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100 करोड़ का एसटीपी, 3 करोड़ 20 लाख लीटर गंदे पानी का अंबिकापुर करेगा री-यूज

स्वच्छ भारत मिशन के तहत किये जा रहे कार्यों में अंबिकापुर नगर निगम ने एक और नवाचार किया है. सरगुजा से देश दीपक की रिपोर्ट.

Reuse of drain water
100 करोड़ का एसटीपी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : June 23, 2026 at 12:55 PM IST

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सरगुजा:अंबिकापुर अब सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा रहा है. 32 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम एक प्राइवेट कंपनी को दिया गया है. अंबिकापुर के सेनेटरी पार्क में प्लांट को स्थापित किया जा रहा है. इस प्लांट के जरिये अब शहर में पानी की उपलब्धता बढ़ाई जायेगी और भू जल स्तर के साथ साथ गंगा बेसिन के नियमों को पूरा करते हुये, नदियों में साफ पानी बहाया जाएगा.

3 करोड़ 20 लाख लीटर गंदा पानी होगा फिल्टर

कंपनी के इंजीनियर आलोक यादव ने बताया कि यहां ट्रीट किया गया पानी एग्रीकल्चर, फायर और सिंचाई के लिए यूज होगा. पानी पीने के योग्य नहीं होगा. इसमें जो टीडीएस होता है, उसकी मात्रा काफी होती है, इसलिए हम इसका उपयोग पीने योग्य नहीं कर सकते.

100 करोड़ का एसटीपी (ETV Bharat)

पूरे अंबिकापुर का पानी यहां आयेगा. यहां पर फैक्ट्री नहीं है, फैक्ट्री होती तो उसके लिए डब्ल्यूटीपी बनाते. एक तरह से इंडस्ट्रियल एरिया नहीं है. मतलब अंबिकापुर के डोमेस्टिक यूज का पानी है, जिसे शुद्ध किया जाएगा: आलोक यादव, इंजीनियर

स्वच्छ भारत मिशन अभियान

स्वच्छ भारत मिशन के नोडल अधिकारी रितेश सैनी ने बताया कि अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र में अभी एसटीपी का निर्माण कार्य चल रहा है. वर्तमान अंबिकापुर नगर निगम जो क्षेत्र है, इसमें जो पानी का वास्तविक ढलान है, वह शहर की तीन दिशा की ओर जाता है. तीन नालों के माध्यम से शहर का बाहर पानी जा रहा है. चाहे वो शहर के नालियों का पानी हो या बरसाती पानी हो. इसमें अभी जो दूषित पानी है, जिसका कोई उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, इसके लिए तीन एसटीपी प्लांट निर्माणधीन हैं.

इस एसटीपी प्लांट के बनने से यह लाभ होगा कि अभी जो दूषित पानी है, जो नालों के माध्यम से आ रहा है, उसका हम वहां पर उपचार कर पाएंगे. उपचार करने के बाद जो उपचारित जल हमारे पास होगा, उसका फिर उपयोग करेंगे. अभी किसी भी प्रकार के जल का पुनरुपयोग यहां नहीं हो पा रहा है. जिस तरह से वेस्ट मैनेजमेंट में कागज, प्लास्टिक का पुनरुपयोग कर रिसाइक्लिंग कर रहे हैं. उसी तरह से ये वाटर रिसाइक्लिंग की ओर एक अच्छा कदम होगा: रितेश सैनी, नोडल अधिकारी, स्वच्छ भारत मिशन

रिसाइकल्ड वाटर का उपयोग करना इको फ्रेंडली

रितेश सैनी ने बताया कि वर्तमान में आप देखेंगे कि चाहे निर्माण कार्य हो, उसमें बहुत भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है. सड़कों की धुलाई करनी हो, सिंचाई का कार्य करना हो, उद्यानों का या किसी व्यक्ति का कोई उद्योग लगा रहा है. अगर उसमें भी पानी की जरूरत है तो इस प्रकार से रिसाइकल्ड वाटर का उपयोग करना इको फ्रेंडली है. हम एक दूषित जल को उपचारित करके पानी का पुनरुपयोग कर रहे हैं. वर्तमान में शहर में ग्राउंड वाटर लेवल घटता जा रहा है.

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अच्छा कदम

रितेश सैनी ने बताया कि वर्तमान में अगर आप देखेंगे तो लगभग 26 मिलियन लीटर पानी हम लोग पेयजल के रूप में सप्लाई कर रहे हैं. कुछ लोग बोरवेल से यूज कर रहे हैं और यह सारा का सारा पानी का पुनरुपयोग नहीं हो पा रहा है और बिना उसका उपचार किए नालों के माध्यम से जा रहा है. यह कहीं ना कहीं प्रदूषण उत्पन्न कर रहा है. चाहे वो जल प्रदूषण हो या भूमि के अंदर जाकर प्रदूषण उत्पन्न कर रहा है. इसको उपचार करने के बाद उस जल का पुनरुपयोग करेंगे. इससे एक तो फ्रेश वाटर का लोड भी कम आएगा और पानी हमारा पुनरुपयोग होगा. ये पर्यावरण के लिए एक अच्छा कदम होगा.

