलत सिंह शक्तावत ने बताया कि किसी भी टाइगर को शिफ्ट उस स्थिति में किया जाता है, जहां पर मैन वर्सेस टाइगर कनफ्लिक्ट हो या फिर कुछ इंसीडेंट हो गए हों. इसके अलावा टाइगर की टेरिटरी फाइट होने की स्थिति में भी शिफ्ट किया जाता है. टेरिटरी फाइट में टाइगर चोटिल भी हो जाते हैं. कई बार रिजर्व में ही टाइगर में आपस में भिड़ंत में मौत हो जाने के मामले भी सामने आते रहे हैं. ऐसा मामला बीते सालों में बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में भी सामने आया था. साथ ही रणथंभौर में भी मामले सामने आए हैं.
उन्होंने बताया कि टाइगर की शिफ्टिंग से पहले पूरा प्रोटोकॉल फॉलो किया जाता है. इसके संबंध में पूरी जानकारी ली जाती है. सुगनाराम जाट का यह भी कहना है कि किसी भी एक्सीडेंटली हुए अटैक के बाद कमेटी डिसाइड करती है कि टाइगर को दूसरे रिजर्व में शिफ्ट किया जा सकता है, जहां पर आबादी कम है. ऐसे में उन रिजर्व में टाइगर की आबादी भी बढ़ जाएगी और टाइगर को स्पेस भी अच्छा मिल जाएगा, जिससे घटनाएं भी रुकती हैं.

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अभेड़ा में शिफ्ट करने की दी थी अनुमतिः रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अप्रैल और मई 2025 में हुई घटना के बाद ही एक कमेटी बनी थी. कमेटी ने अपनी जांच में ब्लड सैंपल्स से लेकर कई फैक्ट्स को जाना था, जिसमें यह माना जा रहा था कि एरोहेड तीन सब एडल्ट से ही यह इंसीडेंट हुए हैं. इस कमेटी ने तत्काल एरोहेड के तीनों सब एडल्ट को शिफ्ट करने की सहमति दे दी थी. जिनमें एक को मुकुंदरा दूसरे को रामगढ़ और तीसरे को डीकेटीआर (धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व) भेजना था. इस घटना के तत्काल बाद ही जून महीने में एक और घटना हो गई थी. इसके बाद मेल टाइगर को तत्काल रणथंभौर के ही दो हेक्टेयर के एंक्लोजर में शिफ्ट कर दिया गया था. यहां पर उसे कैद रखा गया है. बाद में कमेटी ने डीकेटीआर की जगह इस टाइगर को अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट करने पर सहमति दे दी थी, लेकिन अभी इस संबंध में उच्च अधिकारियों ने निर्णय नहीं लिया है.

