राजस्थान विधानसभा में उठे कई मुद्दे : लूणी का प्रवाह क्षेत्र नहीं बदला जाएगा, पांचना बांध में पानी छोड़ने की हुई मांग
विधानसभा में पांचना बांध में पानी छोड़ने, सांडों के आतंक, सूअरों से फसल नुकसान और मुआवजे की मांग भी उठी.

Published : February 19, 2026 at 4:39 PM IST
जोधपुर: राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को शून्यकाल के दौरान कई अहम मुद्दे उठे, जिनमें लूणी नदी के प्रवाह में बदलाव की अटकलों पर विराम लगाते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि पश्चिमी राजस्थान की इस जीवनरेखा लूणी के जलग्रहण क्षेत्र में किसी भी प्रकार का परिवर्तन स्वीकार्य नहीं होगा. जलसंसाधन मंत्री सुरेश रावत ने आश्वस्त किया कि अजमेर के आनासागर के अतिरिक्त जल को लूणी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित किए बिना शाकंभरी माता क्षेत्र तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा. इसके अलावा गंगापुर विधायक ने पांचना बांध में 20 वर्षों से पानी न छोड़े जाने से 40 हजार बीघा भूमि के किसानों की व्यथा उठाई. सूरजगढ़ में आवारा सांडों द्वारा वृद्धजनों को घायल किए जाने, बाड़मेर में जंगली सूअरों से फसलों के नुकसान और मुंडावर में हाईवे निर्माण को लेकर मकान हटाने पर मुआवजे की मांग भी गूंजी.
राज्य विधानसभा में गुरुवार को शून्यकाल में मेड़ता विधायक लक्ष्मण राम ने ध्यानाकर्षण के तहत लूणी नदी का मामला उठाया था. विधायक ने कहा कि जलसंसाधन विभाग आनासागर में बारिश का अधिशेष पानी कायड़ से रूपनगढ़ तक लाने की योजना बना रहा है, इसके लिए सौ करोड़ रुपए की राशि खर्च करने जा रहा है. इसमें लूणी नदी के जलप्रवाह को बदलने और पानी कम करने की खबरें आ रही हैं. इस पर जलसंसाधन मंत्री सुरेश रावत ने कहा, 'विधायक की चिंता वाजिब है, लेकिन यहां मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि बजट की घोषणा के अनुरूप अजमेर शहर में बाढ़ की स्थिति का निस्तारण किया जाएगा. अजमेर के पास कायड़ का रास्ता भी बारिश की वजह से बंद रहा था. इसका निस्तारण करने के लिए योजना बना रहे हैं. इसके तहत रूपनगढ़ तक इस पानी के प्राकृतिक जलप्रवाह को मेंटेन रखेंगे. पानी को शाकंभरी माता तक ले जाने का प्रयास करेंगे.' मंत्री ने कहा कि लूणी नदी के प्रवाह क्षेत्र में किसी सूरत में बदलाव नहीं होगा. मंत्री ने कहा कि सरकार लूणी में कोई बदलाव नहीं करेगी, यह सब भ्रांतियां हैं. विधानसभा अध्यक्ष ने मंत्री से कहा कि लूणी में बदलाव नहीं हो, साथ ही अजमेर शहर में पानी नहीं भरे, इस पर भी विचार करें. लूणी नदी के विषय पर संसदीय मंत्री जोगाराम पटेल ने भी कहा कि यह नदी हमारे लिए जीवनदायिनी है. इसके प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा.
सरकार गुर्जर-मीणा को लड़ाना चाहती है?: गंगापुर विधायक रामकेश ने पांचना बांध में पानी नहीं छोड़ने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वसुंधरा सरकार के समय हुए विवाद के बाद से बीस साल से इस बांध में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है. चालीस हजार बीघा के किसान पानी के लिए तरस रहे हैं. सरकार हर साल नदी में पानी छोड़ रही है, लेकिन बांध के कमांड क्षेत्र में पानी नहीं छोड़ रही है. वर्तमान सरकार ने भी अनकमांड क्षेत्र में 50 करोड़ की स्वीकृति देकर गुर्जर और मीणा समाज में झगड़ा करवाना चाहती है. बांध का पानी रोककर पानी कानून व्यवस्था खराब करना चाहती है, जबकि किसानों की जमीनों से नहर निकली है, उनको मुआवजा भी नहीं दिया गया. सरकार को चाहिए कि बांध में पानी छोड़े.
सांड वृद्धजनों को घायल कर रहे हैं: सूरजगढ़ विधायक श्रवण कुमार ने अपने विधानसभा क्षेत्र के नगर पालिका क्षेत्र की स्थापना के बाद से अभी तक सीवर का काम नहीं होने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि एक भी पार्क नहीं है. वृद्धजन घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. बाहर निकलते ही सांड हमला करते हैं, पिछले दिनों में 15 वृद्धजनों की टांगें तोड़ चुके हैं. सरकार को चाहिए कि इस नगर पालिका क्षेत्र में एक पार्क बना दे, जिससे वृद्धजन और रिटायर्ड लोग वहां घूमकर स्वस्थ रह सकें. इस दौरान सत्ता पक्ष की ओर से कुछ लोग उठने लगे, विधानसभा अध्यक्ष ने उनको फटकार लगाई.
इन्होंने भी उठाए मुद्दे: बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी ने जंगली सूअरों द्वारा किसानों की फसलों के नुकसान पहुंचाने का मामला उठाया. वहीं मुंडावर विधायक ललित यादव ने नेशनल हाईवे से 75 मीटर की दूरी तक की भूमि पर बने निर्माण हटाने के आदेश का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह आदेश जनता के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं. सरकार इनको दस गुना मुआवजा देने की नीति बनाए.