नदी का जल भी दूषित होने से बचेगा

रितेश सैनी ने बताया कि भविष्य की मांग को देखते हुए 32 मिलियन लीटर पर डे प्लांट की क्षमता का तीन प्लांट बना रहे हैं. भविष्य में 32 मिलियन लीटर का ट्रीटमेंट हम कर पाएंगे. लगभग 32 मिलियन लीटर में पुन: उपयोग करने के बाद उपचारित करने के बाद 30 मिलियन लीटर पर डे हमारे पास होगा. जिसको बड़े निर्माणकर्ता खरीद सकते हैं.

कोई उद्योग को यदि पानी की जरूरत हो तो वो खरीद सकता है. इसके साथ ही जितना हम उपयोग कर पाएंगे उपयोग करेंगे और जो उपयोग नहीं हो पाएगा, वो उन्हीं नालों में छोड़ दिया जाएगा. यह उपचारित जल होगा, दूषित जल नहीं होगा. आगे जाकर किसी कार्य में या कहीं न कहीं उसका पुनरुपयोग होगा ही.

नालों का गंदा पानी होगा साफ, खेती में आएगा काम

रितेश सैनी ने बताया कि अंबिकापुर का नालों के माध्यम से जो पानी जाता है, वो रिह रेण नदी के माध्यम से सोन नदी से होते हुए गंगा बेसिन में जाता है. ये ट्रिब्यूटरी है. नालों के माध्यम से अभी हम जो अनुपचारित जल भेज रहे हैं वो कहीं ना कहीं जाकर के नदी में जुड़ रहा है. इस प्लांट के लग जाने से यह सुनिश्चित होगा कि जितना पानी हम पुनरुपयोग कर पाएंगे वो तो होगा ही. जो शेष पानी है, वह जाकर के नदी में कम से कम शुद्ध रूप से उपचारित जल उसमें जाकर के मिलेगा.

100 करोड़ का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होगा स्थापित

नगर निगम आयुक्त डी एन कश्यप ने बताया कि नगर निगम अंबिकापुर में लगभग 100 करोड़ का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट जिसको एसटीपी कहते हैं, वो स्वीकृत हुआ है. शहर की जो बड़ी नालियां हैं, नाले हैं. तीन नालों के माध्यम से पूरा शहर का पानी अभी बहता है. तीन जगह हम लोगों ने 16 एमएलडी, 14 एमएलडी और दो एमएलडी स्वीकृत किया है और एसटीपी का काम चालू है.

इससे शहर के गंदे पानी का उपचार हो जाएगा. पानी स्वच्छ हो जाएगा. जिसको खेतों में, पार्कों में, गार्डन में या अन्य हमारे बायोगैस प्लांट में उपयोग किया जाएगा और उसके अतिरिक्त जो पानी बचता है, उसको हम लोग नदी में शुद्ध करके बहाएंगे.

शंकर घाट,सेनेटरी पार्क सरगंवा में लगेगा एसटीपी

बहरहाल शहर के शंकर घाट नदी से पहले 16 एमएलडी का, सेनेटरी पार्क के पास 14 एमएलडी का और सरगंवा में 2 एमएलडी का एसटीपी लगाया जा रहा है. आने वाले समय में शहर में कुल 32 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होगा, जिसके माध्यम से प्रतिदिन 3 करोड़ बीस लाख लीटर पानी को साफ करके उसका दोबारा उपयोग किया जा सकेगा. हालांकि इतना पानी उपयोग कर पाना संभव नहीं है, लेकिन इससे सिर्फ पेयजल सप्लाई का लोड कम नहीं होगा बल्कि ग्राउंड वाटर रिचार्ज और गंगा बेसिन को साफ़ रखने में बड़ी मदद मिलेगी.

क्या है गंगा बेसिन

दरअसल केंद्र सरकार द्वारा शुरू किये गये नमामी गंगे प्रोजेक्ट के तहत गंगा को साफ रखना है, जिसमें ये तय किया गया और कौन से वो क्षेत्र हैं, जिनका पानी गंगा में आकर मिलता है. ऐसे शहरों को गंगा बेसिन की सूची में शामिल किया गया. अंबिकापुर भी इस सूची में शामिल है, क्योंकि इसके नालों का पानी रेन नदी के माध्यम से सोन और गंगा में मिलता है. इस ट्रीटमेंट प्लांट के बाद अंबिकापुर के नालों से जाने वाला पानी भी शुद्ध होगा, जो रेन, सोन और गंगा के प्रदूषण को कम करने में सहयोग करेगा.

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