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यूपी में पराली जलाने की समस्या से मिलेगी राहत? 8 जिलों में लगेंगे सीबीजी प्लांट, जानिये किसानों को कितना होगा फायदा

कृषि विभाग के उप निदेशक बलराम वर्मा के अनुसार, एनसीआर के आठ जिलों में सीबीजी प्लांट की मशीनें वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है,

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NCR के आठ जिलों को सीबीजी प्लांट की सौगात. (Photo credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 28, 2026 at 11:02 PM IST

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Updated : August 29, 2026 at 11:27 AM IST

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लखनऊ : धान की फसल कटने के बाद हर साल दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण एक बड़ी समस्या बनकर सामने आता है. हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र के जिलों में भी कई-कई दिनों तक स्कूल बंद करने पड़ते हैं. इस समस्या से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश के कृषि विभाग ने एक नई योजना शुरू की है, जिसके तहत सीबीजी (कम्प्रेस्ड बायोगैस) प्लांट लगाए जाएंगे. विभाग का दावा है कि इससे न सिर्फ प्रदूषण पर लगाम लगेगी, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी.

8 जिलों में लगेंगे सीबीजी प्लांट. (Video Credit; ETV Bharat)

कृषि विभाग के उप निदेशक बलराम वर्मा के अनुसार, एनसीआर के आठ जिलों में सीबीजी प्लांट की मशीनें वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर काबू पाया जा सके. उन्होंने बताया कि इस पहल से एक तरफ हरित गैस का उत्पादन होगा, तो दूसरी तरफ जैविक खाद तैयार होगी, जो खेतों की मिट्टी को उपजाऊ बनाने में मदद करेगी.

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धान फसल कटाई. (Photo Credit; ETV Bharat)

उप निदेशक के मुताबिक, प्लांट के जरिए किसानों से पराली और पुआल खरीदा जाएगा, जिसकी अनुमानित कीमत 20 रुपये प्रति किलो तक हो सकती है. हालांकि, पराली से कितनी मात्रा में हरित गैस बनेगी और किसानों को इससे ठीक-ठीक कितना फायदा होगा, इस पर अभी अध्ययन जारी है.

उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के मौसम में प्रदूषण की गंभीर समस्या रहती है, वहीं दूसरी ओर पराली न जलाने पर किसानों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और लगातार पराली जलाने से खेत की उर्वरा शक्ति भी घटती जा रही है. ऐसे में सीबीजी प्लांट न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगा. उन्होंने बताया कि आधिकारिक तौर पर यह योजना प्रदेश के 75 जिलों में लागू की जाएगी, जिसमें यंत्रों पर 65 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है.

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सबसे पहले एनसीआर के जिलों में शुरुआत : उप निदेशक के मुताबिक, एक सीबीजी प्लांट की लागत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई है, जिस पर कृषि विभाग 65 प्रतिशत तक अनुदान देगा. योजना की शुरुआत सबसे पहले दिल्ली से सटे एनसीआर के जिलों में की जाएगी, उसके बाद इसे प्रदेश स्तर पर पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया के तहत किसानों के खेत से ही पराली और पुआल को खरीदा जाएगा और सीधे प्लांट तक पहुंचाया जाएगा, जहां से हरित गैस (ग्रीन गैस) और जैविक खाद तैयार होगी.

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धान फसल को ट्रैक्टर में लादते किसान. (Photo Credit; ETV Bharat)

यंत्रीकरण योजना के तहत किसानों का चयन : बलराम वर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कृषि विभाग ने कृषि यंत्रीकरण की कई उप-योजनाओं के तहत चयन प्रक्रिया पूरी कर ली है. हर विकासखंड में केंद्र खोलने के लक्ष्य के तहत ई-लॉटरी से 826 किसानों को चुना गया है. दस लाख रुपये तक की इस परियोजना में एक ट्रैक्टर और तीन बड़े कृषि यंत्र खरीदना अनिवार्य होगा, जिस पर विभाग 40 प्रतिशत अनुदान देगा.


फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) : उप निदेशक ने बताया कि फार्म मशीनरी बैंक के 150 लक्ष्य के मुकाबले 150 एफपीओ चुने गए हैं. दस लाख की परियोजना पर यहां 80 प्रतिशत तक राज्य सहायता मिलेगी.

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धान फसल कटाई के बाद से प्रदूषण. (Photo Credit; ETV Bharat)

एकल यंत्र योजना : 6,826 यंत्रों के लक्ष्य के सापेक्ष 6,228 किसानों का चयन हुआ है. महिला और अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों को 50 प्रतिशत, जबकि अन्य श्रेणी के किसानों को 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा.

क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट योजना : फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए 218 कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए 218 किसानों को चुना गया है. 30 लाख की इस परियोजना पर 80 प्रतिशत अनुदान मिलेगा.

सीबीजी एग्रीगेटर योजना : प्रदेश में 15 एग्रीगेटर तैयार किए जाएंगे, जिनकी परियोजना लागत एक करोड़ रुपये है. इसमें 60 हॉर्स पावर से बड़ा एक ट्रैक्टर, दो अतिरिक्त ट्रैक्टर-ट्रॉली, बेलर, स्ट्रॉ रेक और अन्य मशीनें खरीदनी होंगी, जिस पर 65 प्रतिशत अनुदान मिलेगा.

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यंत्र खरीदते समय किसान बरतें ये सावधानियां : बलराम वर्मा ने बताया किकृषि विभाग ने किसानों को यंत्र खरीदने के लिए सावधानियां भी बरतने के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं. किसानों से अपील की है कि यंत्र सिर्फ उन्हीं विक्रेताओं या निर्माताओं से खरीदें, जो कृषि विभाग के यंत्र ट्रैकिंग पोर्टल पर पंजीकृत (इम्पैनल्ड) हों.


उप निदेशक ने बताया कि खरीद बाउचर पर लिखे सीरियल नंबर का मिलान यंत्र पर अंकित सीरियल नंबर से जरूर करें, दोनों एक जैसे होने चाहिए. यंत्र की केंद्र या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थान से टेस्टिंग रिपोर्ट होना अनिवार्य है. यंत्र की कीमत का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान किसान के अपने खाते या नजदीकी रक्त संबंधी के खाते से ही होना चाहिए.

बलराम वर्मा बताया कि बैंक ऋण लेकर भुगतान करने की स्थिति में भी कम से कम 10 प्रतिशत राशि किसान के अपने खाते से भुगतान करनी होगी. चयनित किसानों को एकल यंत्रों के लिए 30 दिन और परियोजना आधारित यंत्रों के लिए 45 दिन के भीतर बिल विभागीय पोर्टल agriculture.up.gov.in पर अपलोड करना अनिवार्य होगा.

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Last Updated : August 29, 2026 at 11:27 AM IST