पिता टेलर और दादा मजदूर: अब तनिष्क जैन मेहनत से बदलेंगे भाग्य, JEE Main में हासिल किए 99.30 परसेंटाइल
भवानीमंडी के तनिष्क जैन ने तमाम चुनौतियों के बावजूद सेल्फ स्टडी से JEE Main में सफलता हासिल कर इतिहास रचा.

Published : February 18, 2026 at 2:43 PM IST
कोटा: कहते हैं कि सच्ची मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती, और अगर मेहनत जोर-शोर से की जाए तो सफलता खुद डंका बजाकर घर पर दस्तक देती है. राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर बसे जुड़वां शहर भैसोदामंडी (मध्य प्रदेश) और भवानीमंडी (राजस्थान) के रहने वाले 18 वर्षीय तनिष्क जैन ने ठीक यही करके दिखाया है. उन्होंने JEE Main परीक्षा में 99.30 परसेंटाइल हासिल कर एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. यह उपलब्धि न सिर्फ उसकी मेहनत की जीत है, बल्कि उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने की ठान लेते हैं.
आर्थिक तंगी के बीच घर पर ही की तैयारी: तनिष्क को यह सफलता कोई आसानी से नहीं मिली. तनिष्क के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है. घर की आय मुख्य रूप से पिता की छोटी सी टेलरिंग दुकान और दादा की हाथ ठेले वाली मजदूरी से आती है. पिता पारस जैन का कहना है कि तनिष्क ने केवल ऑनलाइन कोर्स लिया था, क्योंकि हम सक्षम नहीं थे कि उसे ऑफलाइन कोचिंग में एडमिशन दिला सकें. वहां की फीस काफी ज्यादा होती है और साथ ही कोटा में रहने का खर्चा भी लाखों में पहुंच जाता है. हमारे पास इतना बजट भी नहीं था. जैसे तैसे ऑनलाइन कोचिंग की फीस का इंतजाम कर पाए.

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अब लक्ष्य IIT से कंप्यूटर साइंस: परिस्थितियों को देखकर तनिष्क ने पूरी तैयारी घर पर ही की. सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन कोचिंग के सहारे. उन्होंने कभी हार नहीं मानी, बल्कि विपरीत परिस्थितियों को चुनौती बनाकर आगे बढ़े. अब उनका मुख्य लक्ष्य JEE Advanced क्रैक करना है, ताकि कंप्यूटर साइंस में IIT से बीटेक कर सकें. तनिष्क का मानना है कि अच्छी शिक्षा से न सिर्फ उनका भविष्य संवर सकता है, बल्कि पूरे परिवार की स्थिति भी बेहतर हो सकती है.
परिवार का संघर्ष और रोजमर्रा की जद्दोजहद: तनिष्क के पिता पारस जैन एक छोटी सी टेलरिंग शॉप चलाते हैं. कुछ साल पहले ही उन्होंने अपनी दुकान शुरू की है, लेकिन अभी यह ज्यादा नहीं चलती. दादा कैलाश जैन आज भी हाथ ठेले से मजदूरी करते हैं. बाजार में सामान ढोकर एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम करते हैं. इसी कमाई से पूरा घर चलता है, लेकिन इससे घर के बुनियादी खर्चे ही मुश्किल से निकल पाते हैं.

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तनिष्क के पिता पारस जैन ने बताया कि कुछ साल पहले तक उनका घर कच्चा था. रहने में बहुत परेशानी होती थी. परिवार में पांच सदस्य हैं, इसलिए घर को पक्का करवाना पड़ा. इसमें पूरी जमा-पूंजी लग गई. उन्होंने बताया कि ऑनलाइन कोचिंग की फीस भी 8 से 10 हजार रुपये थी. इसे जुगाड़ करके, बड़ी मुश्किल से दिया गया. 2025 में भी फीस बड़ी मशक्कत से जमा की गई थी. 2026 में दोबारा तैयारी के लिए फिर से काफी मेहनत करनी पड़ी. परिवार ने हर संभव तरीके से तनिष्क की पढ़ाई का साथ दिया, लेकिन आर्थिक मजबूरी ने कई बार राह में रोड़े अटकाए.
मां का देहांत और सौतेली मां का सहारा: तनिष्क की जिंदगी में और भी दुख आए. मात्र 2 साल की उम्र में उनकी मां का देहांत हो गया. वे इकलौते बच्चे हैं. पिता ने दूसरा विवाह किया. सौतेली मां भारती ग्रहणी हैं. उन्होंने तनिष्क की बहुत मदद की. पढ़ाई का रूटीन फॉलो करवाने में उनके साथ खड़ी रहीं. उन्होंने तनिष्क को कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया. परिवार में दादी ललिता जैन और दिव्यांग बुआ संगीता जैन भी हैं. पूरा परिवार मिलकर तनिष्क के सपनों को साकार करने में जुटा रहा.

