सोनबरसा वन विहार केंद्र में तेंदूपत्ता सत्र 2026 की तैयारी तेज, वैज्ञानिक शाखाकर्तन से गुणवत्ता और आय बढ़ाने पर जोर
तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीण आजीविका से जुड़ी सबसे बड़ी मौसमी गतिविधि है जिसके लिए प्रशासनिक और तकनीकी टीम सक्रिय हो गई है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 27, 2026 at 9:03 AM IST
बलौदाबाजार: तेंदू पत्ता संग्रहण वर्ष 2026 को लेकर बलौदाबाजार जिले में तैयारियां तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में सोनबरसा वन विहार केंद्र में शाखाकर्तन, संग्रहण और भंडारण संबंधी एक विस्तृत कार्यशाला आयोजित की गई. इस कार्यशाला का उद्देश्य सिर्फ औपचारिक प्रशिक्षण देना नहीं था, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले अमले को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ना और पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना था.
तेंदू पत्ता संग्रहण संग्रहण केवल वन उपज का काम नहीं है. यह हजारों ग्रामीण परिवारों की आय से सीधे जुड़ा हुआ विषय है. ऐसे में शाखाकर्तन से लेकर गोदामीकरण तक हर चरण में गुणवत्ता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए.

वैज्ञानिक शाखाकर्तन क्यों है जरूरी?
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि यदि शाखाकर्तन पारंपरिक तरीके के बजाय वैज्ञानिक पद्धति से किया जाए तो 40 से 50 दिनों के भीतर बेहतर गुणवत्ता के पत्ते तैयार होते हैं. इससे संग्रहण लक्ष्य की पूर्ति आसान होती है और पत्तों का ग्रेड भी बेहतर रहता है. वैज्ञानिक पद्धति में शाखाओं की संतुलित कटाई, पौधों को नुकसान से बचाना, उचित ऊंचाई पर कटाई और समय का चयन शामिल है. इससे अगली ऋतु में भी वृक्ष स्वस्थ रहते हैं और उत्पादन क्षमता बनी रहती है.अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अनियमित या अत्यधिक कटाई से पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है, जिससे भविष्य के उत्पादन पर असर पड़ सकता है.इसलिए हर फड़ स्तर पर निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है.
संग्रहण से गोदामीकरण तक पूरी प्रक्रिया पर मार्गदर्शन
कार्यशाला में फड़ स्तर पर संग्रहण, पत्तों के उपचार, गड्डी बंधाई, बोरा भराई, सिलाई, परिवहन पास जारी करने और गोदामीकरण की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया गया. पत्तों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उन्हें छाया में सुखाने, नमी संतुलन बनाए रखने और मानक के अनुसार गड्डी तैयार करने पर जोर दिया गया. गड्डी बंधाई में वजन, आकार और गुणवत्ता मानकों का पालन आवश्यक बताया गया.इसके अलावा यह भी बताया गया कि परिवहन के दौरान रिकॉर्ड संधारण, पास जारी करने और गोदाम में व्यवस्थित ढंग से भंडारण अत्यंत जरूरी है. हर चरण का अभिलेखीय संधारण अनिवार्य रहेगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी स्तर पर विवाद की स्थिति न बने.
पारदर्शी भुगतान व्यवस्था पर विशेष जोर
तेन्दूपत्ता संग्रहण से जुड़े ग्रामीण हितग्राहियों की सबसे बड़ी चिंता समय पर भुगतान की होती है. इस विषय पर भी कार्यशाला में विस्तार से चर्चा की गई.प्राथमिक वन उपज सहकारी समिति के प्रबंधकों को निर्देशित किया गया कि भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो. संग्रहित पत्तों की मात्रा, गुणवत्ता और भुगतान दर स्पष्ट रूप से दर्ज की जाए. फड़ मुंशी और फड़ अभिरक्षक की भूमिका को भी स्पष्ट किया गया. उन्हें संग्रहण से लेकर अभिलेख संधारण तक जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने के निर्देश दिए गए.
आजीविका सशक्तिकरण का माध्यम - DFO
वनमंडलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि तेंदू पत्ता संग्रहण केवल आर्थिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम है. उन्होंने कहा कि यदि शाखाकर्तन और संग्रहण कार्य गुणवत्ता के साथ किए जाएं तो निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के साथ ग्रामीणों को अधिकतम लाभ मिल सकता है. बेहतर गुणवत्ता का मतलब बेहतर मूल्य, और बेहतर मूल्य का मतलब सीधा लाभ ग्रामीण परिवारों तक पहुंचना. उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से समन्वय बनाकर कार्य करने की अपील की. यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 का संग्रहण सत्र पूरी योजना और जिम्मेदारी के साथ संचालित किया जाएगा.
बारनवापारा और आसपास के क्षेत्र में बढ़ेगी सक्रियता
कार्यशाला में बारनवापारा अभ्यारण्य से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे. इससे संकेत मिलता है कि वन क्षेत्र के संरक्षण और उपज के संतुलन को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार की जा रही है. लघु वनोपज से जुड़े पदाधिकारी, उप वनमंडलाधिकारी, परिक्षेत्र अधिकारी, प्रशिक्षु वनक्षेत्रपाल और फड़ स्तर के कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. इससे स्पष्ट है कि प्रशासन इस बार तेन्दूपत्ता सत्र को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरतना चाहता.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
तेंदू पत्ता छत्तीसगढ़ की प्रमुख लघु वनोपजों में से एक है. हजारों ग्रामीण परिवार हर वर्ष इसके संग्रहण से अपनी आय अर्जित करते हैं. कई गांवों में यह मौसमी आय का मुख्य स्रोत है. ऐसे में शाखाकर्तन और संग्रहण की वैज्ञानिक पद्धति अपनाना केवल उत्पादन बढ़ाने का प्रयास नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है. यदि पत्तों की गुणवत्ता बेहतर होगी तो विपणन में भी बेहतर दर मिलेगी. इससे सहकारी समितियों की आय बढ़ेगी और हितग्राहियों को समय पर और संतोषजनक भुगतान संभव होगा.
लक्ष्य और अनुशासन दोनों जरूरी
कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि लक्ष्य प्राप्ति के साथ गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य है. केवल अधिक मात्रा में संग्रहण पर्याप्त नहीं है. पत्तों की गुणवत्ता, गड्डी बंधाई का मानक और भंडारण की स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. अधिकारियों ने कहा कि संग्रहण, भंडारण और परिवहन की प्रत्येक प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाए. अभिलेखों का संधारण सटीक और अद्यतन होना चाहिए.
वर्ष 2026 का सत्र रहेगा महत्वपूर्ण
वन विभाग की तैयारी से संकेत मिल रहे हैं कि इस बार तेन्दूपत्ता संग्रहण सत्र को पूरी रणनीति के साथ संचालित किया जाएगा.गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता तीनों पर समान रूप से जोर दिया जा रहा है. यदि शाखाकर्तन से लेकर गोदामीकरण तक हर चरण तय मानकों के अनुसार पूरा होता है तो वर्ष 2026 का सत्र न केवल लक्ष्य की दृष्टि से सफल रहेगा, बल्कि ग्रामीण हितग्राहियों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है.

