5 हजार उद्योगों वाला शहर भिवाड़ी: सरकार को हजारों करोड़ का राजस्व, फिर भी विकास के लिए तरसा
भिवाड़ी पांच दशकों में सरकार का सबसे बड़ा राजस्व का स्रोत बना, लेकिन विकास, शिक्षा और रोजगार की कमी से स्थानीय लोग वंचित हैं.

Published : February 20, 2026 at 3:48 PM IST
भिवाड़ी: राजस्थान के खैरथल-तिजारी जिले में स्थित एक प्रमुख औद्योगिक शहर भिवाड़ी, पिछले पांच दशकों में देश के औद्योगिक मानचित्र पर एक मजबूत स्थान बनाने में सफल रहा है, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल होने के बावजूद, यह शहर अभी तक पूर्ण विकसित शहर का रूप नहीं ले पाया है. यहां हजारों उद्योग चल रहे हैं, जो केंद्र और राज्य सरकार को हर साल हजारों करोड़ रुपये का राजस्व देते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को विकास, उच्च शिक्षा और रोजगार के मामले में अभी भी बहुत कम सुविधाएं मिल रही हैं.
भिवाड़ी का ऐतिहासिक विकास और औद्योगिक विस्तार: भिवाड़ी इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण लांबा ने बताया कि भिवाड़ी का औद्योगिक क्षेत्र 1975 में स्थापित हुआ था. पहली फैक्ट्री 1978 में लगी, और उसके बाद से यहां उद्योगों की संख्या लगातार बढ़ती गई. वर्तमान में भिवाड़ी में 5 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं, ये इकाइयां मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, ग्लास, केमिकल और वायर से जुड़ी हैं.
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प्रवीण लांबा ने बताया कि यहां कई लाख श्रमिक काम करते हैं, जिनमें ज्यादातर बिहार, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से आए प्रवासी मजदूर हैं. श्रम विभाग में लगभग 3.5 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं. उन्होंने ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में उद्योग इकाइयों के संचालन से भिवाड़ी राजस्व देने के मामले में अग्रणी है, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी बनी हुई है. उन्होंने सरकार से भिवाड़ी के पुनर्निर्माण के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है. साथ ही, यहां उच्च और तकनीकी शिक्षा के संस्थान खोलने की जरूरत पर जोर दिया.
राजस्व में भिवाड़ी का योगदान: भिवाड़ी राजस्थान सरकार को राजस्व देने के मामले में अग्रणी है. खुश्खेड़ा-कारोली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप दायमा ने बताया कि भिवाड़ी पूरे राजस्थान का एक तिहाई राजस्व प्रदान करता है. वर्ष 2022-23 में भिवाड़ी ने केंद्र और राज्य सरकार को कुल 6,457 करोड़ रुपये का राजस्व दिया, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 7,351 करोड़ रुपये हो गया. इतने बड़े योगदान के बावजूद, शहर में बुनियादी ढांचे की कमी है.

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स्थानीय लोगों के लिए चुनौतियां: इतने बड़े औद्योगिक विकास के बावजूद, स्थानीय युवाओं को यहां के उद्योगों में रोजगार नहीं मिल पा रहा है. प्रदीप दायमा ने बताया कि स्थानीय युवाओं को नौकरियां नहीं मिलतीं, जबकि प्रवासी श्रमिकों की संख्या ज्यादा है. वे कहते हैं कि सरकार को स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देना चाहिए, ताकि वे यहां के उद्योगों में काम कर सकें. भिवाड़ी में कोई उच्च तकनीकी शिक्षा संस्थान नहीं है, जैसे टेक्निकल कॉलेज, पॉलिटेक्निक या इंजीनियरिंग कॉलेज. इससे स्थानीय लोग रोजगार के अवसरों से वंचित रह जाते हैं. फसल कटाई के मौसम में, जैसे होली के बाद, यहां श्रमिकों की कमी हो जाती है, जो उत्पादन को प्रभावित करती है.

एनसीआर में शामिल होने के बावजूद, भिवाड़ी विकसित शहर नहीं बन पाया है. गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद और मेरठ जैसे अन्य एनसीआर शहर महानगरों की तरह विकसित हो चुके हैं, जहां लोगों को उच्च स्तर की सुविधाएं मिल रही हैं, लेकिन भिवाड़ी अभी भी कस्बे जैसा ही है. प्रदीप दायमा ने बताया कि प्रदूषण यहां की सबसे बड़ी समस्या है. भिवाड़ी देश के तीन सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है. हर साल करीब चार महीने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) की पाबंदियां लागू रहती हैं, जिससे उद्योगों का उत्पादन घट जाता है. एनसीआर का लाभ विकास में नहीं मिला, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण की सख्तियां जरूर लग गईं. उद्यमियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
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