पलामू में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत की वजह आई सामने, इस बात की आशंका
पलामू में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत के बाद अब इसका रहस्य सामने आया है. रांची से उपेंद्र कुमार की रिपोर्ट.

Published : July 2, 2026 at 4:17 PM IST
रांची: पलामू के सिक्का गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की रहस्यमयी बीमारी से मौत और एक अन्य सदस्य की गंभीर हालत ने पूरे इलाके को भयभीत कर दिया है. स्वास्थ्य विभाग और रिम्स के वरिष्ठ चिकित्सक इस मामले की जांच में जुटे हैं.
रिम्स के इमरजेंसी सह ट्रॉमा सेंटर के हेड डॉ. प्रदीप भट्टाचार्या ने स्पष्ट किया कि पलामू से इलाज के लिए आई महिला में आर्गेमोन मेक्सिकाना के सभी लक्षण मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि आर्गेमोन मेक्सिकाना के बीज सरसों के बीजों जैसे दिखते हैं और कई बार जानबूझकर या अनजाने में सरसों के तेल में मिल जाते हैं.
डॉ. भट्टाचार्या के अनुसार, सरसों के साथ आर्गेमोन के बीज पीसने से तेल विषाक्त हो जाता है. इसमें सैंगुनारिन (Sanguinarine) नाम का टॉक्सिन बनता है, जो स्लो प्वाइजन की तरह काम करता है. यह ब्लड में सर्कुलेट होकर छोटी कैपिलरीज और धमनियों को प्रभावित करता है, फिर किडनी और हार्ट को खराब कर देता है. ज्यादातर मौतें इसी कारण होती हैं.
कोई एंटीडोट नहीं, सिर्फ सपोर्टिव इलाज
डॉ. प्रदीप भट्टाचार्या ने बताया कि सैंगुनारिन का कोई एंटीडोट नहीं है. इलाज में दूषित तेल का सेवन बंद करना और लक्षणों के आधार पर सपोर्टिव केयर दिया जाता है. उन्होंने कहा कि चिकित्सकीय अनुभव और परिवारिक इतिहास से साफ है कि यह एपिडेमिक ड्रॉप्सी है. रिम्स में भर्ती मरीज का इलाज भी इसी के लक्षणों के आधार पर चल रहा है.
पलामू परिवार की दर्दनाक कहानी
पलामू जिले के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव के रहने वाले कुलदीप महतो के परिवार पर कहर टूटा है. पिछले 12 दिनों में परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई है. इसमें कुलदीप महतो की 19 जून को, बेटी बबीता कुमारी की 20 जून को, दूसरी बेटी इंदु कुमारी की 26 जून को, बहू श्वेता कुमारी की 28 जून को और बेटा नकुल महतो की 29 जून को मौत हुई. कुलदीप महतो की पत्नी लाखो देवी का इलाज रिम्स ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में चल रहा है, जहां उनकी हालत में सुधार दिख रहा है.
लाखो देवी की सेवा में लगी बेटी अनीता देवी ने बताया कि उनके माता-पिता ने अपने खेत में सरसों उगाई थी और एक महीने से उसी का तेल खाने में इस्तेमाल कर रहे थे. डॉक्टरों के अनुसार यही तेल इस हादसे की वजह बना.
1998 का दिल्ली प्रकोप, जब ड्रॉप्सी ने मचाया कहर
डॉ. प्रदीप भट्टाचार्या ने याद दिलाया कि वर्ष 1998 में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में एपिडेमिक ड्रॉप्सी का सबसे बड़ा प्रकोप हुआ था. सरसों के तेल में आर्गेमोन मिलावट की वजह से 3000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए और 65 लोगों की मौत हो गई.
एपिडेमिक ड्रॉप्सी संक्रामक रोग नहीं है. यह आर्गेमोन मेक्सिकाना (सत्यानाशी या मेक्सिकन पॉपी) के बीजों वाले तेल के सेवन से होती है. इसके टॉक्सिन रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर कैपिलरीज में रिसाव पैदा करते हैं, जिससे शरीर में सूजन आती है.
लक्षण और गंभीर परिणाम
शुरुआती लक्षण सामान्य बीमारी जैसे होते हैं- उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी. बाद में पैरों में सूजन, त्वचा लाल होना, जलन, सांस लेने में तकलीफ, हृदय संबंधी समस्या, आंखों में रक्तस्राव और ग्लूकोमा जैसी स्थितियां हो सकती हैं. गंभीर मामलों में हार्ट फेलियर या किडनी फेलियर से मौत हो जाती है.
इलाज और बचाव की सलाह
डॉ. भट्टाचार्या ने कहा कि ड्रॉप्सी की कोई विशेष दवा नहीं है. उपचार लक्षणों के आधार पर होता है - दूषित तेल बंद करना, आराम, सूजन नियंत्रण की दवाएं और जरूरत पड़ने पर हृदय-श्वसन संबंधी सपोर्ट.
बचाव के उपाय:
- खुला या बिना ब्रांड वाला तेल न खरीदें.
- पैक्ड और प्रमाणित तेल का इस्तेमाल करें.
- किसान सरसों बोते समय ध्यान रखें कि आर्गेमोन के बीज न मिलें.
- तेल पेराई के समय सावधानी बरतें.
रिम्स में विशेष व्यवस्था
रिम्स प्रबंधन ने लाखो देवी के इलाज के लिए तीन डॉक्टरों की कमिटी गठित की है. इसकी अध्यक्षता डॉ. प्रदीप भट्टाचार्या कर रहे हैं. कमिटी में नेफ्रो विभाग की हेड डॉ. प्रज्ञा पंत घोष और मेडिसीन विभाग के डॉ. अभय शामिल हैं.
लाखो देवी के घर से तेल समेत सभी खाने-पीने की वस्तुओं के सैंपल फोरेंसिक लैब और फूड टेस्टिंग लैब भेजे गए हैं. मृतकों के बिसरा की भी जांच चल रही है. रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन डॉ. भट्टाचार्या ने लक्षणों और इतिहास के आधार पर एपिडेमिक ड्रॉप्सी का गहरा संदेह जताया है.
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