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स्कूली शिक्षा और शानदार अकादमिक प्रदर्शन: तनिष्क ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की. 10वीं में 95% और 12वीं में 94% अंक लाए. बचपन से ही पढ़ाई में जज्बा दिखाया. आर्थिक तंगी देखकर उन्होंने पढ़ाई को हथियार बनाया. 11वीं में मैथमेटिक्स लेकर इंजीनियरिंग की तैयारी शुरू की. 2024 में पिता से कहा कि IIT से पढ़ेंगे और अच्छी नौकरी करके घर की हालत सुधारेंगे. उनकी यह बात परिवार के लिए प्रेरणा बनी.
2025 में मिली सिविल ब्रांच: 2025 में उन्होंने JEE Main क्लियर किया, एडवांस के लिए क्वालीफाई भी हुए और JoSAA काउंसलिंग में हिस्सा लिया. रैंक के आधार पर IIT जम्मू में सिविल ब्रांच में सीट मिल रही थी, लेकिन तनिष्क ने कंप्यूटर साइंस में ही बीटेक करने का फैसला किया. उन्होंने सोचा कि कंप्यूटर साइंस में बेहतर अवसर हैं, जो परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगे, इसलिए उन्होंने 2026 में फिर से तैयारी की. सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन कोचिंग से इस बार 99.3081061 परसेंटाइल हासिल किए. यह उनका दृढ़ संकल्प था कि उन्होंने एक साल और मेहनत की और लक्ष्य को और ऊंचा कर लिया.
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परिवार को सरकारी मदद भी नहीं मिल पाई. यह जुड़वां शहर है, एक हिस्सा भैसोदामंडी, मध्य प्रदेश में है, जबकि दूसरा भवानीमंडी राजस्थान में. तनिष्क का घर भैसोदामंडी में है जो मध्य प्रदेश में पड़ता है, लेकिन पढ़ाई राजस्थान के सरकारी स्कूल से हुई, क्योंकि स्कूल घर से सिर्फ 100 मीटर दूर था. राजस्थान सरकार की 'अनुकृति' योजना में फ्री कोचिंग के लिए आवेदन किया, लेकिन जन आधार मांगा गया, तो वे मध्य प्रदेश के रहने वाले थे, इसलिए नहीं हो पाया. मध्य प्रदेश की 'सुपर-100' योजना में आवेदन किया, तो 10वीं की MP बोर्ड मार्कशीट मांगी गई. तनिष्क की पूरी पढ़ाई राजस्थान बोर्ड से हुई, इसलिए वहां की योजना का लाभ भी नहीं मिला पाया.
बॉर्डर पर रहने के कारण दोनों राज्यों की योजनाओं का फायदा तनिष्क को नहीं मिला, इसी वजह से उन्हें पूरी तरह से अपनी मेहनत और ऑनलाइन संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ा. तनिष्क के हौसले बुलंद थे, जो किसी योजना के मोहताज नहीं थे. तनिष्क की यह कहानी साबित करती है कि संसाधन कम हों तो भी हौसला, अनुशासन और लगातार मेहनत से बड़े सपने भी आसानी पूरे हो सकते हैं. विपरीत हालातों में भी पढ़ाई के बल पर तनिष्क ने गरीबी की दीवार तोड़ दी है, अब सबकी नजरें उनके JEE Advanced पर हैं. तनिष्क जैसे छात्र देश के लिए मिसाल हैं, जिसने ये साबित कर दिया कि मेहनत के आगे कोई मुश्किल नहीं टिक सकती.
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