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फिलहाल ईरान युद्ध का टाटा समूह या भारत पर सीधा असर नहीं : एन चंद्रशेखरन

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन टाटा स्टील के संस्थापक जमशेदजी नसरवानजी टाटा की 187वीं जयंती कार्यक्रम में शामिल हुए.

Tata Sons Chairman N Chandrasekaran
जमशेदजी नसरवानजी टाटा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देते टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन. (फोटो-ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : March 3, 2026 at 3:50 PM IST

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जमशेदपुर:टाटा स्टील के संस्थापक जमशेदजी नसरवानजी टाटा की 187वीं जयंती मंगलवार को मनाई गई. इस मौके पर टाटा स्टील कंपनी परिसर के अंदर टाटा संस और टाटा ट्रस्ट चेयरमैन एन चंद्रशेखरन, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा, टाटा स्टील के एमडी सह सीईओ टीवी नरेन्द्रन के अलावा कंपनी के अनय पदाधिकारियों ने जमशेदजी नसरवानजी टाटा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

कंपनी परिसर में श्रद्धांजलि देने के बाद टाटा संस, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन और टाटा स्टील के एमडी बिष्टुपुर स्थित पोस्टल पार्क पहुंचे और जेएन टाटा की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान झारखंड के पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता, मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता भी मौजूद रहीं.

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का बयान. (वीडियो-ईटीवी भारत)

फिलहाल युद्ध का टाटा समूह पर सीधा असर नहींः एन चंद्रशेखरन

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मीडिया से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने वर्तमान युद्ध के हालात पर चर्चा करते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट से टाटा समूह को लाइमस्टोन का आयात होता है और समूह का व्यापार वैश्विक स्तर पर संचालित है. उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल युद्ध का टाटा समूह या भारत पर सीधा असर नहीं पड़ा है, लेकिन यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो व्यवसाय, आपूर्ति शृंखला, माल की डिलीवरी और सस्टेनेबिलिटी पर प्रभाव पड़ सकता है.

Tata Sons Chairman N Chandrasekaran
जमशेदजी नसरवानजी टाटा की जयंती कार्यक्रम में मौजूद टाटा समूह के अधिकारी. (फोटो-ईटीवी भारत)

"कर्मचारियों की सुरक्षा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता"

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने आगे कहा कि टाटा समूह के कर्मचारी विश्वभर में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज, होटल और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत हैं. ऐसे में सभी कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा समूह की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.

"रोजगार के अवसर खुलेंगे"

रोजगार के सवाल पर उन्होंने बताया कि टाटा स्टील में नई इकाइयों की स्थापना के साथ रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं. पिछले 5–6 वर्षों में समूह के कर्मचारियों की संख्या 5–6 लाख से बढ़कर लगभग 11 लाख हो चुकी है. वर्ष 2030 तक इसे 15 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है. साथ ही महिला कर्मचारियों की भागीदारी 28 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है.

Tata Sons Chairman N Chandrasekaran
जमशेदजी नसरवानजी टाटा की जयंती कार्यक्रम में मौजूद टाटा समूह के अधिकारी. (फोटो-ईटीवी भारत)

"एआई से विभिन्न क्षेत्रों ने नए अवसर पैदा होंगे"

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की वित्तीय स्थिति पर उन्होंने कहा कि नई तकनीक आने पर रोजगार को लेकर आशंका स्वाभाविक है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से स्टील, ऑटोमोबाइल, फाइनेंस सहित विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे. इसका लाभ टीसीएस को भी मिलेगा.

Tata Sons Chairman N Chandrasekaran
टाटा स्टील कंपनी. (फोटो-ईटीवी भारत)

कौन थे जमशेदजी नसरवानजी टाटा

आपको बता दें कि भारत में इस्पात उद्योग में क्रांति लाने वाले जमशेदजी नसरवानजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1839 में गुजरात में हुआ था. जेएन टाटा बचपन से ही प्रतिभाशाली थे, उनकी दूरगामी सोच का परिणाम था कि आजादी से पूर्व एक छोटे से शहर में 1908 में टाटा स्टील की स्थापना हुई. आज टाटा स्टील देश की पहली मेक इन इंडिया कंपनी है. जेएन टाटा कंपनी के कर्मचारियों के साथ शहर को बेहतर बनाना चाहते थे. 1904 में उनके निधन के बाद उनके पुत्र दौराबजी टाटा ने टाटा स्टील की स्थापना की. उस वक्त शहर का नाम कालीमाटी था. 1919 में लॉर्ड चेम्सफोर्ड शहर आये थे और उन्होंने जमशेदजी नसरवानजी टाटा के सम्मान में शहर का नाम कालीमाटी से बदल कर जमशेदपुर रख दिया. आज जमशेदपुर को जेएन टाटा के सपनों का शहर कहा जाता है.

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