जयपुर में बिखरेगी ब्रज की छटा: गोविंद देव जी मंदिर में होगा भव्य फागोत्सव, शामिल होंगे 500 कलाकार
जयपुर में फागोत्सव 24-26 मार्च को मनाया जाएगा, जिसमें 500 कलाकार शामिल होंगे. कथक, गायन और होली की लीलाओं से ठाकुर जी को रिझाएंगे.

Published : February 20, 2026 at 4:22 PM IST
जयपुर: फाल्गुन में गुलाबी नगरी का मिजाज बदलने लगता है. हवाओं में अबीर-गुलाल की खुशबू घुलती है, मंदिरों में राग-रंग के स्वर गूंजते हैं और ठाकुर जी का दरबार फागोत्सव के रंग में डूब जाता है. ये केवल होली का उत्सव नहीं, बल्कि विरासत, भक्ति और रंगों की वो परंपरा है, जो सदियों पहले ब्रज से चली और जयपुर की आत्मा में बस गई. इस बार फाल्गुन की अष्टमी, नवमी और दशमी पर पारंपरिक फागोत्सव आयोजित होगा. करीब 500 कलाकार इसमें भाग लेंगे.
ब्रज से जयपुर तक रंगों की यात्रा: इतिहास के पन्ने बताते हैं कि जब ब्रज से भगवान श्रीकृष्ण के गोविंद देव जी, गोपीनाथ जी सहित विभिन्न विग्रह को जयपुर लाया गया, तब केवल प्रतिमाएं ही नहीं आईं, उनके साथ ब्रज की जीवंत परंपराएं भी यहां आ बसीं. उन्हीं परंपराओं में एक थी फागोत्सव. गौड़ीय संप्रदाय के जिन मंदिरों में कृष्ण के ब्रज स्वरूप का दर्शन होता है, वहां फागोत्सव भी उसी रस और रंग में मनाया जाता है.
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फागोत्सव में दिखेंगे ब्रज के रंग: आयोजक गौरव धामाणी ने बताया कि इस वर्ष 24, 25 और 26 मार्च को फाल्गुन की अष्टमी, नवमी और दशमी पर पारंपरिक फागोत्सव आयोजित होगा. करीब 500 कलाकार इसमें भाग लेंगे. विभिन्न घरानों की कथक की प्रस्तुतियां, लट्ठमार होली, पुष्प होली इन सबके बीच ठाकुर जी के दरबार में राग और रंग का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा. यहां जयपुर के अलावा ब्रज क्षेत्र, दिल्ली, कोलकाता और अहमदाबाद से कलाकार आकर अपनी प्रस्तुति देंगे.
गौरव धामाणी ने बताया कि कई परिवार ऐसे हैं जिनकी पीढ़ियां इस सेवा से जुड़ी रही हैं. उन्होंने बताया कि इस बार फागोत्सव के दौरान नृत्य में अविनाश शर्मा, गुलाबो गिरधारी महाराज, स्वाति गर्ग जैसे कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे, जबकि गायन में जगदीश शर्मा और कुंज बिहारी जादू जैसे दिग्गज कलाकार स्वरों से ठाकुर जी को रिझाएंगे. इस बार समय में बदलाव किया गया है. ये आयोजन सुबह 11:00 से दोपहर 3:00 तक होंगे.

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फागोत्सव के तहत सज रही रचना झांकी: वर्तमान में ठाकुर जी का शृंगार गुलाल और अबीर से किया जा रहा है. मंदिर के सेवादार विशेष पोशाक तैयार कर पारम्परिक रंगों के माध्यम से सूती कपड़े पर कृष्ण लीलाओं को उकेर कर रचना झांकी सजा रहे हैं. झांकी में श्रीकृष्ण और राधारानी के संग होली खेलने का प्रतीकात्मक दृश्य दर्शाए जा रहे हैं, जो भक्तों को ब्रज की फाग परंपरा का सजीव अनुभव कराता है.
देवस्थान विभाग के मंदिरों में भी होंगे आयोजन: स्टेट पीरियड में फागोत्सव केवल जन-उत्सव नहीं था, बल्कि राजपरिवार की आस्था से भी गहराई से जुड़ा रहा. सवाई जयसिंह के समय से ये उत्सव मनाया जाता रहा, लेकिन सवाई प्रताप सिंह के दौर में इसे चरम वैभव मिला. इतिहासकार देवेंद्र कुमार भगत ने बताया कि फाल्गुन के उत्सवों में स्वयं महाराजा ठाकुर जी को फूलों से नहलाते थे.
उन्होंने बताया कि जयपुर के ब्रजनिधि मंदिर का मंडप तो विशेष रूप से फागोत्सव को ध्यान में रखकर बनाया गया था. इसी परंपरा की झलक आनंद कृष्ण बिहारी मंदिर और रामचंद्र जी का मंदिर में भी दिखाई देती है. इसी परंपरा को जीवित रखते हुए देवस्थान विभाग इन मंदिरों में भी फागोत्सव का आयोजन करेगा. इसके लिए अलग से बजट भी जारी किया गया है.
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