ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में कस्तूरी मृग-नीली भेड़ की संख्या में इजाफा, भूरे भालू की मौजूदगी के भी मिले संकेत
गणना में कस्तूरी मृग का घनत्व 9.56 प्रति वर्ग किमी दर्ज हुआ है. नीली भेड़ का घनत्व 7.29 प्रति वर्ग किलोमीटर पाया गया.


By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 26, 2025 at 6:03 PM IST
कुल्लू: बंजार में स्थित विश्व धरोहर स्थल ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में दुर्लभ वन्य जीव-जंतुओं की मौजूदगी लगातार मजबूत होती जा रही है. हाल ही में पार्क प्रबंधन की ओर से की गई वैज्ञानिक गणना में कस्तूरी मृग, नीली भेड़ और भूरे भालू की उपस्थिति के ठोस प्रमाण सामने आए हैं. ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र में जैव विविधता के संतुलन और संरक्षण के प्रयासों की दिशा में ये एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
पार्क प्रबंधन ने वन्यजीवों की गणना आधुनिक वैज्ञानिक विधियों से की है, जिसमें कस्तूरी मृग की गणना साइट ड्राइव काउंट मेथड, नीली भेड़ के लिए स्कैनिंग मेथड और भूरे भालू की लाइन ट्रांसेक्ट मेथड के माध्यम से की गई. ये सर्वेक्षण 25 से 27 अक्टूबर 2025 के बीच पूर्व-चिह्नित स्थलों पर विभिन्न टीमों की ओर से संपन्न हुआ.
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में वन्यजीवों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. इसमें कस्तूरी मृग-नीली भेड़ की संख्या में इजाफा हुआ है. इसके अलावा भी पार्क क्षेत्र में कई दुर्लभ जीव जंतु निवास करते हैं और पार्क प्रबंधन की परिस्थितियों उन्हें यहां पर बेहतर तरीके से फलने फूलने का अवसर प्रदान कर रही हैं:संदीप शर्मा, अरण्यपाल वन वृत, कुल्लू.
कस्तूरी मृग और नीली भेड़ों की बड़ी संख्या
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में कस्तूरी मृग की गणना के लिए कुल 11 स्थान चिन्हित किए गए, जिन पर 11 अलग-अलग टीमें तैनात की गईं. सर्वेक्षण में कस्तूरी मृग का औसत घनत्व 9.56 प्रति वर्ग किलोमीटर दर्ज किया गया. ये प्रजाति सामान्यत 3000 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाई जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार ये आंकड़ा पार्क में कस्तूरी मृग की संख्या में हुई बढ़ातरी को दर्शाता है. नीली भेड़ की गणना के लिए दो स्थान निर्धारित किए गए, जहां दो टीमें भेजी गईं. गणना के बाद घनत्व क्रमशः 7.29 प्रति वर्ग किलोमीटर पाया गया. नीली भेड़ सामान्यत 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाई जाती है, जो पार्क के ऊपरी इलाकों में इसके अनुकूल आवास को दर्शाता है.

भूरे भालू के संकेत, मौजूदगी पुख्ता
पार्क के क्षेत्र में भूरे भालू की गणना के लिए तीन स्थान चिन्हित किए गए. हालांकि प्रत्यक्ष रूप से कोई भालू नहीं दिखा, लेकिन कई स्थानों पर पंजों के निशान और गोबर मिलने से पार्क क्षेत्र में भूरे भालुओं की मौजूदगी के स्पष्ट संकेत मिले हैं. ये प्रजाति आमतौर पर 3300 से 4450 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाई जाती है.

मांस के लिए होता है नीली भेड़ों का शिकार
वन विभाग से सेवानिवृत अधिकारी बीएस राणा ने बताया कि 'ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में नीली भेड़ का दायरा अब बढ़ रहा हैं. इसे स्थानीय भाषा में 'भरल' कहा जाता है. ये पत्थरों के बीच रहती है और घास खाती है. ये दिखने में हल्के भूरे और नीले रंग की होती है, इसलिए इसे ब्लू शीप कहा जाता है. पत्थरों के बीच रहने के कारण ये नीले रंग की दिखाई देती है. ये भेड़ 120 से 140 सेमी. लंबी होती है और इसका वजन 60 से 70 किलो तक होता है. पूंछ 10 से 20 सेमी. लंबी होती है. बाहरी हलचल होने पर ये एकदम भागकर पत्थरों के बीच छिप जाती है. हिमपात होने पर यह भेडें अपने ठिकाने पर ही रहती हैं. यह दो से तीन दिन तक बिना कुछ खाए आराम से रह सकती हैं. मांस के लिए इनका शिकार किया जाता है. यही कारण है कि ये लुप्त होने के कगार पर पहुंच गई थी. नीली भेड़ लाहौल स्पीति के ऊंचाई वाले इलाकों सहित, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और तिब्बत में पाई जाती हैं.'
बीएस राणा ने बताया कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में करीब तीन हजार फीट की ऊंचाई पर पाए जाते हैं. पार्क में एक दर्जन से अधिक जगह ऐसी हैं जहां कस्तूरी मृग का वास पाया गया है. नर कस्तूरी मृग के पेट में कस्तूरी पाई जाती है. कस्तूरी के महंगे दाम मिलने से लोग इसका शिकार करते हैं, लेकिन अब वन्य प्राणियों का शिकार करने के लिए कानून सख्त होने से भी शिकार में कमी आई है. ये अकेला रहने वाला जीव है और सुबह-शाम सबसे अधिक सक्रिय होता है. ये ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क पारिस्थितिक संतुलन के लिए एक महत्वपूर्ण जगह है और पार्क के भीतर प्राकृतिक आवास में कस्तूरी मृग संरक्षित हो रहे हैं.
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