दिल्ली महिला आयोग नियुक्ति घोटाला: गवाह के पेश न होने पर सुनवाई टली, 2 फरवरी को अगली सुनवाई
स्वाति मालीवाल पर दिल्ली महिला आयोग में नियुक्तियों में गड़बड़ियां करने का आरोप है.

Published : January 9, 2026 at 8:38 PM IST
नई दिल्ली: राउज एवेन्यू कोर्ट में शुक्रवार को दिल्ली महिला आयोग में नियुक्तियों में गड़बड़ियों के मामले में किसी भी गवाह के बयान दर्ज नहीं किए जा सके. स्पेशल जज जीतेंद्र सिंह ने 2 फरवरी को अगली सुनवाई करने का आदेश दिया है.
दरअसल, आज गवाह डॉ. दिलराज कौर का क्रास-एग्जामिनेशन किया जाना था, लेकिन वो कोर्ट का समन तामील होने के बावजूद पेश नहीं हुईं. अभियोजन पक्ष ने बताया कि डॉ. दिलराज कौर निजी परेशानी की वजह से कोर्ट में पेश नहीं हो सकीं. उसके बाद कोर्ट ने डॉ. दिलराज कौर को 2 फरवरी को कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी करने का आदेश दिया.
बता दें कि डॉ. दिलराज कौर 16 दिसंबर 2025 को भी पेश नहीं हुई थीं. उस समय उनके ससुर का ऑपरेशन किया गया था, जिसकी वजह से वो कोर्ट नहीं आ सकीं. आज सुनवाई के दौरान आरोपी स्वाति मालीवाल कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुईं. इसके पहले इस मामले में 4 नवंबर को शिकायतकर्ता और पूर्व विधायक बरखा सिंह के बयान दर्ज किए गए. कोर्ट ने दिसंबर 2022 में स्वाति मालीवाल समेत चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. स्वाति मालीवाल ने आरोप तय करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था.
ये भी हैं शामिल: कोर्ट ने स्वाति मालीवाल के अलावा जिन लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था उनमें आयोग की सदस्य प्रोमिला गुप्ता, सारिका चौधरी और फरहीन मलिक शामिल हैं. कोर्ट ने चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 (बी) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13 (2), 13 (1) (डी) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था.
यह है मामला: बता दें कि एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से पूर्व विधायक बरखा सिंह ने 11 अगस्त 2016 को शिकायत कर आरोप लगाया था कि दिल्ली महिला आयोग में नियमों को दरकिनार कर आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों को नियुक्त किया गया. शिकायत में आयोग में नियुक्त हुए तीन लोगों के नाम बताए गए थे, जो आम आदमी पार्टी से जुड़े थे. एसीबी को दी गई शिकायत में आप से जुड़े 85 लोगों की सूची भी दी गई थी, जिनकी नियुक्ति आयोग में होने का दावा किया गया था. इस पर प्रारंभिक जांच के बाद एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज किया था.
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