ताज महोत्सव-2026 का समापन; यूपी में विकसित होंगे 12 पर्यटन सर्किट
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री व प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इस बार ताज महोत्सव में नए कीर्तिमान बने हैं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : February 27, 2026 at 10:07 PM IST
आगरा: आगरा में 36वें ताज महोत्सव का शुक्रवार देर शाम औपचारिक समापन हो गया. समापन समारोह में यूपी सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने 'आगरा किला ध्वनि एवं प्रकाश' कार्यक्रम और 'रंग-ए-आगरा' किताब का विमोचन किया. इसके साथ ही ताज महोत्सव में सबसे अधिक 12 लाख रुपये की आय अर्जित करने पर पदमश्री अवार्डी लाजवंती को सम्मानित किया गया. लाल चंदन की लकड़ी पर कलाकृति उकेरने वाले दक्षिण भारत के कलाकार बालकृष्णन को भी मुक्ताकाशी मंच से सम्मान मिला.
शिल्पियों का सम्मान और मेले की अवधि में विस्तार: समारोह के दौरान अन्य शिल्पियों, कलाकारों और सहयोगी संस्थाओं को भी उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुरस्कृत किया गया. पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने जनता के उत्साह को देखते हुए शिल्प मेले को दो दिन और बढ़ाने की महत्वपूर्ण घोषणा की. उन्होंने बताया कि बॉलीवुड नाइट में सचिन-जिगर की प्रसिद्ध जोड़ी अपनी सुरीली प्रस्तुतियों से समां बांधेगी. मंत्री जी के अनुसार इस बार ताज महोत्सव ने सफलता के कई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं.

आगरा और ब्रज क्षेत्र में विकास की नई इबारत: मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि आगरा ब्रज का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां भगवान श्रीकृष्ण और भक्त सूरदास की लीलाएं हुई हैं. आगरा और आसपास के जिलों के विकास के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा 800 करोड़ की योजनाओं को क्रियान्वित किया गया है. इनमें शिवाजी म्यूजियम, कोठी मीना बाजार अधिग्रहण और बटेश्वर व शौरीपुर जैसे धार्मिक स्थलों का विकास शामिल है. सरकार जल्द ही प्रदेश में 12 नए पर्यटन सर्किट विकसित करने जा रही है.

पर्यटन पैकेज से रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल: पर्यटन विभाग अब तीन से पांच दिन का विशेष टूरिज्म पैकेज शुरू करने जा रहा है, जिससे होटल इंडस्ट्री और स्थानीय दुकानदारों को सीधा लाभ मिलेगा. मंत्री जी ने बताया कि एक पर्यटक के आने से लगभग छह लोगों को रोजगार मिलता है, जिससे राजस्व में भी वृद्धि होगी. उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि आज यूपी निवेश के लिए उद्योगपतियों की पहली पसंद बन गया है. सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए ग्राम सचिवालयों को वाद्य यंत्र भी प्रदान किए जा रहे हैं.
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