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पंजाब यूनिवर्सिटी में 5 साल से अधर में 1.93 करोड़ रुपये की परियोजना, पेयजल से हो रही पौधों की सिंचाई

ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पंजाब यूनिवर्सिटी में टेरिटोरियल वाटर की सप्लाई के लिए परियोजना पांच साल से अधर में लटकी है.

Territorial water Connection Project incomplete at Panjab University
Territorial water Connection Project incomplete at Panjab University (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : June 23, 2026 at 1:44 PM IST

3 Min Read
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चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी इन दिनों जल प्रबंधन को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है. ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यूनिवर्सिटी परिसर के पार्कों और ग्रीन एरिया में टेरिटोरियल वाटर की सप्लाई के लिए करीब 1.93 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार हुई. उसका बजट स्वीकृत हुआ. बावजूद इसके निर्माण कार्यों में पांच वर्षों में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी.

अधर में टेरिटोरियल वाटर सप्लाई योजना: रिपोर्ट के अनुसार चंडीगढ़ प्रशासन ने सिंचाई कार्यों में पेयजल के उपयोग पर रोक लगा रखी है. इसके स्थान पर शोधित अपशिष्ट जल यानी टेरिटोरियल वाटर के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाता है. इसके बावजूद पंजाब यूनिवर्सिटी के बागवानी विभाग को परिसर के ग्रीन एरिया और उद्यानों की सिंचाई के लिए लंबे समय से पेयजल का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. अब सवाल ये है कि जब धनराशि स्वीकृत हो चुकी थी, तो आखिर पांच वर्षों तक परियोजना आगे क्यों नहीं बढ़ सकी और पेयजल के विकल्प के रूप में टेरिटोरियल वाटर की व्यवस्था आज तक जमीन पर क्यों नहीं उतर पाई.

Territorial water Connection Project incomplete at Panjab University
ऑडिट रिपोर्ट (Panjab University)

5 साल से अधर में लटकी परियोजना: इस समस्या के समाधान के लिए मई 2019 में विश्वविद्यालय ने टेरिटोरियल वाटर कनेक्शन और पाइपलाइन बिछाने की योजना तैयार की थी. परियोजना की अनुमानित लागत 193.29 लाख रुपये तय की गई और वर्ष 2020 में इसके लिए बजट भी आवंटित कर दिया गया, लेकिन ऑडिट जांच में पाया गया कि पांच साल बीत जाने के बाद भी ना तो पाइपलाइन बिछाई जा सकी और ना ही टेरिटोरियल वाटर की आपूर्ति शुरू हो पाई.

प्रशासनिक निर्देशों का उल्लंघन: ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक हर साल केवल बजट प्रावधान को आगे बढ़ाया जाता रहा, जबकि परियोजना धरातल पर आगे नहीं बढ़ी. इसका परिणाम ये हुआ कि सिंचाई के लिए पेयजल का उपयोग लगातार जारी रहा, जिससे प्रशासनिक निर्देशों का उल्लंघन होने के साथ-साथ जल उपयोग पर खर्च भी हुआ.

ऑडिट रिपोर्ट में हुआ खुलासा: रिपोर्ट में ये भी दर्ज है कि ऑडिट आपत्ति उठाए जाने के बाद संबंधित विभाग की ओर से कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया. विभागीय प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है. ऐसे समय में जब शहर जल संरक्षण, भूजल स्तर में गिरावट और संसाधनों के उपयोग जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब एक बड़े शैक्षणिक संस्थान में वर्षों तक परियोजना का लंबित रहना चिंता का विषय है.

यूनिवर्सिटी के हॉर्टिकल्चर विंग के जेई की सफाई: इस संबंध में पंजाब यूनिवर्सिटी के हॉर्टिकल्चर विंग के जेई अनिल ठाकुर ने बताया कि "टेरिटोरियल वाटर कनेक्शन और पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पहले ही तैयार किया जा चुका है. फिलहाल पाइपलाइन नहीं बिछी है, लेकिन परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है और इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र भी भेजा गया है."

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