जिस खेल को लोग जानते नहीं, उसी में जबलपुर की वंशिका और अरनव नेशनल गेम्स तक पहुंचे
मलेशिया और थाईलैंड के खेल में माहिर हो रहे हैं जबलपुर के बच्चे. 'सेकप तकरा' में वंशिका ने 4, अरनव ने 4 नेशनल गेम खेलें.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 9, 2026 at 3:32 PM IST
जबलपुर: मलेशिया और थाईलैंड के एक अनोखे खेल की वजह से जबलपुर के कम उम्र के बच्चे भी नेशनल गेम्स में पार्टिसिपेट कर रहे हैं. जबलपुर की 17 साल की वंशिका पटेल सेपक तकरा में पांच नेशनल गेम खेल चुकी हैं. 15 साल के अरनव गुप्ता नेशनल गेम खेल चुके हैं. इन खिलाड़ियों का कहना है कि जल्द ही वे भारत की टीम में शामिल होकर अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेलेंगे.
मलेशिया और थाईलैंड में फेमस है सेपक तकरा गेम
सेपक शब्द मलय भाषा का शब्द है. यह भाषा मलेशिया के आसपास के देशों में बोली जाती है. इस शब्द का अर्थ होता है लात मारना. इसी तरह तकरा शब्द थाई भाषा से लिया गया है और इसका अर्थ बुनी हुई गेंद के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इन दोनों ही शब्दों से मिलकर सेपक तकरा बनता है जो एक खेल का नाम है.
सेपक तकरा में हाथ से नहीं छू सकते बॉल
जबलपुर में इस खेल की खिलाड़ी खुशबू साहू ने बताया, ''यह खेल दूसरे खेलों की तरह ना तो बहुत अधिक मशहूर है और ना ही सरल है. इस खेल में एक प्लास्टिक की अनोखी गेंद को पैर और सिर से ठोकर मारी जाती है. इसे लगभग वॉलीबॉल या बैडमिंटन की तरह खेला जाता है. इसका मैदान लगभग बैडमिंटन के मैदान के बराबर होता है और उसी ऊंचाई पर नेट लगी होती है. इसकी एक टीम में तीन सदस्य होते हैं. एक खिलाड़ी एक बॉल को तीन बार मार सकता है लेकिन शर्त यही रहती है कि खिलाड़ी हाथ से बाल को नहीं छू सकता.''

वंशिका पटेल ने खेले पांच नेशनल गेम
जबलपुर की 17 साल की वंशिका पटेल इस खेल की एक्सपर्ट खिलाड़ी हैं. बीते 5 सालों में वंशिका पटेल पांच नेशनल खेल चुकी हैं. वंशिका ने बताया कि, ''एक बार उनके स्कूल में स्केल को लेकर चर्चा हुई थी. यहीं पर पहली बार उन्होंने इस खेल के बारे में सुना था. जबलपुर की एमएलबी स्कूल के मैदान में इसकी प्रैक्टिस होती है.'' हालांकि वंशिका के लिए रोज प्रैक्टिस में शामिल होना सरल काम नहीं है. वंशिका इस खेल की प्रैक्टिस अपने मोहल्ले मदर टैरेसा नगर में नहीं कर सकती. क्योंकि वहां पर इस खेल के खिलाड़ी ही नहीं है बल्कि लोग वहां उन्हें हतोत्साहित करते थे.

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रोज 7 किलोमीटर दूर प्रैक्टिस करने आती हैं वंशिका
वंशिका ने अपने परिवार के लोगों को इस बात के लिए तैयार किया कि उसके घर से 7 किलोमीटर दूर एमएलबी मैदान में एक टीम इस खेल की तैयारी करती है. यदि वंशिका को तैयारी करनी थी तो इसी मैदान में कर सकती थी. वंशिका अपने घर से रोज ऑटो रिक्शा में बैठकर इस खेल की तैयारी करने आती है. उसका कहना है कि, ''वह भारत की नेशनल टीम का सदस्य बनना चाहती हैं और दुनिया में इस खेल में अपना नाम रोशन करना चाहती हैं.''
अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेना अरनव का सपना
वंशिका की तरह ही अरनव गुप्ता भी इस खेल के एक शानदार खिलाड़ी हैं. उनकी उम्र अभी 15 साल है. वे भी अब तक 4 बार नेशनल गेम खेल चुके हैं. अरनव का कहना है कि, ''अभी यह खेल ओलंपिक में शामिल नहीं है. लेकिन इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं होती हैं और जिस तरह की कोशिश भी कर रहे हैं उसमें वह दिन दूर नहीं जब वे किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगे.''

