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हिमाचल की इस झील के अस्तित्व पर संकट, बढ़ता जलस्तर मचा सकता है तबाही

रिवालसर के बाद मंडी जिले की एक और झील पर संकट के बादल हैं. जलस्तर कम न होने के कारण स्थानीय लोग डरे हुए हैं.

कुंतभयोग झील
कुंतभयोग झील (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 9, 2026 at 2:00 PM IST

4 Min Read
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मंडी: हिमाचल प्रदेश सहित मंडी जिला में स्थित प्राकृतिक झीलें जहां एक ओर आस्था और पर्यावरण का प्रतीक हैं, वहीं दूसरी ओर अब ये झीलें मानवीय लापरवाही और प्राकृतिक आपदाओं के कारण संकट की ओर बढ़ती नजर आ रही हैं. रिवालसर झील के बाद अब पास ही स्थित कुंतभयोग झील को लेकर भी स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं. इस झील के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

तीन धर्मों की संगम स्थली के रूप में प्रसिद्ध रिवालसर की प्राकृतिक झील लंबे समय से गाद और घटती गहराई की समस्या से जूझ रही है. इसी तरह अब रिवालसर से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित एक और प्राकृतिक जलस्रोत, कुंतभयोग झील भी खतरे की जद में आती दिख रही है. वर्ष 2023 और 2025 में हुई भारी बारिश के दौरान झील का जलस्तर असामान्य रूप से बढ़ गया, जिससे आसपास के कई परिवारों को अस्थायी रूप से अपने घर छोड़ने पड़े. हालांकि बारिश थमने के बाद जलस्तर में कुछ कमी आई, लेकिन ये अब भी अपने सामान्य स्तर तक नहीं लौट पाया है. वर्तमान स्थिति ये है कि झील का पानी रिहायशी मकानों के बेहद करीब पहुंच चुका है, जिससे लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है.

झील के बढ़ते जलस्तर से लोग चिंतित

स्थानीय निवासी आत्मा राम और प्रेम कुमार ने कहा कि 'झील में धीरे-धीरे गाद जमा हो रही है, जिससे पानी की निकासी बाधित हो रही है और इसी कारण जलस्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है. जलस्तर पहले के मुकाबले सात से आठ फीट अधिक है. प्रशासन से अनुरोध है कि समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके. झील के फटने से तबाही भी हो सकते हैं.'

वैज्ञानिक अध्ययन के बिना निष्कर्ष संभव नहीं

इस पूरे मामले पर सुकेत वन मंडल के उप अरण्यपाल राकेश कटोच का कहना है कि 'बीते वर्षों में हुई अत्यधिक बारिश के कारण आसपास का मलबा बहकर झील में पहुंचा होगा. हालिया सालों में मंडी जिले में बारिश का पैटर्न बदला है. बारिश अधिक मात्रा में हुई है. अधिक बारिश होने से कैचमेंट एरिया में भूमि कटाव बढ़ता है और गाद झीलों में जमा हो जाती है, जिससे जलस्तर बढ़ सकता है, लेकिन बिना वैज्ञानिक जांच के किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा. कुंतभयोग झील एक वेटलैंड है, जो प्रदेश सरकार के अधीन आती है और इसके रखरखाव की जिम्मेदारी वन विभाग की नहीं है.'

आस्था से जुड़ी झील

कुंतभयोग झील केवल एक प्राकृतिक जलस्रोत नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था से भी जुड़ी हुई है. लोककथाओं के अनुसार पांडवों के वनवास के दौरान जब माता कुंती को प्यास लगी, तब अर्जुन ने अपने तीर से यहां जल प्रकट किया था. इसी जल से माता कुंती ने अपनी प्यास बुझाई और बाद में यहां यह झील अस्तित्व में आई. इसी कारण इसे कुंतभयो झील कहा जाता है. झील के समीप माता कुंती का मंदिर भी स्थित है. इस पूरे क्षेत्र में इस प्रकार की सात प्राकृतिक झीलें मौजूद हैं, जो पर्यावरण और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. कुंतभयोग झील से जुड़ी वर्तमान स्थिति न केवल पर्यावरणीय चेतावनी है, बल्कि प्रशासन के लिए भी समय रहते ठोस कदम उठाने का संकेत है. यदि गाद, जलनिकासी और संरक्षण पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो ये झील भी रिवालसर की तरह गंभीर संकट का सामना कर सकती है.

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