बीकानेर कैमल फेस्टिवल 2026: हेरिटेज वॉक से रंगारंग शुरुआत, पर्यटक राजस्थानी संस्कृति से होंगे रूबरू
बीकानेर में इंटरनेशनल कैमल फेस्टिवल आगाज हेरिटेज वॉक से हुआ. हेरिटेज वॉक नगरसेठ लक्ष्मीनाथ जी मंदिर से शुरू होकर रामपुरिया हवेली तक चला.

Published : January 9, 2026 at 7:36 PM IST
बीकानेर: जिले में इंटरनेशनल कैमल फेस्टिवल का भव्य आगाज हो चुका है. शुक्रवार को हेरिटेज वॉक के साथ इस तीन दिवसीय उत्सव की शुरुआत हुई, जिसमें बीकानेर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, शानदार स्थापत्य कला, स्वादिष्ट व्यंजन और ललित कलाओं के जीवंत रंग खूब झलके.
हेरिटेज वॉक में बिखरा बीकानेरी रंग: यह हेरिटेज वॉक नगरसेठ लक्ष्मीनाथ जी मंदिर से शुरू होकर रामपुरिया हवेली तक करीब चार किलोमीटर तक चली. इस दौरान शहर की पुरानी हवेलियां, जटिल नक्काशी वाली इमारतें और ऐतिहासिक गलियां राजस्थानी संस्कृति के रंगों से सजी नजर आईं. राजस्थानी पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे पुरुष और महिलाएं उत्साह से शामिल हुए. लोक वाद्यों जैसे नगाड़ा, मश्क, चंग और बांसुरी की मधुर धुनों के साथ भजन गायन ने पूरे माहौल को और भी रंगीन बना दिया.
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प्रमुख अतिथियों ने की शुरुआत: कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, विधायक जेठानंद व्यास और जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि ने की. पर्यटन विभाग के उपनिदेशक अनिल राठौड़, सहायक निदेशक महेश व्यास और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी इस वॉक में शामिल हुए. देशी-विदेशी पर्यटक, स्थानीय निवासी और प्रशासनिक अधिकारी सभी बीकानेरी रंगों में डूबे नजर आए.
इस दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि बीकानेर की ऐतिहासिक विरासत हमारी साझी धरोहर है. यह उत्सव नाइट टूरिज्म को बढ़ावा देगा और बीकानेर के रंग पूरी दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर बिखेर देगा. जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि ने सभी सैलानियों और स्थानीय लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि वे इस संस्कृति का हिस्सा बनें और इसे जीवंत रखें.
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कला, व्यंजन और परंपरा का अनोखा संगम: वॉक के दौरान कई जगहों पर जीवंत प्रदर्शन हुए. मथेरण, बंधेज, पोटरी, सुनहरी कलम और साफा बांधने की कला को करीब से देखा गया. लोक कलाकारों ने भजन, नृत्य और संगीत से सबका मन मोह लिया. सजे-धजे ऊंट और रौबीले भी साथ चल रहे थे. भांडाशाह जैन मंदिर के पास हरियाणवी रागड़ी की प्रस्तुति दी गई. चूड़ी बाजार में लाख की चूड़ियां बनाने और जूती बनाने की कला दिखाई गई. चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाने का प्रदर्शन हुआ. कलेक्टर और विधायक ने घेवर बनाकर देखा, जो सबके लिए मजेदार पल रहा. सब्जी बाजार की ऐतिहासिक चौकी पर शहर की रम्मत का ऐतिहासिक नाटक सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना.
संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा: लोक कलाकार गरिमा विजय ने कहा कि इस आयोजन से हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलता है. देश-विदेश से आए लोग हमारी परंपराओं को देखकर बीकानेर का नाम दुनिया में फैलाते हैं. रौबीले श्याम किराडू ने बताया कि यह उत्सव बीकानेर को एक अलग पहचान देता है. तीन दिनों तक पूरा शहर संस्कृति में डूबा रहता है. यह उत्सव 11 जनवरी तक चलेगा, जिसमें ऊंटों की दौड़, सज्जा, नृत्य और अन्य प्रतियोगिताएं होंगी. बीकानेर की यह रंगारंग धरोहर न सिर्फ पर्यटकों को लुभाती है, बल्कि हमारी जड़ों से भी जोड़ती है.

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अंतर्राष्ट्रीय ऊंट उत्सव के पहले दिन शाम को बीकानेर के धरणीधर ग्राउंड में मिस्टर बीकाणा, मिस मिरवण, ढोला मरवण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ. शाम को शुरू हुई प्रतियोगिता करीब 3:30 घंटे तक चली और देर रात 10:30 बजे परिणाम घोषित किया गया. लखन पारीक बने मिस्टर बीकाणा तो वहीं मिस मिरवण का खिताब अंकिता सुथार ने जीता और ढोला मरवण किशोर कल्ला स्वाति कल्ला रहे.
मूंछों का प्रदर्शन : इस दौरान स्टेज पर बीकानेर में सबसे लंबी मूंछों के धनी गिरधर व्यास ने अपनी मुंह से खोलकर प्रदर्शित की तो इस दौरान देखने वाले अचंभित रह गए करीब 20 फीट से भी ज्यादा लंबी मूंछों को दो आदमियों ने हाथ से पकड़ा तब जाकर पूरी मूंछ खुल पाई.
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वायस ऑफ बीकानेर : पहली बार ऊंट उत्सव में बीकानेर के गायक कलाकारों को भी मंच देने के प्रयास के तहत वॉयस ऑफ बीकानेर प्रतियोगिता आयोजित की गई. वहीं नृत्य कलाकार वर्षा सैनी की भवई नृत्य प्रस्तुति देकर हर कोई दंग रह गया. हर साल कैमल फेस्टिवल में करणी सिंह स्टेडियम में पहले दिन प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है लेकिन इस बार प्रतियोगिताओं का आयोजन शहरी क्षेत्र के अंदरूनी इलाके में धरणीधर ग्राउंड में हुआ. इस दौरान विधायक जेठानंद व्यास सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे.

दिखी अव्यवस्था का आलम खाली रही कुर्सियां : कैमल फेस्टिवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीकानेर को पहचान दिलाने के उद्देश्य से साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है. लेकिन पहले दिन जिस तरह से प्रतियोगिताओं का आयोजन धरणीधर ग्राउंड में हुआ उस दौरान मंच के सामने लगी अधिकतर कुर्सियां खाली नजर आईं. साथ ही स्थानीय लोगों के अलावा देसी और विदेशी पर्यटकों की पूरी तरह से कमी देखने को मिली . दरअसल पर्यटन विभाग देसी विदेशी पर्यटकों को यहां तक लाने में सफल ही नहीं हो पाया.

