तेलंगाना के CS संजय जाजू का मध्य प्रदेश कनेक्शन, कभी IIT छोड़ भोपाल को चुना था
तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू मध्य प्रदेश के हैं, वे देवास जिले की खातेगांव तहसील के एक गावं डोकाकुई के रहने वाले हैं.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 3, 2026 at 10:32 PM IST
भोपाल: तेलंगाना राज्य की प्रशासनिक बागडोर बतौर मुख्य सचिव अब 1992 बैच के आईएएस अधिकारी संजय जाजू संभाल रहे हैं. केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाकर पिछले दिनों उन्हें तेलंगाना का मुख्य सचिव बनाया गया है. सीनियर आईएएस संजय जाजू का मध्य प्रदेश से गहरा ताल्लुक रहा है. आईएएस संजय जाजू मूल रूप से मध्य प्रदेश के ही रहने वाले हैं. उनकी स्कूल शिक्षा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कैंपियन स्कूल में ही हुई है.
मध्य प्रदेश के देवास और भोपाल से है गहरा नाता
तेलंगाना की प्रशासनिक कमान संभाल रहे जाजू मूल रूप से मध्य प्रदेश के देवास जिले के एक गावं डोकाकुई के रहने वाले हैं. यह गांव खातेगांव तहसील में आता है. हालांकि, बचपन में कुछ समय गुजारने के बाद वे पढ़ाई के लिए भोपाल आ गए. उन्होंने भोपाल के कैंपियन स्कूल में स्कूली पढ़ाई पूरी की.

आईएएस संजय के बचपन के मित्र रहे सीनियर पत्रकार मनीष श्रीवास्तव बताते हैं कि "जाजू बचपन से ही प्रखर बुद्धि के रहे हैं. उन्होंने छोटी उम्र में ही शिक्षा के क्षेत्र में जो कीर्तिमान स्थापित किया, उसे अब तक कोई नहीं तोड़ पाया. उन्होंने महज 18 साल की उम्र में इंडियन काॅस्ट एंड वर्क अकाउंट (आईसीडब्ल्यूए) की परीक्षा में सबसे कम उम्र में पास करने का रिकाॅर्ड बनाया था.
आईआईटी छोड़, भोपाल को चुना
संजय जाजू का राजधानी भोपाल से शुरूआत से ही जबरदस्त लगाव रहा है. उनका सिलेक्शन देश के प्रतिष्ठित तकनीकि संस्थान आईआईटी में हो गया, लेकिन उन्होंने आईआईटी में जाने के स्थान पर भोपाल के मैनिट को चुना. इसके बाद मैनिट से ही उन्होंने बी.टेक और फिर एमटेक किया. इसी दौरान उन्होंने यूपीएससी की तैयारी भी शुरू कर दी. इंजीनियरिंग की डिग्री मिलने के बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में वे आईपीएस के लिए सिलेक्ट हो गए. लेकिन इसके बाद उन्होंने फिर परीक्षा दी और भारतीय प्रशासनिक सेवा में सिलेक्ट हो गए. पहले उन्हें आंध्र प्रदेश और फिर तेलंगाना कैडर मिला.
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आंध्र पहुंचे तो सीखी तेलुगु
संजय जाजू को आंध्र प्रदेश कैडर मिलने के बाद उन्होंने भाषा को काम में आड़े नहीं आने दिया. आंध्र प्रदेश पहुंचने के बाद उन्होंने तेलुगु भाषा सीखी. आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में सहायक कलेक्टर, हैदराबाद में निगम आयुक्त के बाद कई जिलों में वे कलेक्टर रहे. बाद में उन्हें केन्द्र में बुला लिया गया. करीब 13 सालों तक केन्द्र सरकार में रहते हुए उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव, उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास मंत्रालय के सचिव, रक्षा उत्पादन विभाग के अतिरिक्त सचिव के रूप में काम किया. रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया, ई गवर्नेंस, मी सेवा को बढ़ावा देने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है.

