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पुष्कर में दक्षिण भारतीय शैली के श्रीरमा वैकुंठनाथ मंदिर का शताब्दी महोत्सव, गुरु की आज्ञा से दो भाइयों ने 1924 में कराया था निर्माण

यह मंदिर अपनी अनुपम दक्षिण भारतीय शिल्प कला और पूजा पद्धति से पुष्कर आने वाले तीर्थयात्रियों को लुभाता आया है.

The procession of Lord Shri Rama Vaikunthanatha in Pushkar
पुष्कर में भगवान श्री रमा वैकुंठनाथ की सवारी (ETV Bharat Ajmer)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : August 25, 2026 at 5:58 PM IST

3 Min Read
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अजमेर: जिले के पुष्कर में दक्षिण भारतीय शैली के दो मंदिर हैं. दोनों मंदिर ही रामानुज संप्रदाय के हैं. यहां पूजा पद्धति और नियमों की पालना भी दक्षिण भारतीय शैली से होती आई है. इनमें एक श्री रमा बैकुंठनाथ मंदिर नए रंगजी के नाम से ख्यात है. यह मंदिर अपनी अनुपम दक्षिण भारतीय शिल्प कला और पूजा पद्धति से पुष्कर आने वाले तीर्थयात्रियों को लुभाता आया है. मंदिर का शताब्दी दिवस मनाया जा रहा है. पांच दिवसीय कार्यक्रम में कई धार्मिक आयोजन हो रहे हैं.

1924 में दो भाइयों ने बनवाया था भव्य मंदिर: मंदिर में प्रबंधक सत्यनारायण रामावत ने बताया कि वर्ष 1924 में सेठ मंगीराम बांगड़ ने भव्य मंदिर की स्थापना की थी. मंदिर को 100 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं. मंदिर का शताब्दी महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है. डीडवाना निवासी दो भाई सेठ मंगीराम बांगड़ और सेठ रामकुमार बांगड़ अपने गुरु बालमुकंदाचार्य की आज्ञा से मंदिर का निर्माण दक्षिण भारतीय शैली से कराया. यहां मंदिर में पूजा के लिए अर्चक और सेवक भी दक्षिण भारतीय ही लगाए गए. मंदिर में सभी परम्पराएं दक्षिण भारत में तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर ही निभाई जाती है.

किसने क्या कहा, सुनिए (ETV Bharat Ajmer)

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मंदिर में कल्याण महोत्सव मनाया: रामावत ने बताया, शताब्दी महोत्सव में भगवान की सवारी धूमधाम से पुष्कर सरोवर लेकर आए, जहां भगवान श्रीरमा बैकुंठनाथ का पवित्र सरोवर के जल से अभिषेक और दुग्धाभिषेक किया गया. इसके बाद मंदिर में कल्याण महोत्सव मनाया. मंगलवार को मंदिर प्रांगण में हवन हुआ. एक और दक्षिण भारतीय शैली से हवन वेदियों में आहुतियां दी गई. मंदिर ट्रस्टियों के लिए अलग से हवन वेदी बनी. इसमें स्थानीय पंडितों ने आचार्यत्व कर हवन संपन्न कराया. देर शाम पुष्कर आने वाले तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए भजन संध्या रखी गई. इसमें अनूप जलोटा भजनों की प्रस्तुति देंगे. 2 वर्षों से मंदिर में शताब्दी महोत्सव मनाने की तैयारी की गई. मंदिर के बाहरी दीवारों पर नए सिरे से चित्रकारी के लिए चेन्नई से कलाकार बुलाए गए.

breathtaking adornment of the Lord during the Kalyana Utsav at the Sri Rama Vaikunthanatha Temple.
श्री रमा वैकुंठनाथ मंदिर में कल्याण उत्सव में भगवान का नयनाभिराम शृंगार (ETV Bharat Ajmer)

100 वर्षों से मंदिर की परंपरा कायम: मंदिर के ट्रस्टी हरिमोहन बांगड़ ने बताया, मंदिर की परंपरा और मर्यादा 100 वर्षों से कायम है. मंदिर की स्थापना से लेकर अभी तक पूरा परिवार एक साथ है. पूरा परिवार शताब्दी महोत्सव में मौजूद है. स्थानीय और पुष्कर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी कई कार्यक्रम किए जा रहे हैं. बांगड़ ने कहा, प्रयागराज तीर्थ के राजा हैं तो पुष्कर राज तीर्थ के गुरु हैं. पुष्कर राज किसी भी तीर्थ पर नहीं जाते हैं, बल्कि सभी तीर्थ नदियां और सागर देवी देवता यहां आते हैं. पूर्वज बताते थे कि पुष्कर से शांत और कोई जगह नहीं है. कोई मंदिर बनाना है तो पहले पुष्कर में बनाना है. पुरानी संस्थानों की देखरेख चाहिए. पुरानी चीज को रिस्टोर करना बेमानी है. उसे नए तरीके से संवारा जा सकता है. पुराने काम को रिस्टोर करेंगे और नया काम करेंगे.

Trustees and temple priests performing worship rituals at the lake
सरोवर की पूजा अर्चना करते ट्रस्टी और मंदिर के अर्चक (ETV Bharat Ajmer)

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