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बयाना विधायक रितु बनावत के खिलाफ चुनाव याचिका खारिज, देना होगा 1 लाख रुपए का हर्जाना

राजस्थान हाईकोर्ट ने 2 अमह मामलों में फैसले दिए. रितु बनावत पर कोर्ट समन से बचने की कोशिश करने पर एक लाख रुपए का हर्जाना.

राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : June 29, 2026 at 9:52 PM IST

5 Min Read
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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने बयाना विधायक रितु बनावत के निर्वाचन को चुनौती देते हुए दायर चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस सुदेश बंसल की एकलपीठ ने यह आदेश पराजित प्रत्याशी पुरुषोत्तम लाल की ओर से दायर चुनाव याचिका पर दिए. इसके साथ की अदालत ने रितु बनावत पर कोर्ट समन से बचने की कोशिश करने पर एक लाख रुपए का हर्जाना लगाया है. वहीं, एक दूसरे मामले में एकलपीठ ने कर्मचारी चयन बोर्ड से जवाब तलब किया है.

अदालत ने कहा कि प्रतिवादी रितु बनावत ने जानबूझकर और सोच समझकर कई तरह के हथकंडे अपनाए, ताकि वह कोर्ट में उपस्थिति से बच सकें, जिसके चलते कोर्ट को समन तामील के लिए अलग तरीका अपनाना पड़ा और विधानसभा सचिव के जरिए समन तामील कराने पडे. इसके साथ ही अदालत ने माना कि याचिका में लगाए गए आरोप चुनाव निरस्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है.

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याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता और रितु बनावत ने विधानसभा चुनाव-2023 में नामांकन भरा था. चुनाव में याचिकाकर्ता को 689 मत मिले और बानावत को एक लाख से अधिक वोट मिलने के कारण विजयी घोषित किया गया. याचिका में कहा गया कि नामांकन के दौरान बनावत ने अपनी संपत्तियों और दायित्वों की पूरी और सही जानकारी नहीं दी, जो भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है, इसलिए बनावत का नामांकन रद्द कर किया जाए.

इसका विरोध करते हुए बनावत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर ने कहा कि उनकी ओर से मूल सूचनाएं सही तरीके से दे दी थी. इसके अलावा चुनाव खर्च के लिए खोले गए बैंक खाते की जानकारी देना बाध्यकारी नहीं था. वहीं, गृहणी के तौर पर भी कृषि आय की जा सकती है. ऐसे में याचिका को खारिज किया जाए, जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए विधायक बनावत पर समन से बचने के लिए हथकंडे अपनाने पर एक लाख रुपए का हर्जाना लगाया है.

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कर्मचारी चयन बोर्ड से जवाब तलब: राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से आयोजित शिक्षक भर्ती-2025 के लेवल प्रथम की परीक्षा में विवादित प्रश्न-उत्तर से जुड़े मामले में अंतिम उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाली याचिका पर चयन बोर्ड से जवाब तलब किया है. जस्टिस गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने यह आदेश ममता यादव व अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए.

याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने बताया कि कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से आयोजित इस भर्ती की लिखित परीक्षा के बाद याचिकाकर्ताओं ने भर्ती की प्रथम उत्तर कुंजी पर आपत्ति जताई थी, जिस पर अंतिम उत्तर कुंजी में 11 प्रश्न डिलीट कर दिए थे. इसके अलावा कई उत्तर बदल दिए गए थे. याचिकाकर्ताओं की ओर से कई अन्य प्रश्नों पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई थी, लेकिन उन पर विचार ही नहीं किया गया. याचिकाकर्ताओं के बोर्ड की पुस्तक के अनुसार उत्तर सही हैं, लेकिन फिर भी चयन बोर्ड ने उन्हें सही नहीं किया. ऐसे में विषय विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर विवादित प्रश्नों की जांच कराई या और याचिकाकर्ताओं को बोनस अंक दिए जाए, जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने कर्मचारी चयन बोर्ड से जवाब तलब किया है.

छात्रा को जमानत: अतिरिक्त सत्र न्यायालय क्रम-2, महानगर द्वितीय ने री-नीट परीक्षा, 2026 के दौरान परीक्षा कक्ष में मोबाइल छिपाकर ले जाने और नकल का प्रयास करने के आरोप में न्यायिक अभिरक्षा में चल रही छात्रा को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं. अदालत ने यह आदेश आरोपी छात्रा की जमानत अर्जी को मंजूर करते हुए दिए. जमानत अर्जी में अधिवक्ता एमके शर्मा ने कहा कि आरोपी छात्रा नवयुवती है और उसे मामले की गंभीरता की जानकारी नहीं थी. इसके अलावा उसके कब्जे से प्रश्न पत्र से जुडी किसी तरह की सामग्री नहीं मिली है. उससे पूछताछ भी पूरी हो चुकी है. ऐसे में उसके भविष्य को देखते हुए उसे आगे न्यायिक अभिरक्षा में नहीं रखा जाए, जिसका विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि आरोपी अपने अन्त:वस्त्र में मोबाइल छिपाकर लाई थी और परीक्षा में पूछे गए सवालों को एआई के जरिए हल करने के फिराक में थी. ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत नहीं दी जाए, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपी छात्रा को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं.